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अल्मोड़ा: जंगल आग  से धधके, वन विभाग के दावों की खुली पोल

अल्मोड़ा। फायर सीजन से पहले ही जंगलों में लगी आग ने वन विभाग के दावों की पोल खोल कर रख दी है। जंगलों में लगी आग से जहां बहुमूल्य वन संपदा नश्ट हो रही है। वहीं, पर्यावरणीय असंतुलन भी बिगड़ रहा है। इधर, आग को बुझाने में वन विभाग के हाथ- पॉव फूलते नजर आ रहे है। वहीं, विभागीय अधिकारी स्टॉफ का रोना रो अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे है।

बीते दिनों कसारदेवी, बिंसर सेंचुरी से लगे जंगलों में लगी भीषण आग से लाखों की वन संपदा जल कर राख हो गयी। वहीं, जैती के जंगलों में लगी आग ने वन विभाग के फायर सीजन को लेकर की गए पूर्ण तैयारी के दावों की कलई खोल कर रख दी है। हालांकि वन विभाग कसार देवी के जंगलों में लगी आग को असामाजिक तत्वों द्वारा लगाई बता रहा है। लेकिन फायर सीजन से पहले जंगलों में धधक रही आग विभाग के पुख्ता तैयारी करने के कोरे दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रहे है। अगर सामाजिक संगठनों के लोग और ग्रामीण आग को बुझाने में मदद नहीं करते तो वन विभाग के लिए आग पर काबू पाना दूर की कोड़ी साबित होता। इधर जंगलों में लग रही आग धीर-धीरे आबादी की ओर बढ़ती जा रही है। विभाग की हीलाहवाली देखिए कि विभाग के पास जंगलों में लगी आग का कोई डाटा व रिकार्ड तक दर्ज नहीं है। कसारदेवी के ग्रामीण धीरेंद्र सिंह ने बताया कि जंगलों मे फायर सीजन से पहले ही आग लगता शुरू हो गयी है। कई बार वन विभाग को सूचना देने के बावजूद भी जंगलों में लग रही आग की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। जबकि, वन विभाग के एसडीओ पृथ्वी राज सिंह ने कहना है कि विभाग पूरी सतर्कता से आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहा है। लेकिन कुछ असामाजिक तत्व जंगलों में आग लगा दे रहे है। जिनके खिलाफ विभाग कार्रवाई करने को अभियान चला रहा है। उन्होंने बताया कि पर्याप्त स्टॉफ नहीं होने दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी सीमित संसाधनों और कर्मिकों के मदद से आग पर काबू पाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

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