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बॉयोफ्यूल से चलने वाली देश की पहली फ्लाइट को रवाना करते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

एक्सक्यूसिव: जेट्रोफा पौधे से तैयार ईंधन से पहली बार उड़ाया गया विमान

देश के हवाई इतिहास में दर्ज हुआ जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम

चंद्रमोहन कोठियाल जौलीग्रांट (देहरादून)। देश के वैज्ञानिकों ने जेट्रोफा पौधे के बीजों से तैयार ईंधन के इस्तेमाल से पहली बार किसी कामर्शियल विमान को उड़ाने में सफलता प्राप्त की है।

देश के हवाई इतिहास में पहली बार सोमवार के दिन जौलीग्रांट एयरपोर्ट से जेट्रोफा पौधे से तैयार ईंधन द्वारा एक कामर्शियल फ्लाइट का सफल ट्रायल किया गया। स्पाइसजेट कंपनी के क्यू400 वॉम्बरडियार (78 सीटर) विमान ने सुबह 11 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट से डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए), इंडियन इंस्ट्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) और स्पाइसजेट के विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों की कुल 23 सदस्य टीम को लेकर दिल्ली के लिए सफल ट्रायल उड़ान भरी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वॉयोफ्यूल से उड़ने वाली देश की इस पहली फ्लाइट को झंड़ी दिखाकर रवाना किया। सीएम ने कहा कि वॉयोफ्यूल भविष्य का ईंधन साबित होगा। जिसके चौतरफा सकारात्मक नतीजे आएंगे।

एयरपोर्ट से 11 बजे उड़ान भरने के 25 मिनट बाद ही यह फ्लाइट दिल्ली में सफलतापूर्वक लैंड हो गई। इस फ्लाइट के एक इंजन में 75 प्रतिशत सामान्य फ्यूल और 25 प्रतिशत बॉयोफ्यूल भरा गया था। जबकि दूसरे इंजन में 100 प्रतिशत वॉयोफ्यूल भरा गया था। स्पाइसजेट के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर जीसी गुप्ता ने कहा कि बॉयोफ्यूल से उड़ान भरने वाली यह देश की पहली फ्लाइट है। बॉयोफ्यूल की गुणवत्ता आमतौर पर विमानों में इस्तेमाल किए जाने वाले फ्यूल से 1.8 प्रतिशत अधिक है। और इस ईंधन को विमानों में इस्तेमाल करने से कार्बन में 50 से 70 प्रतिशत तक की कमी आएगी। ये फ्यूल किफायती भी है। जिससे प्रदूषण रोकने में काफी मदद मिलेगी। एयरपोर्ट निदेशक विनोद कुमार शर्मा ने इस दिन को एतिहासिक बताते हुए बॉयोफ्यूल बनाने वाले वैज्ञानिकों और इस्तेमाल करने वाले इंजीनियरों, तकनीशियनों को बधाई दी है। इस अवसर पर डिप्टी कमांडेंड विक्कर सिंह, एसी राजेश थापा, सीनियर मैनेजर ऑपरेशन सुमित सक्सेना, स्पाइसजेट मैनेजर जसवंत रावत, प्रवीन मलिक, विजेंद्र आदि उपस्थित रहे।

रविवार को बॉयोफ्यूल से विमान ने 25 मिनट तक भरी थी उड़ान

डोईवाला। सोमवार को भले ही वॉयोफ्यूल से स्पाइसजेट की उड़ान का विधिवत शुभारंभ किया गया है। लेकिन इस विमान ने रविवार की शाम लगभग छह बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट से दून के आसमान में 25 मिनट की सफल टेस्ट उड़ान भरी थी। जिसके बाद सोमवार को इस विमान को विधिवत झंड़ी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया गया।

22 हजार टन तेल की होगी बचत

डोईवाला। स्पाइसजेट के सीईओ जीसी गुप्ता ने कहा कि उनकी कंपनी ने 205 नए बोइंग विमानों का आर्डर दिया है। उन्नत किस्म के इन विमनों में हल्के लेकिन मजबूत मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। ये विमान दूसरे विमानों की तुलना में 15 प्रतिशन कम तेल इस्तेमाल करते हैं। इन बोइंग विमानों के इस्तेमाल से प्रतिवर्ष करीब 22 हजार टन तेल की बचत होगी।

देश की इकॉनामी को होगा विशेष फायदा

डोईवाला। बॉयोफ्यूल के इस्तेमाल से भारत की दूसरे देशों पर तेल के लिए निर्भरता कम हो जाएगी। जिससे देश की इकॉनामी को लाभ मिलेगा। स्पाइसजेट के अधिकारियों का कहना है कि वॉयोफ्यूल के नतीजे काफी सकारात्मक आए हैं। अब दूसरी कंपनियों को भी इस नतीजों के बारे में बताया जाएगा। और आईआईपी के सहयोग से तेल कंपनियों से बातचीत की जाएगी। भविष्य में बॉयोफ्यूल देश का पैसा और पर्यावरण बचाने में मिल का पत्थर साबित होगा।

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