Home / Breaking News / आखिरी बार 2015 को सोमवारी बाबा आश्रम पदमपुरी में की थी पूजा

आखिरी बार 2015 को सोमवारी बाबा आश्रम पदमपुरी में की थी पूजा

नारायण दत्त तिवारी के गृह क्षेत्र में निधन के कारण शोकाकुल हैं लोग

प्रदीप कुमार, धारी/नैनीताल। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी अपने गृह क्षेत्र में अंतिम बार 21 अक्टूबर 2015 को पदमपुरी में आये थे। यहां पर उन्होंने अपनी पत्नी उज्जवला व बेटे रोहित शेखर के साथ सोमवारी बाबा आश्रम पहुंचकर पूजा अर्चना की अपने चचेरे भाई दुर्गा दत्त तिवारी के बच्चों से भी मुलाकात की। खुद को अपनों के बीच पाकर तिवारी भावुक हो गए थे। वर्षों बाद अपने बुजुर्गों को सामने देख परिजन भी गदगद हो उठे थे। हल्द्वानी से पदमपुरी तक लोगों ने जगह जगह फूल व मालाओं से तिवारी का जोरदार स्वागत किया था। 21 अक्टूबर 3.30 बजे अपने गांव पहुंचने पर नारायण दत्त तिवारी का ग्रामीणों ने पदमपुरी में बैंड बाजों के साथ स्वागत किया था। उन्होंने की कुशल मंगल जानी। उनके जो पुराने साथी आज उनके बीच नहीं है। वह उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते थे। उन्होंने कहा था कि पहाड़ क्षेत्र में शिक्षा सडक़ें, बिजली, अस्पताल खोले थे और इसमें व्यवस्था करना सरकार का काम है। इस दौरान क्षेत्र के कई बुजुर्गों ने भी तिवारी से भेंट की थी और पुरानी यादें ताजा की। तिवारी ने यह भी कहा था की इससे पहले वह वर्ष 2004 में पदमपुरी में आये थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1952 में उन्होंने हल्द्वानी विधान सभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ा था और उस दौरान उन्होंने सोमवारी बाबा से आशीर्वाद प्राप्त किया था बाबा के आशीर्वाद से ही वह चुनाव जीते थे। अंतिम बार 21 अक्टूबर 2015 को पदमपुरी में आये थे। यहां पर उन्होंने अस्वस्थ होने के बावजूद अपनी पत्नी उज्जवला व बेटे रोहित शेखर के साथ सोमवारी बाबा आश्रम पहुंचकर पूजा अर्चना की। आश्रम के लोगों की कुशल क्षेम पूछी।

 

 

 

 

सोमवारी आश्रम से गहरी आस्था थी एनडी तिवारी की

नैनीताल। पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी की अपने गांव स्थित सोमवारी आश्रम में गहरी आस्था थी। वह जब भी नैनीताल जनपद भ्रमण पर आते तो सोमवारी आश्रम पदमपुरी में दर्शनार्थ अवश्य जाते। उत्तराखंड के परम योगी सोमगिरी महाराज आज से 92 वर्ष पूर्व जब अचानक पदमपुरी पहुंचे तो उस समय बालक नारायण अपने पिता संपूर्णानंद तिवारी की गोद में बैठे थे। बालक की चपल बाते सुन कर सोमगिरी महराज काफी प्रभावित हुए। उन्होंने तिवारी के सिर पर हाथ रख कर कहा था कि यह बालक विश्वविख्यात नागरिक व नेता बनेगा। बाद के वर्षों में नारायण दत्त तिवारी जब उन्नति के शिखर छूते रहे तो उनकी आस्था सोमवारी आश्रम के प्रति गहरी होती चली गई। आश्रम को भव्यता देने में तिवारी ने योगदान दिया।

 

 

 

चाचा से 50 रूपये मांग कर इलाहाबाद रवाना हुए तिवारी

नैनीताल। नारायण दत्त तिवारी को बचपन से ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने की उत्कंठा रही। लेकिन गरीबी के कारण वह इसके लिए चिंतित रहते थे। लेकिन उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इसके लिए आवेदन पत्र दिया था। जो स्वीकृत होकर भी आ गया। वह पहले पास के गांव धानाचूली में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी जोध सिंह प्रधान के पास पहुंचे और उनसे इलाहाबाद जाने के लिए 25 रूप्ये मांगे। इसके बाद वह पदमपुरी में अपने चाचा बच्ची राम के पास पहुंचे और इलाहाबाद पढ़ाई के लिए 50 रूपये मांगे। चाचा ने उन्हें 50 रूपये दे दिये। 12 जुलाई 1944 को वह प्रयागराज पहुंच गये। उस वक्त उनके पास एक धोती व एक फटा कम्बल था। वह इलाहाबाद में मदन मोहन मालवीय से मिले। मालवीय तिवारी के व्यक्तित्व से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 20 रूपया छात्रवृत्ति दिला दी। कुछ दिन मालवीय जी के सानिध्य में रहने के बाद वह विवि के हिन्दू हास्टिल में रहने लगे। विद्यार्थी जीवन में उन्हे इलाहाबाद में फिरोज गांधी का सानिध्य भी मिला। उनकी ओर से तिवारी को आर्थिक सहयोग भी मिला। तिवारी का व्यक्तितत्व ही था कि साथियों के अपार प्रेम के कारण वह बीए, एमए व एसएसबी की पढ़ाई पूरी कर सके। इसी दौरान उन्होंने विवि के सीनेट हाल में राष्ट्रीय ध्वज भी फहरा दिया। उन्हें विवि से निश्कासित कर दिया। लेकिन तभी देश को आजादी मिल गई। कुलपति को उनका निष्कासन वापस लेना पड़ा। तिवारी विवि में इतने लोकप्रिय हो गये कि 1947 में वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष भी भारी मतों से चुने गये।

About saket aggarwal

Check Also

हल्द्वानी : चोर गिरफ्तार, जेल भेजा

हल्द्वानी। घर में घुसकर चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले चोर को पुलिस ने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *