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गरुड़: 6 महीने बाद मिलता हैं चाय बागान श्रमिकों को वेतन

गरुड़। राज्य सरकार एक तरफ पलायन रोकने के लिए गम्भीर होने के दावे कर रही हैं लेकिन दूसरी ओर लगभग 2000 श्रमिक बेरोजगारी की कगार पर हैं। कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन दिए गए है लेकिन कोई सुनने को तैयार नही हैं। शनिवार को उत्तराखण्ड चाय बागान श्रमिक संघ की बैठक कौसानी चाय फैक्ट्री में हुई। समाजसेवी केएस खत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों की मांगों की पिछले लम्बे समय से अनदेखी की जा रही हैं। जिलाधिकारी से लेकर स्थानीय विधायक को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं। बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। श्रमिकों ने चाय बागान की दुर्दशा सुधारने,चाय बागान वैज्ञानिक व निदेशक की तैनाती,श्रमिको की मनमानी तरीके से वेतन कटौती, ईपीएफ काटने,चाय बागानों की उत्पादकता कम होने के कारण,जमीन मालिकों को लीज का 2014 से भुगतान ना होने आदि समस्याओं के निराकरण की माँग की हैं। समाजसेवी लीलाधर पांडे ने कहा कि श्रमिकों के हितों का हनन किया जा रहा हैं। जिस श्रमिक की मेहनत से चाय बोर्ड चल रहा है वो ही अपनी वजूद की लड़ाई लड़ रहा हैं। ऊपर स्तर के अधिकारियों द्वारा श्रमिकों का शोषण किया जा रहा हैं। यदि जल्द से जल्द समस्याओं का निराकरण नही किया गया तो कोर्ट की शरण ली जाएगी। श्रमिक चन्दन सिंह भण्डारी ने बताया कि सूचना अधिकार के तहत जानकारी माँगी गयी थी लेकिन पूर्ण जानकारी नही दी गयी। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारो की अनदेखी अब सहन नही की जाएगी। यदि मांगे नही मानी गयी तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान मदन सिंह कठायत,गोपाल दत्त,बलवन्त सिंह नेगी,चन्द्रबल्लभ,केडी पांडे, विनोद मींज, चन्द्रेक बिष्ट,दिनेश लोहनी,हेमा देवी,मुन्नी पांडे, सरस्वती देवी व जानकी बिष्ट आदि मौजूद थे।

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