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चंद शब्दों में शाह ने कही दूर की बात

बैठकों में बोलने से ज्यादा सुनने पर रखा जोर
बैठकों की गहमागहमी में गुजरा पहला दिन
देर रात तक चलता रहा बैठकों का दौर
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बहुप्रतिक्षित उत्तराखंड प्रवास का श्रीगणेश हो गया। मंगलवार को उनका पहला दिन सुबह से लेकर देर रात पार्टीजनों के साथ बैठकों की गहमागहमी में गुजरा। इस दौरान अमित शाह ने पार्टीजनों को संबोधित करने की बजाय उनकी बात और सुझाव सुनने के साथ ही फीडबैक लेने पर खासा जोर रखा। हालांकि, पहले ही दिन चंद शब्दों में ही दून की बात कहकर उन्होंने अपने दौरे की मंशा भी पार्टीजनों को समझाने की कोशिश की। साथ ही पार्टी के लिए मिशन-2019 की अहमियत को भी इशारों में ही बता डाला। निरंतर सक्रियता और संगठन की मजबूती को उन्होंने भावी चुनौतियों से पार पाने के लिए जरूरी बताया। माना जा रहा है कि प्रवास का दूसरा दिन काफी अहम रहेगा और अमित शाह दून से विदा लेने से पहले अपना सटीक संदेश प्रदेश भाजपा और त्रिवेंद्र सरकार को देंगे।
अमित शाह के प्रवास के पहले दिन की दिनभर की गतिविधियों का केंद्र राजधानी में होटल मधुबन रहा। उत्तराखंड के भाजपा विधायकों, सांसदों, पूर्व सांसदों, मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक से करीब साढ़े 11 बजे प्रवास से जुड़े उनकी गतिविधियों का सिलसिला शुरू हुआ। इसी क्रम में शाम तक पार्टीजनों के साथ बैठकों का सिलसिला चलता रहा। शाम को उन्होंने ओएनजीसी के ऑडिटोरियम में प्रबुद्ध सम्मेलन में शिरकत की और फिर रात करीब नौ बजे के बाद मुख्यमंत्री आवास में विधायकों व सांसदों के साथ बैठक करने में मशगूल हो गए। इससे पहले शाह ने मुख्यमंत्री आवास में ही करीब डेढ़ घंटे का समय अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के लिए आरक्षित रखा।
बैठकों के इस सिलसिले के साथ लगातार आगे बढ़े मंथन के दौर में अमित शाह ने पार्टीजनों की खुले दिल से बात सुनीं। उनके सुझावों का स्वागत किया और बातों ही बातों में संगठन और सरकार की नब्ज भी टटोल डाली। इन बैठकों में माध्यम से उन्होंने पार्टी के लोगों को उनके सुझाव और समस्याओं पर त्वरित सुनिश्चित अमल का भरोसा भी दिलाया। साथ ही मिशन-2019 को भी पार्टीजनों के मन-मस्तिष्क में बैठाते हुए जोश जगाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मिली सफलताओं पर इठलाकर अपने में ही खो जाना ठीक नहीं। हमें अभी रुकना नहीं, बल्कि लगातार सफलताओं के साथ आगे बढ़ते हुए भविष्य की चुनौतियों से भी पार पाना है। इसके लिए उन्होंने निरंतर जनता के बीच में सक्रियता, सरकार का बेहतर कामकाज, संगठन की एकजुटता, कार्यकर्ताओं को तवज्जो, सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल सहित कई अन्य बिंदुओं पर अमल जरूरी बताया।

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