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पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को उद्योग का दर्जा

टिहरी में त्रिवेंद्र कैबिनेट ने रोजगार के लिए लिए तीन बड़े फैसले
टिहरी झील पर पहली बार हुई कैबिनेट की बैठक
13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन योजना को मंजूरी
देहरादून। भारत के सबसे ऊंचे टिहरी बांध की झील में मरीना फ्लोटिंग बोट पर बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार का फोकस पर्यटन और रोजगार पर रहा। सरकार ने अपने निर्णय को मजबूती देते हुए कैबिनेट में 3 बड़े फैसले लिए। सरकार ने 13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू टूरिस्ट डेस्टिनेशन योजना को मंजूरी दे दी। साथ ही एमएसएमई नीति और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली में भी अहम बदलाव किए। सीएम त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई। उत्तराखंड के इतिहास में किसी भी सरकार की यह पहली कैबिनेट बैठक है जो बोट पर हुई। बैठक के लिए फ्लोटिंग मरीना बोट को रंग बिरंगे फूलों से सजाया गया था। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य बोट पर सवार होकर फ्लोटिंग मरीना तक पहुंचे। इसके लिए चार बोटों का विशेष इंतजाम किया गया है। थराली उपचुनाव में व्यस्त होने के कारण राज्य मंत्री डा धन सिंह रावत बैठक में भाग नहीं ले सके।
शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि सरकार ने एमएसएमई पॉलिसी में संशोधन करते हुए अब पर्यटन से जुड़ी बहुत सी गतिविधियों को उद्योग का दर्जा दे दिया है। बताया कि अब कायाकल्प रिजॉर्ट, आयुर्वेद, योगा, पंचकर्मा, बंजी जंपिंग, जॉय राइडिंग, सर्फिंग, कैंपिंग व राफ्टिंग जैसे उद्यम एमएसएमई नीति के अंतर्गत आएंगे। उद्यमियों को नीति के अंतर्गत अनुमन्य तमाम सुविधाएं प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार सरकार ने मेगा इंडस्ट्री इन्वेस्टमेंट नीति के अंतर्गत आयुष और वेलनेस सेक्टर को लाने का निर्णय लिया है। इससे होटल, रिजॉर्ट, क्याकिंग, सी प्लेन उद्योग, आयुर्वेद व योगा जैसी 22 गतिविधियां मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी के अंतर्गत विभिन्न लाभों के लिए अनुमन्य होंगी।
माइक्रो सेक्टर में रोजगार सृजन करने के लिए सरकार ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली नीति में 11 नई गतिविधियों को शामिल किया है। इन गतिविधियों में क्याकिंग, टेरेंनबाइकिंग, कैरावैन, ऐंग्लिंग, स्टार गेसिंग, बर्ड वाचिंग जैसे कार्यों के लिए उपकरणों के क्रय करने के लिए सहायता दी जाएगी। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य पर्यटन और रोजगार को आपस में जोडक़र प्रदेश के युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है।
बुधवार को टिहरी में आयोजित कैबिनेट में लिए गए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में 13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन योजना शामिल है। इसके अंतर्गत सभी 13 जिलों के 13 नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने की मंजूरी दी गई। अल्मोड़ा में कटारमल, नैनीताल में मुक्तेश्वर, पौड़ी में सतपुली खैरासैण, चमोली में गैरसैंण-भराड़ीसैंण, देहरादून में लाखामंडला, हरिद्वार में 52 शक्तिपीठ थीम पार्क, उत्तरकाशी में हरकी दून मोरी, टिहरी में टिहरी झील, रुद्रप्रयाग में चिरबिटिया, उधमसिंह नगर में गूलरभोज, चंपावत में देवीधुरा, बागेश्वर में गरुड़ वैली और पिथौरागढ़ में मोस्ट मानस को इस योजना के अंतर्गत न्यू डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।
कैबिनेट द्वारा लिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में दीनदयाल सामाजिक सुरक्षा कोष के अंतर्गत 1 प्रतिशत की दर से एक लाख रुपये तक के ऋण के लिए किन्नर श्रेणी को भी सम्मिलित किया गया है। इस कोष का संचालन जिला स्तर पर बनी कमेटी द्वारा किया जाता है, जिसमें सीडीओ अध्यक्ष होते हैं। एक अन्य निर्णय में रुद्रप्रयाग जिले के बेला कोटेश्वर में स्वामी माधवाश्रम धर्मार्थ ट्रस्ट चिकित्सालय को सरकार द्वारा संचालित करने का निर्णय लिया गया है। मेंथा प्रजाति के उत्पादों के लिए मंडी शुल्क माफ कर दिया गया है। एमसीआई के पूर्व के 7 पदों को बढ़ाकर 15 पद करने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट द्वारा उत्तराखंड राज्य अधीन सेवा में वैयक्तिक सहायक के संवर्गीय पदोन्नति पद और अधीनस्थ वैयक्तिक सहायक सीधी भर्ती के पदों के लिए दो नियमावलियों को भी स्वीकृति दी गई है। एससी-एसटी और ओबीसी के आरक्षण गणना में 1.5 से ऊपर को 2 पद मानने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
कैबिनेट के उपरांत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार पर्यटन को उत्तराखंड में रोजगार सृजन के बड़े माध्यम के रूप में देख रही है । टिहरी झील में कैबिनेट आयोजित करने का एक बड़ा मकसद यही था कि टिहरी झील सहित उत्तराखंड के तमाम पर्यटन स्थलों को दुनिया के पर्यटन नक्शे पर लाने का लाया जा सके। इसी कड़ी में टिहरी लेक फेस्टिवल भी आयोजित किया जा रहा है। टिहरी झील के सर्वांगीण विकास से घनसाली, प्रताप नगर चिन्यालीसौड़ तक लोगों को विकास का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार रोजगारवर्ष के रूप में यह वर्ष मना रही है।
कहा कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित किए जाएंगे। सरकार द्वारा लाई गई पिरूल नीति में 14 मीट्रिक टन पिरूल से 150 मेगावाट बिजली बनने की तथा साठ हज़ार लोगों को रोजगार देने की संभावना है। पिरूल नीति का लाभ उठाकर गांव की महिलाएं और नौजवान हर माह 8 हज़ार से 10000 घर बैठे कमा सकते हैं।

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