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साडा का हुआ एमडीडीए में विलय, पहाड़ों में उद्योग लगाने को आवष्यकता अनुसार भूमि खरीद की मंजूरी देगी सरकार, त्रिवेंद्र कैबिनेट के फैसले

देहरादून। प्रदेश के पर्वतीय जिलों में उद्योगों की स्थापना को लेकर सरकार ने अहम फैसला किया है। अब निवेशकर्ताओं को पहाड़ों में उद्योग लगाने के लिए उनकी जितनी आवश्यकता होगी, भूमि खरीदने या लीज पर लेने की मंजूरी सरकार देगी। मंगलवार को सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। लंबे समय बाद लोकसभा की आचार संहिता हटने के बाद यह कैबिनेट बैठक हुई।
बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि बैठक में 15 बिंदु पर चर्चा के बाद फैसले लिए गए। उन्होंने बताया कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, बागवानी पर आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशक को उसकी डिमांड के अनुसार भूमि लेने की मंजूरी सरकार जांच के बाद देगी। अभी तक ये सीमा 12.5 एकड़ थी। इसी तरह मैदानी क्षेत्र में कृषि भूमि के अलावा आवश्यकता अनुसार अन्य भूमि को खरीदने व लीज पर लेने की मंजूरी सरकार देगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में संविदा पर फार्मासिस्टों के 600 पदों के लिए शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। इसके बदले सरकार अब वेलनेस सेंटरों की स्थापना के लिए करीब 2000 विभिन्न पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करेगी। यह भर्ती प्रक्रिया इण्डियन पब्लिक हेल्थ स्टेण्डर्ड के अनुसार होगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीए) के तहत नियोक्ता के अंशदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे सरकारी खजाने पर हर साल 150 करोड़ का व्ययभार बढ़ेगा। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) को एमडीडीए में मर्ज करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसी के साथ अब साडा का पूरा क्षेत्र फिलहाल, एमडीडीए के अधीन आ गया है। साडा से जुड़े देहरादून से बाहर अन्य जिलों के क्षेत्रों को स्थानीय जिला विकास प्राधिकरण के अधीन लाने के लिए अलग से फैसला जल्द लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस विलय के बाद प्राधिकरण में पूर्व से 149 कार्मिकों के अतिरिक्त 111 कार्मिकों के पदों की स्वीकृति मांगी गई थी। वित्त विभाग की संस्तुति के बाद इनमें 49 पदों की स्वीकृति दे दी गयी। शेष पदो ंके लिए मुख्य सचिव के अधीन गठित समिति निर्णय लेगी।
मदन कोषिक ने बताया कि नगर निगमों को वित्तिय अधिकार देने की दिषा में जारी प्रयासों के तहत सरकार ने एक और फैसला किया है। अब छह करोड़ तक की वित्तिय स्वीकृति के प्रस्ताव के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की मंजूरी की आवष्यकता नहीं होगी। कैबिनेट ने नगर निगम स्तर पर ही पांच सदस्यों की कमेटी बनाकर वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। नगर निगमों में यह कमेटी नगर आयुक्त की अध्यक्षता में काम करेगी।
उन्होंने कहा कि कोर्ट में दायर एक रिट याचिका के परिप्रेक्ष्य में सरकार राज्य में वनों क्षेत्र का निर्धारण/परिभाषित तीन कैटेगरी में करेगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। पहली कैटेगरी में वह क्षेत्र आएगा जो राज्य में पहले से वन क्षेत्र में अधिसूचित है। दूसरी कैटेगरी में राज्य के किसी भी राजस्व रिकार्ड में उल्लेखित 10 हेक्टेयर या इससे अधिक क्षेत्र, जिसमें 60 प्रतिषत तक वनों का घनत्व है, षामिल किया जाएगा। तीसरी कैटेगरी में प्रदेष में किसी भी स्वामित्व में 10 हेक्टेयर या उससे अधिक ऐसी भूमि जो बाग व फूलों से आच्छदित न हो और उसमें वनों का घनत्व 60 प्रतिषत है, को षामिल किया जाएगा।

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