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सूबे में बच्चों के खिलाफ तेजी से बढ़े अपराध

बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर : खंडूड़ी
देहरादून। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने कहा कि पिछले छह सालों में उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ अपराधों में सात गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अन्य हिमालयी राज्यों के मुकाबले ज्यादा गंभीर है। आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ अपराधों का पंजीकरण तेजी से बढ़ रहा है। यह पंजीकरण 2015 की तुलना में 2016 में 6 प्रतिशत बढ़ा। उन्होंने कहा कि नेशनल क्राइम रिकाड्र्स ब्यूरो ने साल 2016 की अपनी रिपोर्ट में राज्य को बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक माना था। साथ ही बच्चों से जुड़े अपराधों की सुनवाई के मामलों में राज्य की अदालतों की धीमी गति भी चिंताजनक है। ऐसी स्थिति में दोषियों को सजा दिलाना मुश्किल होता है।
सोमवार को बाल अधिकार और बच्चों की सुरक्षा पर आयोजित कार्यशाला के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्थिति में बच्चे न तो घर में सुरक्षित हैं और न ही बाहर। ऐसे में बच्चों से जुड़े सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही बाल सुरक्षा नीति को साकार कर इसके क्रियान्वयन के लिए ठोस पहल की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि आयोग बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और लगातार इस दिशा में काम कर रहा है। बच्चों से संबंधित विभाग स्वयंसेवी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशनÓ और ‘बचपन बचाओ आंदोलनÓ उत्तराखंड में बच्चों की सुरक्षा के संदर्भ में जारी प्रयासों में आयोग के साथ बढ़ चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, बचपन बचाओ आंदोलन और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणÓ ने राज्य में बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।

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