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फाइल फोटो

हरिद्वार: गंगा दशहरा पर धर्मनगरी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

हरिद्वार। गंगा अवतरण दिवस यानि गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। धर्मनगरी के हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुण्ड में डुबकी लगाने को श्रद्धालुओं की आस्था ब्रह्म मुहूर्त से देखते ही बन रही है। गंगा मैया के जयकारे से हरकी पैड़ी गूंज रहा है। दान-पुण्य कर देश के कोने-कोने से पहुँचे श्रद्धालु इस दिन का विशेष लाभ ले रहे हैं। मान्यता है कि आज के दिन दान का महत्व काफी है और उसकी संख्या दस में होनी चाहिए। तर्पण-श्राद्ध कर्म भी घाटों पर कराते हुए श्रद्धालु दिखे। पंडितों के कहना है कि यदि गंगा में स्नान संभव नहीं हो पा रहा तो अपने नजदीक नदी या सरोवर में स्नान कर दान-पुण्य करना चाहिए। सुरक्षा का घाटों पर पुख्ता इंतजाम रहा। लेकिन हाईवे की दशा के कारण जाम के कारण श्रद्धालु और आमजन बेहाल दिखे। हरिद्वार में इस पावन दिवस पर कलश यात्रा और शोभायात्रा निकाली गई। शनिवार को निर्जला एकादशी पर भी गंगा में श्रद्धालुओं की डुबकी लगेगी।
गंगा दशहरा पर ब्रह्म मुहूर्त से ही हरकी पैड़ी ब्रह्मकुण्ड पर देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने डुबकी लगानी शुरू कर दी थी। हरकी पैड़ी के सर्वानंद घाट, प्रेम नगर आश्रम घाट, ऋषिकुल घाट, दक्ष मंदिर घाट, विश्वकर्मा घाट, गोविंद घाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने पावन डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट और हरकी पैड़ी पर अपने पुरोहितों की गद्दी पर जाकर दान-पुण्य किया। कुछ श्रद्धालुओं ने श्राद्ध और तर्पण भी किया। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित देश के कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे थे। गंगा दशहरा के कारण पुलिस फ़ोर्स की अतिरिक्त तैनाती सुरक्षा के लिहाज से की गई थी। यातायात सुचारू ढंग से चले इसके लिए मुक्कमल तैयारी थी लेकिन अधूरे हाईवे कि वजह से जाम में श्रद्धालु और आमजन बेहाल दिखे।


विश्व समुदाय जे लिए भी गंगा जीवनदायिनी
हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गंगा न केवल भारतवासियों के लिए वरन् विश्व समुदाय के लिए भी जीवनदायिनी है। गंगा पतित पावनी है। उनकी शरण में जो भी आता है, बिना किसी भेदभाव के गंगा मैय्या अपनी गोद में स्वीकारती हैं। उसी तरह वेदमाता गायत्री के जप करने वाले साधकों का भी जप कभी निरर्थक नहीं जा सकता। डॉ. पण्ड्या गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय गायत्री जयंती महापर्व के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गंगा दशहरा व गायत्री जयंती मनाने आये देश-विदेश के हजारों स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता एवं निर्मल गंगा जन अभियान में जुटे सैकड़ों युवा मुख्य रूप से मौजूद रहे। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि 2525 किमी दूरी तय करने वाली पतित पावनी गंगा को अविरल एवं स्वच्छ बनाने की दिशा में गायत्री परिवार तन, मन, धन से संकल्पित है। साथ ही गंगा की सहायक नदियों को भी स्वच्छ किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गंगा पावनता की, तो माँ गायत्री प्रखरता की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि देश की विघटनकारी तत्त्वों के मिटने एवं भारतवर्ष के विश्वगुरु बनने का समय बहुत ही निकट है। डॉ. पण्ड्या ने मुम्बई में जनवरी-2021 में अश्वमेध महायज्ञ करने की घोषणा की।

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