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नैनीताल:फिर रोजाना एक इंच घट रहा नैनी झील का जल स्तर

नैनीताल। इस बार झील लबालब होने के बाद जल संस्थान ने कमिश्नर राजीव रौतेला के निर्देश पर की जा रही पानी की रोस्टिंग हटा ली है इसके दुष्परिणाम अब दिखने लगे हैं। इन दिनों झील का जलस्तर प्रतिदिन एक इंच घट रहा है। सोमवार को जल स्तर 11.75 फीट था तो मंगलवार को यह घट कर 11.65 फीट पहुंच गया है। लाखों लीटर पानी जलागम क्षेत्रों से दोहन करने के बाद जीवनदायिनी नैनी झील लगातार प्रभावित हो रही है। एक ओर नैनी झील का जल स्तर लगातार गिर रहा है। दूसरी ओर झील के जलागम क्षेत्रों से भूमिगत जल 11 नलकूपों से आठ लाख लीटर पानी रोजाना लगातार दोहन किया जा रहा है। यह सिलसिला पिछले तीन-चार वर्षों से लगातार चल रहा है। लोगों का कहना है कि जल संस्थान अभी से पानी का वितरण रोस्टर से नही करता तो गर्मियों में शहर की हालत दयनीय हो जायेगी। मालूम हो कि बीते दिनों जब नैनी झील लबालब हो गई तो कुछ भाजपा नेता कमिश्नर राजीव रौतेला से मिले और जल संस्थान द्वारा की जा रही रोस्टिंग को समाप्त करने की मांग की। कमिश्नर ने जीएम जल संस्थान को रोस्टिंग समाप्त करने के आदेश दिये। इसके बाद जल स्ंास्थान ने रोस्टिंग समाप्त कर दी कुछ स्थानों को छोड़ कर शेष शहर में 12 घंटे पानी दिया जा रहा है। इससे पूर्व झील की दयनीय स्थिति को देखते हुए जल संस्थान तीन घंटे सुबह व तीन घंटे सांय पानी की आपूर्ति कर रहा था। पूरे बरसात के दौरान रोस्टिंग जारी रही। लेकिन अब बरसात बंद होने के बाद रोस्टिंग नही की जा रही है। लाखों लीटर पानी दोहन करने के बाद पानी की आपूर्ति से झील का जल स्तर पुन गिर रहा है। इस मामले में कुछ लोगों ने डीएम विनोद कुमार सुमन को अवचगत कराया है। हांलाकि उन्होंने जल संस्थान के अधिकारियों को रोस्टिंग शुरू करने के आदेश दिये है। लेकिन कमिश्नर के आदेशों का हवाला देते हुए विभाग ने इस सबंध में कोई कदम नही उठाया है। विभाग असंमजस की स्थिति में है। मानसून जाने के बाद नैनीताल में पिछले एक पखवाड़े से वर्षा नही हुई है। प्रमुख जलागम क्षेत्र सूखाताल पूरी तरह सूख चुका है। जलागम क्षेत्र से ही जल संस्थान नलकूपों से पानी खींच रहा है। वहीं शहर के दर्जनों स्थानों में लीकेज के कारण पानी बर्बाद हो रहा है। मालूम हो कि नैनी झील 40 प्रतिशत भूमिगत जल से तथा 60 प्रतिशत बरसात के जल से रिचार्ज होती है। झील के जल स्तर को सामान्य बनाने के लिए शीतकालीन वर्षा व पर्याप्त बर्फवारी जरूरी है। लेकिन पिछले तीन सालों से ऐसा नही हो पाया है। जानकारों की माने तो अगर इस बार भी शीतकाल में पर्याप्त वर्षा व बर्फवारी नही हुई तो गर्मियों में जल संकट पैदा हो सकता है। इधर लगातार जलादोहन के बाद झील के जल स्तर पर गिरावट आने के बाद भी सरकारी तंत्र पर कोई प्रभाव नही पड़ रहा है। कई स्थानों में लगातार 12 घंटे पानी की आपूर्ति जारी है। कई स्थानों में पाइप लाइनों से लगातार जल रिसाव हो रहा है। एबीडी द्वारा शहरी पेयजल सुदृढ़ीकरण योजना के बाद जलादोहन अधिक हो गया है। कई स्थानों में बनाये गये जलाशयों से लगातार पानी ओवरफ्लो हो रहा है। इसे देखने वाला महकमा कतई गंभीर नही है।

 

 

 
बाहरी जल स्रोतों पर भी पड़ेगा विपरीत प्रभाव : रावत
नैनीताल। पर्यावरणविद् प्रो. अजय रावत का स्पष्ट कहना है कि सरकारी तंत्र को पानी के लिये अत्यधिक जलादोहन झील के जलागम क्षेत्रों से नहीं करना चाहिये। उनका यह भी कहना है कि जल स्तर गिरने से न केवल नैनीताल शहर में जल संकट होगा बल्कि इसका व्यापक असर उन बाहरी जल स्रोतों को भी पड़ेगा जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को पानी की आपूर्ति की जाती है। उन्होंने बताया कि शहर से बाहर आसपास के कई जल स्रोत ऐसे हैं जिनका सीधा संबंध नैनी झील से है। प्रो. रावत का कहना है कि जल संस्थान को रोस्टर के हिसाब से पानी वितरित करना चाहिये। रोस्टर प्रणाली स ेजल स्तर पर कम प्रभाव पड़ेगा। लोगों को झील के प्रति संवेदनशील होकर पानी की फिजूलखर्ची कम करनी होगी। झील से अधिक पानी दोहन की स्थिति आई और बर्फवारी व बरसात नहीं हुई तो हालात बेहद गंभीर हो जायेंगे। विभाग को पानी की राशनिंग करनी होगी।

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