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पुत्री से दुराचार के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

अल्मोड़ा। अपनी पुत्री से दुराचार के आरोपी पिता को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीडि़ता को सात लाख रूपये का प्रतिकर देने का आदेश पॉक्सो नियमावली के तहत दिया है।विशेश न्यायाधीश (पॉक्सो) डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने करीब एक माह पूर्व मानव तस्करी व बाल विवाह के मामले में अभियुक्त को दंडित किया था। पीडि़ता द्वारा पटवारी क्षेत्र पनुवानौला में प्रार्थनापत्र दिया गया था कि उसका पिता उससे कई बार बलात्कार कर चुका है। बुद्धवार को अभियुक्त को न्यायाधीश ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्त को अपने बचाव के लिए वरिश्ठ अधिवक्ता हरीश लोहुमी न्यायमित्र के रूप में उपलब्ध कराये गये, जबकि राज्य सरकार की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जीसी फुलारा, एससी नैनवाल, विशेश लोक अभियोजन पॉक्सो बीके जोशी व महिला अधिवक्ता निर्भया प्रकोश्ठ अभिलाशा तिवारी उपस्थित हुए। सभी पक्षकारों को सुनने के बाद न्यायालय द्वारा अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 व पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के अंतर्गत दोशी मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत दंडित किया गया। न्यायालय ने कहा कि पीडि़ता की आर्थिक स्थिति खराब है तथा व अनुसूचित जाति की भी है। इसलिए आदेश में उसे 7 लाख रूपया प्रतिकर देने का आदेश भी पॉक्सो नियमावली 2012 के नियम 7 के अंतर्गत पारित किया गया।

 

धर्मग्रंथों में तो ऐसे अपराध के लिए मृत्युदंड भी कम: कोर्ट

अल्मोड़ा। फैसला देते समय न्यायालय ने यह उल्लेखित किया कि इस तरह के जघन्य कुकर्म के लिए मृत्युदंड की सजा भी कम होगी। रामचरित्र मानस के श्लोक का उद्वरण देते हुए कहा कि अपनी पुत्री, छोटे भाई की पत्नी, पुत्रवधु या बहिन से दुराचार करने वाले का यदि वध कर दिया जाये तो पाप नहीं होगा। किंतु भारत एक लोकतांत्रिक देश है अतएव निहित कानून के अनुसार ही अभियुक्त को सजा सुनाई गई है।

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