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गैरसैंण में बजट सत्र के पहले ही दिन चढ़ा सियासी पारा

सदन में हंगामे के बीच हुआ राज्यपाल का अभिभाषण
प्रदेश की त्रिवेंद्र सरकार ने पहले गैरसैंण में पूरा बजट सत्र आयोजित कराने और फिर यहां तक की दूरी सडक़ मार्ग से ही नापने की अच्छी पहल कर जनभावनओं को सहेजने का प्रयास भले ही किया है, मगर इस बजट सत्र में सरकार की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही है। सत्र के पहले ही दिन सदन के भीतर और बाहर चढ़े सियासी पारे ने साफ कर दिया है कि त्रिवेंद्र सरकार को पूरे सत्र के दौरान चुनौतियों से दो चार होना पड़ेगा। मंगलवार को गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे पर विपक्ष ने जहां सदन के भीतर तीखे तेवर बनाए रखे, वहीं बाहर आंदोलनकारियों और विभिन्न संगठनों सहित सियासी दलों के कार्यकर्ताओं ने सरकारी मशीनरी की नाक में दम किए रखा। पहले दिन की यह तस्वीर साफ बयां कर रही है कि पूरे बजट सत्र में गैरसैंण का मामला सरकार को रह रहकर परेशान करता रहेगा।

विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर जताया विरोध
गैरसैंण/देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के ऐतिहासिक बजट सत्र का मंगलवार को भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में हंगामे के साथ आगाज हो गया। सदन में विपक्ष ने गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। राज्यपाल डा केके पॉल ने विपक्ष के इस हंगामे के बीच ही अभिभाषण पढ़ा।
अभिभाषण के दौरान स्थायी राजधानी को लेकर कांग्रेसी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। कांग्रेसी विधायक नारेबाजी करते हुए वेल पर चले गए और वहीं धरने पर बैठ गए। अभिभाषण के बाद कांग्रेस के हंगामे के चलते स्पीकर ने सदन को तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। तीन बजे सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने फिर हंगामा शुरु कर दिया। इससे पहले अपने करीब 32 पेज के अभिभाषण में राज्यपाल ने राज्य सरकार की उपलब्धियों सहित भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। राज्यपाल ने कहा कि सरकार राज्य की मूलभूत चुनौतियों के समाधान व राज्य को उत्तरोत्तर विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ ही स्वच्छ, पारदर्शी नीति को अपनाते हुए भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाकर अंतिम व्यक्ति को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोडऩे का प्रयास सरकार कर रही है। अभिभाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया गया। साथ ही भविष्य का खाका भी रखा गया। गैरसैंण विधानसभा बजट सत्र राज्यपाल के अभिभाषण में 35 बिंदुओं पर फोकस किया गया। अभिभाषण में गैरसैंण को प्राथमिकता दी गई। भराड़ीसैंण गैरसैंण में मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए 67.50 एकड़ भूमि हस्तान्तरित की कार्यवाही में तेजी लाने का जिक्र किया गया। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड में पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने और सिंचाई से किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सकारात्मक पहल की जा रही है। उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार देने और परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास हो रहे हैं। मजबूत प्रशासनिक तंत्र को मजबूत पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की पहल की गई है।
उन्होंने कहा कि लोक सेवकों के लिए स्वच्छ एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति, युवा वर्ग में विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास, समाधान पोर्टल के तहत स्मार्ट आईवीआर सिस्टम के माध्यम से शिकायतों को जल्द समाधान करने की पहल की जा रही है। आपदा से बचाव और राहत कार्यों को लेकर राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में प्रमुखता रखी। पारदर्शी आबकारी नीति के तहत जिले के स्थाई निवासियों को ही दुकानें आवंटित करने की पहल, राज्य स्तर पर उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधा सुलभ कराने के लिए दुर्गम और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की बात राज्यपाल ने कही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य योजना के तहत परिवारों को चयनित करते हुए 13 लाख 3 हजार राशनकार्डों को ऑनलाइन किया गया है। सरकार द्वारा विभिन्न विकास कार्यों का संपादन एवं ग्राम पंचायत क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों के माध्यम से विकास के कार्यों को मूर्त रुप दिया जा रहा है। 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों एवं 5 हजार मिनी आंगनबाड़ी केंद्र पर टेक होम राशन की व्यवस्था तथा हर दिन स्कूल में उपस्थित होने वाले 3 से 6 साल के बच्चों को मार्निंग स्नैक्स एवं ताजा पका भोजन उपलब्ध कराने की पहल सरकार ने की है। प्रदेशवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

गैरसैँण मुद्दे पर बोलने का कांग्रेस को नहीं नैतिक अधिकार: सीएम
गैरसैंण/देहरादून। भराड़ीसैंण में बजट सत्र से पहले ही राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस के हंगामे पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण के मुद्दे पर कांग्रेस को बोलने का अधिकार नहीं है।
सदन स्थगित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कहा कि कांग्रेस को गैरसैंण मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। उत्तराखंड बनने के 17 सालों में 10 साल कांग्रेस ने सत्ता संभाली। तब गैरसैंण राजधानी को लेकर कांग्रेस को कभी याद नहीं आई। अब शोर शराबा कर कांग्रेस केवल जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। अंतरात्मा से गैरसैंण के पक्ष में कभी भी कांग्रेस ने पहल नहीं की।

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