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रुद्रपुर में तेजी से बढ़ रहा है नशे का कारोबार, 2013 से अब तक 12 लोग गंवा चुके हैं जान

हनी उपाध्याय
रुद्रपुर। जी हां, आपने सही सुना है। बात शहर में तेजी के फैलते नशे के कारोबार की हो रही है। जिस कारोबार ने छोटे शहरों में आजकल काफी तेजी पकड़ी हुई है। इसका सीधा प्रभाव हमारे घरों के उन बच्चों पर पड़ता है, जो नशे की आदत का शिकार बन चुके हैं।
डाक्टरों की मानें तो इस तरह के नशे के आदी हो चुके लोग खासकर युवा और स्कूली बच्चे इन नशा करने के बाद बनने वाले माहौल के आदी हो जाते हैं। जिस माहौल को ये लोग अपनी रोजाना दिनचर्या का हिस्सा मानने लगते हैं जिसकी खुराक बराबर न मिलने पर ये अपना मानसिक संतुलन भी कभी-कभी खो बैठते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो नशे का सेवन अधिक मात्रा में करने से जान का जोखिम भी बना रहता है। युवा पीढ़ी नशे के दल-दल में फंसकर जिंदगी बर्बाद कर रही है। वहीं कई युवा नशे का सामान खरीदने के लिए चोरी सहित कई आपराधिक घटनाओं में भी लिप्त हो रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि इन मौत की पुडिय़ों को आखिर बेच कौन रहा है। जनाब इन मौत की पुडिय़ों को इंसान को बेचने वाला भी एक इंसान ही है। जो प्रशासन से बचकर खुद की जान का जोखिम लेकर दूसरों को मौत की पुडिय़ा धड़ल्ले से बेचता आ रहा है।
सूत्रों से प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक रुद्रपुर में भी इन नशे के कारोबारियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। नशीले पदार्थ चरस, गांजा, ब्राउन शुगर आदी को युवाओं के बीच प्रशासन की नाक के नीचे बेचा जा रहा है। हालांकि प्रशासन द्वारा कई बार इन लोगों को दबोचा भी जा चुका है, लेकिन बावजूद इसके बिना किसी खौफ के नशे का यह कारोबार शहर के कई इलाकों में आसानी से फल-फूल रहा है।
एनडीपीसी एक्ट के तहत पुलिस प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई
वर्ष 2016 -2017
माह जुलाई-दिसंबर जनवरी दर्ज मुकदमे 25 07 हवालात भेजे गये अपराधी 27 06

स्कूली बच्चे व युवा धंसते जा रहे नशे के दल-दल में
मलिन बस्तियों में चलने वाला नशे का कारोबार स्कूल-कालेजों के विद्यार्थियों और युवाओं को भी शिकंजे में ले रहा है जिस कारण ये लोग इस कीचड़ रूपी नशे के दल-दल में धंसते जा रहे हैं। नशे के बदले अधिक से अधिक रकम वसूलने के लिये इन पैडलरों द्वारा स्कूली बच्चों और युवाओं को टारगेट बनाया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इन पैडलरों द्वारा नशे की होम डिलीवरी भी शुरू की जा चुकी है। इतना ही नहीं, कई बार नशे का सामान खरीदने के लिए पैसे नहीं होने पर नशे के लती लोग अपराध करने से भी नहीं चूकते हैं। नशे के दल-दल में फंसकर जिंदगी बर्बाद कर चुके कुछ युवाओं से बात की गई तो उन्होंने अपनी जुबां से नशे के कारोबार की पोल खोल दी। उन्होंने बताया कि अगर आपके पास अच्छी रकम है तो चरस, स्मैक, अफीम, गांजा, इंजेक्शन, गोलियां जो चाहें, वो पैडलरों से मिल जाता है।

ऐसे बने नशे के आदी
जिला अस्पताल में बने एंटी नशा केन्द्र में इलाज के लिये आये क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में पढऩे वाले छात्र ने बताया कि पड़ोस में उसका एक दोस्त नशा करता था। उसके घर पर स्मैक और चरस पीने वाले युवकों का जमावड़ा रहता था। एक दिन वह भी युवकों के संपर्क में आया और स्मैक का सेवन कर लिया। पहले तो स्मैक का सेवन कर उसे अच्छा लगा, लेकिन बाद में वह उस नशे का लती हो गया। स्मैक के लिए पैसे नहीं होने पर उसने गोलियां खानी शुरू कर दी। इसी बीच उसकी पढ़ाई पर भी गहरा असर पड़ा, वहीं परिवार वाले भी उसकी आदतों के कारण परेशान रहने लगे। अब वह जिला अस्पताल में रोजाना वैक्सीनेशन लगवाकर अपना उपचार करा रहा है।

