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हरिद्वार: डॉक्टर ने लूटा, भाई की मौत, बहन गंगा में कूदी

हरिद्वार। हरिद्वार में चिकित्सक और पुलिस की लापरवाही ने एक परिवार को जीवन भर का सदमा दे दिया। हरिद्वार के बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर ने लाखों लूटा और जब हालात बिगड़ी तो रेफर कर दिया। जहां युवक की मौत हो गयी। सितम यहीं नहीं थमा, शव को साथ लेकर लौट रहे परिजनों को एम्बुलेंस वाले ने जबरन हरिद्वार शहर के बाहर उतार दिया और पुलिस ने भी परिजनों को यू ही छोड़ दिया। दु:खी बहन ने गंगा में छलांग लगा दी।
यूपी के गाजियाबाद से हरिद्वार के निजी अस्पताल में इलाज कराने आए परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। पिछले एक माह में अपने दस साल के बेटे उवैश पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी जान गंवाने वाले इस परिवार की एक लड़की आयशा फारुख ने गंगा में छलांग लगाकर जान दे दी। बुधवार रात करीब बारह बजे जब परिवार बच्चे का शव लेकर गाजियाबाद लौट रहा था तो एंबुलेंस चालक ने पुल जटवाड़ा पर एंबुलेंस रोक दी और आगे जाने से इंकार करते हुए बच्चे और परिजनों को नीचे उतार दिया। इससे परिवार रोने लगा और अचानक 18 साल की लड़की ने गंगा में छलांग लगा दी। यही नहीं चंद कदम दूर ज्वालापुर थाने से पुलिस पहुंची, लेकिन एंबुलेंस चालक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्हें चलता कर दिया गया है। इस पूरे मामले में डॉक्टर की भी भूमिका शक के घेरे में हैं। जिसके अस्पताल में बच्चे का इलाज चल रहा था। पुलिस ने परिवार को चलता कर दिया था। इस घटना का पता मीडिया के सामने ना आ पाता अगर कुछ स्थानीय युवक वहां मौजूद न होते। पीडि़त के पिता फारुख निवासी प्रेम नगर गाजियाबाद ने बताया कि एक माह पहले बच्चे का इलाज कराने के लिए ज्वलापुर ईदगाह रोड डा. आसिफ के अस्पताल में आए थे। लाखों खर्च किये लेकिन, अचानक एक दिन पहले बच्चे को उसने दूसरे अस्पताल सीएमआई में शिफ्ट कर दिया जहां उसकी मौत हो गई थी। हम अपने बच्चे को एंबुलेंस में अस्पताल से गाजियाबाद लेकर जा रहे थे, लेकिन कोहरा ज्यादा होने के कारण एंबुलेंस चालक ने पुल जटवाड़ा पर जबरदस्ती उतार दिया। इस बीच आयशा ने नहर में छलांग लगा दी। हमने मदद के लिए काफी चीख पुकार की, लेकिन कोई भी मदद को नहीं आया। यही नहीं पुलिस को तहरीर भी देनी चाही, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज करने से मना कर दिया। मामले में पता चला है कि डॉक्टर खुद को बीएमएएस बताता है और गुर्दे का सफल इलाज का दावा करता है।

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