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अभिभावक क्रिकेट कल्याण समिति के जारी रहेंगे प्रयास

सफलता तो मिली पर मंजिल अभी दूर
रणजी मैच की मेजबानी बड़ी उपलब्धि : गुप्ता
अब बीसीआई से मान्यता अगला लक्ष्य : मिश्रा
देहरादून। उत्तराखंड के होनहार क्रिकेटरों के हक और उनके भविष्य की लड़ाई अभिभावक क्रिकेट कल्याण समिति आगे भी जारी रखेगी। समिति का मानना है कि रणजी मैच की मेजबानी मिलना प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि तो है, मगर अभी बहुत कुछ पाना बाकी है। समिति का कहना है कि 17 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद सफलता तो मिली, लेकिन यह अभी शुरुआत है और मंजिल दूर है। इसलिए, समिति अपना संघर्ष लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (बीसीसीआई) से उत्तराखंड को मान्यता समिति का पहला लक्ष्य भी है और मकसद भी। उत्तराखंड में अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग अलापती आए प्रभावी क्रिकेट संघों के बीच एका होने की हलचल से उत्साहित समिति इससे उत्साति है। समिति ने दो बड़े क्रिकेट संघों सीएयू और यूसीए का विलय और टी-20 क्रिकेट एसोसिएशन का भी साथ आना शुभ संकेत बताते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता मिल जाएगी।
उत्तराखंड को बीसीसीआई से मान्यता का विवाद और इस विवाद के चलते सूबे में क्रिकेट के खेल और खिलाडिय़ों को होता आ रहा नुकसान किसी से छिपा नहीं है। बीसीसीआई से मान्यता न मिलने के कारण प्रदेश के प्रतिभावना क्रिकेट खिलाड़ी या तो बाहरी राज्यों से खेलने को मजबूर हैं, या फिर कई वर्षों की जीतोड़ मेहनत और अच्छा खेल होने के बावजूद उन्हें किसी और कॅरियर में भविष्य तलाशना पड़ रह है। बीसीसीआई की मान्यता में शुरूआत से ही असली पेंच उत्तराखंड में एक-दो नहीं बल्कि चार प्रदेश स्तरीय क्रिकेट संघों का सक्रिय होकर अपनी ढपली-अपना राग अलापना रहा है। बीसीसीआई का दो टूक कहना है कि जब तक अलग-थलग पड़े क्रिकेट संघ एक मंच पर नहीं आते मान्यता का इश्यू यूं ही लटका रहेगा। क्रिकेट एसोसिएशनों के अहम और वर्चस्व की इस लड़ाई में लगभग 17 वर्ष निकल गए है। इस विकट स्थिति को भांपकर क्रिकेट खेलने वाले बच्चों के अभिभावकों को भी एकजुट होकर मोर्चा खोलने को मजबूर होना पड़ा।
इसकी पहल दून डिफेंस एकेडमी के डायरेक्टर संदीप गुप्ता और अविरल क्लासेस के डायरेक्ट डीके मिश्रा आदि की ओर से की गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में अभिभावक एकजुट हो गए और क्रिकेट संघों से अलग अभिभावक क्रिकेट कल्याण समिति के बैनर तले उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता के मुद्दे पर मुहिम ने गति पकड़ ली। समिति ने इस मामले में उत्तराखंड में सक्रिय क्रिकेट संघों से लेकर बीसीसीआई तक लगातार संपर्क साधकर प्रदेश के होनहार क्रिकेटरों से न्याय की पैरवी की। साथ ही धरन-प्रदर्शन के लोकतांत्रिक कदम भी उठाए। इस मामले में कोई रास्ता न निकलने पर समिति ने जनहित याचिका के जरिये अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प भी खुला रखा। मगर, अब ताजा घटनाक्रम से समिति के प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं। समिति के अध्यक्ष संदीप गुप्ता और उपाध्यक्ष डीके मिश्रा के अनुसार सफलता की शुरुआत हो चुकी है, रणजी मैच के आयोजन के साथ यह मुहिम और आगे बढ़ेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दीवाली के आसपास बीसीसीआई की प्रस्तावित वार्षिक बैठक में उत्तराखंड को मान्यता के मुद्दे पर अहम फैसला हो जाएगा। फिलहाल, हमारी नजर इसी बैठक पर टिकी है।

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