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हरिद्वार: सैलानियों की थमी आवाजाही, शिकारियों-तस्करों की जमीं निगाह

मानसून की बारिश के साथ शिकारी और तस्कर जंगल में घुसपैठ की करते हैं कोशिश

मानसून से पहले खानाबदोश होकर जंगल के आसपास डालते हैं डेरा, कुछ ग्रामीणों की मिलती है मदद

शिकारियों और तस्करों से वनों और वन्य जीवों को महफूज रखने को राजाजी प्रशासन ने बनाया फूल प्रूफ प्लान

मानसून की गश्ती दल पर निकलने वाली टीम को अचानक चेक करेंगे निदेशक और रेंजों के वार्डन

नवीन पाण्डेय, हरिद्वार: जंगल में सैलानियों की आवाजाही पन्द्रह की शाम से थम गई है। मानसूनी सिर पर खडा है। शिकारी और तस्कर भी जंगल के किनारों पर और गांवों में खानाबदोश की झोपडी डालकर वन्य जीवों पर काली निगाह लगाये हुये हैं। मानसून की बारिश के साथ ही शिकारियों और तस्करों की काफी हद तक जंगल में घुसपैठ की कोशिश होती है क्योंकि करीब छह महीने तक जंगल में सैलानियों की मूवमेेंट बंद हो जाती है। लेकिन अबकी बार मानसून गश्त के तौर तरीके में राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बदलाव करते हुए शिकारियों और तस्करों को चुनौती देने की तैयारी कर ली है। मानसून गश्त सरप्राइज गश्त के तौर पर होगी। जिसकी अचानक जांच निदेशक और वार्डन खुद करेंगे। मानसून की गश्त करने वाली टीम को भी पहले से यह खबर नहीं होगी कि उन्हें कहां जाना है। जाहिर है ये सभी जंगल को फूल प्रूफ बनाने और कोई सूचना लिक नहीं होने के मकसद से किया जाएगा।

15 जून की शाम से राजाजी टाइगर रिजर्व के रेंजों में सैलानियों की आवाजाही को नवंबर के दूसरे सप्ताह तक के लिये बंद कर दिया गया। मानसून की बारिश से बचने को बाघ, गुलदार, हाथी सहित अन्य जीव सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जंगल और आसपास के क्षेत्रों को अपना कुछ समय के लिए पनाहगाह बनाते हैं। शिकारियों और तस्करों को यह बात बखूबी पता होती है। लिहाजा वे भी शिकार और तस्करी की नियत से कुछ स्थानीय लोगों के साथ मिलकर वन्य जीवों का मूवमेंट जानकर जंगल में घुसपैठ की कोशिश में रहते हैं। ऐसे में कई बार वे सफल हो जाते हैं तो कई बार उन्हें चुनौती मिलती है और वे जंगल या पुलिस टीम के हत्थे चढ जाते हैं। मानसून गश्त की तैयारी हालांकि राजाजी टाइगर रिजर्व में कर ली गई है। अबकी फूल प्रूफ प्लानिंग निदेशक स्तर पर की गई है। जिसमें मानसून गश्त में लंबी और छोटी दूरी की गश्त तो होगी ही, दुर्गम और अति? दुर्गम इलाकों तक गश्ती टीम पहुंचेंगे ताकि वन्य जीव और वन संपदा महफूज रह सके। इसके लिए राजाजी के पालतू हाथियों का भी सहारा लिया जाएगा।

 

 

हथियारों से लैस होकर निकलेगी सभी गठित टीमें

हरिद्वार: मानसून गश्त के दौरान गश्ती दल अपने साथ सशस्त्र हथियार, खान-पान, दवाईयां, टार्च, रेन-कोट, वैनाकूलर, जीपीएस सहित अन्य जरूरी चीज लेकर मानसून की लंबी और छोटी गश्त पर निकलेंगे। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील चैकियों पर टीम ठहराव करेगी और यहां रहकर जंगल में होने वाले हर मूवमेंट पर नजर रखेगी। यह कवायद राजाजी के हर रेंज में होगी

 

 

रवासन यूनिट ने तो शुरू भी कर दी मानसून गश्त

हरिद्वार: राजाजी टाइगर रिजर्व महकमे की रवासन यूनिट की टीम ने मानसून की गश्त शुरू भी कर दी है। रेंज अधिकारी प्रमोद ध्यानी के नेतृत्व में पंद्रह सदस्यीय टीम ने रेंज के संवेदनशील एरिया की सघन पेट्रोलिंग की। दो दिनों तक इस टीम ने इस रेंज के लैंसडाउन वन प्रभाग से सटे सीमावर्ती एरिया के चप्पे-चप्पे पर नजर डाली। श्री ध्यानी ने बताया कि इस रेंज में बाघों की सुरक्षा सबसे प्रमुख मुदा है। बताया कि टीम ने लूनी, मीठवाली, गडकोट,भौरी से रवासन मुख्यालय तक पैदल गश्त कर सभी स्थानों का मुयायना किया।

 

 

राजाजी टाइगर रिजर्व में मानसून गश्त की शुरूआत हो चुकी है। टीमों का गठन भी हो चुका है। अबकी बार वे खुद और रेंजों से संबंधित वार्डन खुद सरपराइज चेक कर अपनी रिपोर्ट देंगे। टीमों को निदेशक और वार्डन स्तर पर अचानक गश्त के लिये भेजा जाएगा और इसकी जांच..पडताल की जाएगी। गश्ती पर निकली टीमों का लोकेशन भी लिया जाएगा। इस दौरान किसी तरह की आपात स्थिति आने पर तुरंत अधिकारियों से वायरलेस सहित अन्य माध्यमों से संपर्क कर हर चुनौती का मुंहतोड जवाब दिया जाएगा। वन्य जीव और वन संपदा को बचाने के लिए राजाजी के अफसर और कर्मी पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

-सनातन सोनकर, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व, देहरादून

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