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‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत एक साजिश’

सुप्रीम कोर्ट के वकील और आल इंडिया लीगल एंड फोरम के प्रवक्ता ने उठाये कई सवाल
नहीं हुई थी बोस की प्लेन क्रैश में मौत, फ्रांस की एजेंसी का दावा
बोले, जनसंघ संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत भी रहस्यमय
लाल बहादुर शास्त्री की मौत भी संदिग्ध, सभी मामलों की हो हो न्यायिक जांच
हरिद्वार: जनसंघ के संस्थापक की रहस्यमय मौत हुई थी। उनकी मौत एक साजिश थी। 1948 तक सुभाष चंद बोस जिंदा रहे। आजाद हिंद फौज के पास उस वक्त 72 करोड़ की संपत्ति कहाँ है। इतना ही नहीं लाल बहादुर शास्त्री की मौत भी संदिग्ध थी। इसलिये इन सब की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित कर जांच होनी चाहिए। सुभाष चंद बोस की सूचीबद्ध फ़ाईलो को सार्वजनिक करने की जरूरत है।
यह सनसनीखेज जानकारी ऑल इंडिया लीगल एंड फोरम के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील जयदीप मुखर्जी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 1953 में कश्मीर की जेल में रहस्यमय मौत की न्यायिक जांच बहुत जरूरी है। कहा कि उनकी मौत एक साजिश लगती है। उन्होंने कहा कि इसकी जाँच होनी चाहिये। श्री मुखर्जी यही नहीं थमे, बोले कि लाल बहादुर शास्त्री की मौत 1966 में सोवियत संघ में ताशकंद समझौते के दौरान हुई। यह भी पूरी तरह संदिग्ध है। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की मौत का भी मसला उठाया। उन्होंने फ्रांस की एक एजेंसी का हवाला देते हुए कहा कि एजेंसी ने बोस के 1948 तक जीवित रहने की बात कही है। पूरी गहराई से तथ्यों की जांच हो। सरकार इस मामले में जापान और रूस की सरकार से और दस्तावेज मांगे और अब तक बोस को लेकर सूचीबद्ध की हुई चीजों को सार्वजनिक करे। अहम सवाल उठाया कि आजाद हिंद फौज के पास उस वक्त 72 करोड़ की संपत्ति थी, आज वह कहा है। इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
अवकाश घोषित करे सरकार
हरिद्वार: मुखर्जी ने सरकार से मांग की कि वह सुभाष जी की एक मूर्ति लाल किले के सामने स्थापित करे और 23 जनवरी को उनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा करे।

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