किस हद तक बेहाल कर सकती है नशे की ओवरडोज
हमारे शरीर में 90 प्रतिशत पानी है। इस बात से सभी लोग वाकिफ हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह के नशों के ओवर सेवन से हमारे शरीर में पानी का स्तर कम हो जाता है। इसके बाद शरीर की धड़कनें तेजी पकड़ लेती हैं। इतना ही नहीं, शरीर में पर्याप्त पानी न रहने के चलते अकडऩ व बेचैनी हो जाती है। नशे के बाद दिमाग गुम हो जाता है। किसी भी तरह की बातें बार-बार नशे का सेवन कर चुके युवक के सामने मंडराती रहती हैं। इस तरह के माहौल के बाद वो रोजाना इस प्रक्रिया को दोहराना पसंद करता है। नशे का लती हो चुका शरीर नशा के लिए फिर किसी भी हद को पार करने को मजबूर हो जाता है।

नशे की लत के कारण बीते वर्ष जिला अस्पताल के ओएसटी केन्द्र में भर्ती हुये लोगों के आकड़े-
जनवरी- 104
फरवरी- 97
मार्च- 105
अप्रैल- 104
मई- 105
जून- 108
जुलाई- 122
अगस्त- 131
सितंबर- 134
अक्टूबर- 137
नवबंर- 140
दिसंबर- 158

‘युवाओं के बीच नशा एक किसी तेजी से फैलती बीमारी की तरह है। नशा चाहे किसी प्रकार का हो, अंत में परिणाम उसके घातक ही होते हंै। जिसकी चपेट में हमारे देश के भविष्य स्कूली बच्चे और युवा काफी तीव्रता से आते जा रहे हैं। जिला अस्पताल में नशे से बेहाल लोगों के लिये उपचार का अलग केन्द्र बनवाया गया है जिसमें रोजाना 90 लोगों को वैक्सीनेशन दी जा रही है। वही काफी लोग इन आदतों को छोडऩे में सफल भी रहे हैं। नशे के दल-दल में फंस चुके लोगों को बाहर निकालना बेहद जरूरी है।
-पीसी पंत, पीएमएस जिला अस्पताल रुद्रपुर

‘नशे की लत का शिकार ज्यादातर युवा और छात्र हो रहे हैं। यहां आने वालों में से अधिकतम मरीजों की आयु 18 वर्ष से कम होती है। इलाज के दौरान पाया गया है कि इन आदतों में ये लोग किसी को देखादेखी या परिवार द्वारा की गई अनदेखी, नशेड़ी दोस्तों के साथ उठने-बैठने के कारण या किसी तरह के मानसिक दबाव के चलते नशे की आदतों के शिकार हो जाते हैं। उपचार के दौरान अधिकतर लोगों में एचआईवी की शिकायत भी देखी गई है, जो कि इंजेक्शन द्वारा किये गये नशे से इनके शरीर में किसी इनपैक्टेड से प्रवेश कर लेता है। इस तरह की आदतें जानलेवा भी साबित हो सकती हंै। इसलिये इन आदतों के शिकार हुये लोगों के परिजनों को अपने बच्चे की गतिविधियों के साथ ही उसके फू्रंड सर्किल पर भी खास निगाह रखनी चाहिये। 
-मनोवैज्ञानिक, श्वेता दीक्षित।

‘शहर में आये दिन छोटे-मोटे नशे के कारोबारियों को पकड़ा जा रहा है। पूर्व में भी जानकारी मिलने पर इस तरह के कई लोगों पर कार्रवाई कर जेल भी भेजा जा चुका है। नशे के करोबार को बढ़ावा कोई बड़े माफिया द्वारा नहीं बल्कि समय के साथ उत्पन्न हुये छोटे-मोटे पैडलरों द्वारा दिया जा रहा है जिनकी धर-पकड़ के लिये प्रशासन काफी सख्ती बरते हुये है। इस तरह के कारोबार करते पाये जाने पर मुजरिम को सीधा जेल का रस्ता दिखाया जायेगा।
– मंजूनाथ टीसी, सहायक पुलिस अधीक्षक

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