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एक साल में मेरी साइकिल तक पंक्चर नहीं हुई, आप सड़कों पर मर रहे हैं : धौंडीराम

बिना ब्रेक की साइकिल से जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी की यात्रा पर निकले धौंडीराम पहुंचे हल्द्वानी
हल्द्वानी। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का उद्देश्य लेकर जम्मू-कश्मीर से बिना ब्रेक की साइकिल से कन्याकुमारी के लिए निकले महाराष्टï्र के सोलापुर निवासी धौंडीराम आज हल्द्वानी पहुंच गए। उनका कम से कम दो दिन हल्द्वानी में ही रुकने का मन है।  धौंडी का दावा है कि गत वर्ष 28 फरवरी को अपनी बिना ब्रेक की साइकिल से निकले थे, और तब से अब तक उनकी साइकिल का टायर तक पंक्चर नहीं हुआ है। उनका सवाल है कि जब मैं इतनी लंबी यात्रा में उनकी पुरानी साइकिल सही सलामत है तो हमारे युवा छोटी – छोटी यात्राओं में दुर्घटनाग्रस्त क्यों हो जाते हैं।
महाराष्टï्र में अन्ना हजारे के गांव रालेगण सिद्धी से 70 किमी दूर सोलापुर के रहने वाले धौंडीराम जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक की साइकिल यात्रा का संकल्प लेकर निकले धौंडीराम की असली यात्रा जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से शुरु हुई है और अब तक वे पांच प्रदेशों का सफर तय करचुके हैं। लगभग पचास वर्षीय धौंडीराम के जीवन पर स्वामी विवेकानंद का प्रभाव है। वे मानते हैं कि जब तक लक्ष्य को तय करने के बाद इंसान को बस उसी लक्ष्य पर विचार करना चाहिए। ठीक वैसे ही किसी यात्रा पर निकलने से पूर्व हमें अपने गंतब्य के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए और पूरी यात्रा में गंतब्य को ही मन में रखना चाहिए। दुर्घटनाएं अपने आप नहीं होंगी।
पूणे से एलएलबी अपीयर करने वाले धौंडीराम बताते हैं कि जब वे घर से निकले तो उनकी जेब में तीन हजार रुपये थे, लेकिन दिल्ली पहुंचते-पहुंचते वे रुपये समाप्त हो गए। तब से अभी तक वे लोगों के सहयोग से ही रहने व खाने का खर्चा चला रहे हैं। वे कहते हैं कि एक आदमी को हर रोज खर्च ही कितना चाहिए। बस समाज के लेाग इतनी मदद कर देते हैं। कमाने के लिए थोड़े ही यात्रा पर निकला हूं।
लगातार साइकिल यात्रा से थकान के सवाल पर वे कहते हैं। हर रोज नए नए लोगों से मिलकर यह थकान मिट जाती है। स्कूलों में बच्चों को सड़क सुरक्षा पर लेक्चर देता हूं। जहां लोग मिलते हें उनसे बात करता हूं। इस तरह यात्रा में आने वाले कम से कम दो साल तो कट ही जाएंगे। इस बीच वे घर पर अपनी मां व बड़े भाई के संपर्क में भी रहते हैं। पटियाला में मनप्रीत सिंह ने उन्हें छोटा सा मोबाइल गिफ्ट किया था। अब वह ही उन्हें घर परिवार से जोड़ता है। धौंडीराम अविवाहित है, शादी के सवाल पर वे कहते हें यात्रा पूरी होगी यह सब उसके बाद देखा जाएगा।

यात्रा का एक-एक मुकाम याद है उन्हें
धौंडीराम की एकाग्रता कमाल की है। अपनी यात्रा के दौरान वे जिस शहर या गांव से गुजरे वे सब उन्हें जुबानी याद हैं। इन सभी नामों को वे बिना रुके लगभग सात मिनट में आपको सुना सकते हैं।

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