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पशुपालन व कृषि को बढ़ावा देने में नाबार्ड का अग्रणीय योगदान : चौहान

अल्मोड़ा। ग्रामीण समाज कल्याण समिति ‘ग्रास’, तल्ला चीनाखान द्वारा नाबार्ड के अंतर्गत कृषक क्लब मीट विद एक्सपर्ट कार्यक्रम ग्राम चौना, पठूरा, गल्ली बस्यूरा, चिनौना, बड्यूरा, रमणा में आयोजित किया गया। इस मौके पर ‘ग्रास’ संस्था के निदेशक गोपाल सिंह चौहान ने यह अवगत कराया कि ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालन और कृषि को बढ़ावा देने के लिये नाबार्ड जैसी संस्था हमेशा अपना अग्रणी योगदान प्रदान करती है।
इस कार्यक्रम में नाबार्ड के डीडीएम मनोज शर्मा ने किसानों को अवगत कराया कि कृषि एवं पशुपालन पर्वतीय क्षेत्र की रीढ़ है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने को हर संभव प्रयास करते हुए भारत सरकार, राज्य सरकार, कृषि उद्यान विभाग, पशुपालन एवं स्वयं सेवी संस्थाएं अपनी भूमिका निभा रहे हैं। 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिये किसानों की विभिन्न समस्याओं से संघर्ष करते हुए अधिक परिश्रम करना होगा। उन्होंने कहा, नाबार्ड द्वारा किसानों के लिये वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं है। डॉ. मनोज पांडे-पशु चिकित्साधिकारी दौलाघट ने कृषकों को जानकारी देते हुए कहा कि पशुपालन एवं कृषि परस्पर संबंध रखते हैं। पशुपालन भी पर्वतीय क्षेत्र का मुख्य व्यवसाय है। यह व्यवसाय गरीब परिवारों की आय का एकमात्र साधन है किंतु यहां पशुपालन का व्यवसाय काफी परेशानी युक्त है, क्योंकि उन्नत नस्ल के जानवर नहीं हैं तथा हरा चारा, दवा, टीकाकरण जैसी मूलभूत सुविधाएं कृषकों को उपलब्ध नहीं हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ी गाय की पशुपालन विधि एवं बैफ केन्द्रों से नस्ल सुधार विधि को आवश्यक रूप से अपनाना चाहिये तथा टीकाकरण, चारा प्रबन्धन, उन्नत नस्ल के पशुओं को रखने से ही अधिक लाभ कमाया जा सकता है। ‘ग्रास’ संस्था के निदेशक गोपाल सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों एवं कृषक क्लबों के माध्यम से नई तकनीकी का ज्ञान तथा बीजों द्वारा उत्पादन क्षमता बढ़ाना, मृदा परीक्षण, पशुपालन में नस्ल सुधार जैसे कार्यक्रमों की जागरूकता फैलाने से किसान क्लब एवं किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि इस कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ अपने विभागों की सम्पूर्ण जानकारी ग्रामीण स्तर तक पहुंचाते हैं।
इस अवसर पर चौना की मुख्य समन्वयक विमला देवी, पठूरा की सुशीला कांडपाल, गल्ली बस्यूरा से चंद्रकला बिष्ट, बड्यूरा से ममता पांडे, रमणा से कमला बिष्ट, चिनौना से लीला राणा, ‘ग्रासÓ संस्था के भूपेंद्र चौहान, दीपा सिराड़ी, प्रकाश कुमार, चंचल लोहनी आदि ने भी अपने विचार रखे।

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