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आमजन कंठस्थ कर ले वाहन एक्ट, सरकारी वाहनों पर निष्प्रभावी

सलीम खान, हल्द्वानी। देश भर में नये मोटर वाहन एक्ट ने आम आदमी की समझ को दुरुस्त करने का काम भी किया है। वाहन प्रदूषण, इंश्योरेंस की जांच को लंबी कतारों में रोचक बहसें जन्म ले रही हंै। हालिया बहस में सामने आया है कि सरकारी वाहनों का बीमा ही नहीं होता। सवाल भी वाजिब है कि जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कानून जनता के लिए है तो सरकारी मुलाजिमों के लिए क्यों नहीं है?

फर्ज कीजिए कोई व्यक्ति किसी सरकारी वाहन से टकराकर मर जाता है तो बीमा क्लेम उसके परिवार को कैसे और किन परिस्थितियों में हासिल होगा। क्योंकि जिस सरकारी वाहन से दुर्घटना हुयी है उसका तो बीमा ही नहीं है और यदि सरकारी गाड़ी में सवार मुलाजिम ही मृत्युगति को प्राप्त हो गये तो आम आदमी तो गया काम से। ऐसे ढेरों सवाल अब प्रदूषण जांच को खड़ी कतारों में लगे लोगों के बीच आम हो चले हैं। इसलिये आम आदमी इस नये मोटर वाहन एक्ट को भली-भांति कंठस्थ कर ले। हालांकि सरकारी वाहनों का बीमा न किये जाने के पीछे एक बहुत पुराना एक्ट है जिसमें संशोधन की जरूरत दिखाई दे रही है। किसी पुलिस कर्मी व कोई प्रशासनिक अधिकारी से कोई पूछे आपके वाहन का बीमा नहीं है तो आप किस नैतिकता के आधार पर आम जन की तलाशी कर रहे हैं।

 

 

 

हादसे पर पुलिस भी टरका देती

हल्द्वानी । यदि किसी प्राइवेट वाहन से कोई वाहन टकरा जाता है तो दोनों वाहन स्वामी लंबी बहस के बाद कोतवाली पहुंचते हैं पुलिस उन दोनों वाहन स्वामियों से उनके वाहनों के इंश्योरेंस के बारे में जानकारी जुटाती है और दोनों को वाहन का क्लेम लेने की सलाह देकर अपना पलड़ा झाड़ लेती है। यदि किसी वाहन स्वामी का इंश्योरेंस नहीं होता है तो उसके खिलाफ पुलिस मुकदमा लिखने को तैयार हो जाती है।

 

 

मियां दूसरों को नसीहत, अपने आप…

हल्द्वानी। यहां एक कहावत चरितार्थ होती हुई नजर आ रही है कि मियां दूसरों को नसीहत, अपने आपको फजीहत। क्योंकि किसी भी सरकारी वाहन का इंश्योरेंस नहीं होता है। अगर किसी सरकारी वाहन ने आम जन के वाहन को टक्कर मार दी तो क्या सरकारी अधिकारी उसको क्लेम देगा या फिर आम आदमी उस सरकारी वाहन के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज करेगी या उसे हुड़की में लेकर रवाना कर देगी।

 

 

 

पिसना तो आमजन ने ही है

हल्द्वानी। अगर आम आदमी ने सरकारी वाहन को टक्कर मार दी तो अक्सर देखा गया है कि सरकारी वाहन का चालक उससे अपना रौब दिखाकर वाहन को सही कराने की बात कहता है। नहीं तो उस आमजन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात कहता है। ऐसे में दोनों ही ओर से आमजन ही पिसता हुआ नजर आ रहा है। खुदानाखास्ता प्राइवेट वाहन से सरकारी वाहन को टक्कर लग जाती है और इसमें कोई जन हानि हो जाती है तो क्या सरकार या विभाग उस सरकारी आदमी को कहां से क्लेम देगी। ये बहुत बड़ी बिडम्बना है।

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