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अल्मोड़ा मेडिकल कालेज को मान्यता रद्द करने पर उबाल

अल्मोड़ा। अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में अगले सत्र से पढ़ाई शुरू कराने के सरकार की मंशा पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा पानी फेर दिया गया है। एमसीआई द्वारा मान्यता देने से इंकार करने से, जहां सरकार को झटका लगा है, वहीं विपक्षीय दल कांगेस सहित अन्य दलों ने एइस मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का फैसला लिया है। कांग्रेस ने बकायदा 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि कॉलेज के लिए स्वीकृत धनराशि शीघ्र आवंटित नहीं की गई तो धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जायेगा।

बुधवार को पूर्व दर्जा राज्यमंत्री बिट्टू कर्नाटक ने मेडिकल कॉलेज पर यहां जारी बयान में कहा कि भाजपा सरकार ने कहा था कि, वह अगले सत्र से अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की प्रस्तावित 100 सीटों पर पढ़ाई प्रारंभ कर देगी, परंतु एनसीआई ने अल्मोड़ा मेडिकल कालेज का निरीक्षण करने के बाद मूलभूत संसाधनों के अभाव में कॉलेज को मान्यता देने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि बकायदा प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज के लिए एनसीआई से ने अल्मोड़ा मेडिकल कालेज को मान्यता दिए जाने की गुजारिश की थी। उन्होंने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने मेडिकल कॉलेज के निर्माण में कांगे्रस शासनकाल में स्वीकृत धनराशि को रोक स्वास्थ्य सेवाओं को अवरूद्ध करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इसका जीता जागता उदाहरण है एमसीआई की ग्राउण्ड रिपोर्ट। जिसमें एमसीआई ने कहा कि अल्मोड़ा में मेडिकल कॉलेज के लायक कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। कहा कि मान्यता रद्द करने से एमबीएस की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को गहरा धक्का लगेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पंद्रह दिनों के भीतर मेडिकल कॉलेज को पूर्व में स्वीकृत धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई तो कांग्रेसी कार्यकर्ता अन्न-जल त्याग सरकार के खिलाफ एक दिन का धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। वहीं उपपा ने भी मेडिकल कॉलेज को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार की उदासीनता का परिणाम है कि एमसीआई द्वारा किए गए निरीक्षण में कोई भी बुनियादी संसाधन कॉलेज परिसर में नजर नहीं आया। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि जन स्वास्थ्य जैसे आवश्यकीय मुद्दे पर सरकार का उपेक्षित रवैया हताश करने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए की मेडिकल कॉलेज में सरकार को आवश्यकीय संसाधन शीघ्रतिशीघ्र मुहैया कराने चाहिए ताकि, पर्वतीय राज्य को डॉक्टरों की समस्या से निजात दिलाया जा सके।

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