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लोक संस्कृति के संरक्षण को कार्यशाला शुरु

पूनम ममगाईं युवाओं सिखाएंगी पहाड़ी लोकनृत्य की बारीकियां
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कर रहा आयोजन
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की पारंपरिक एवं पौराणिक लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए एक वर्षीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आगाज हो गया है। भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के अधीन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहबाद की ओर से इस कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। गुरु-शिष्य परंपरा के तहत संचालित होने वाली इस कार्यशाला के लिए लोक कलाकार श्रीमती पूनम ममगाईं को गुरु चयनित किया गया है।

कार्यशाला में लोकनृत्य सीखातीं गुरु पूनम ममगाईं

देहरादून के ग्राम सेवलां कला में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ भाजपा ग्रामीण के मंडल अध्यक्ष नीटू कंबोज ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी श्रीमती अनुराधा वालिया, पुष्कर सिंह चैहान, बबली पंवार, महेश शर्मा सहित कार्यशाला में भाग ले रहे प्रतिभागी भी मौजूद रही। कार्यशाला की गुरु लोक कलाकार पूनम ममगाईं ने बताया कि उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से कार्यशाला मंे उत्तराखंड के पारंपरिक लोक नृत्य झुमैलो, घसियारी, थडिया व चैफला आदि का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यशाला में भाग लेने के इच्छुक युवाओं के लिए आयु 18 से 22 वर्ष रखी गई है। पूनम ममगाईं ने बताया कि वह लंबे समय से पहाड़ी लोक संस्कृति के संरक्षण और उसे बढ़ावा देने के लिए सक्रिय हैं और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने उनके कार्यों की समीक्षा के बाद ही उन्हंे यह अवसर दिया है। कार्यशाला में चयनित शिष्यों के अलावा लोक संस्कृति के लिए सक्रिय प्रतिभावान कलाकारों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में सफल रहे युवाओं को देश के विभिन्न स्थानों पर उत्तराखंड की लोक संस्कृति का प्रदर्शन करने का अवसर भी दिया जाएगा।

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