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युवाओं में बढ़ रही ब्रेन स्ट्रोक की समस्या -सावधानी से ही बचाव संभव

हल्द्वानी। आजकल की प्रतिस्पर्धा के चलते इन्सान लगातार तनाव से ग्रसित होता जा रहा है जिसके कारण ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या मेें लगातार वृद्धि हो रही है, पहले जहां 60-70 साल के उम्र के बुजुर्गों में ब्रेन स्ट्रोक की समस्या देखने को मिलती थी, वहीं अब 20 से 35 वर्ष के युवा भी लगातार इस रोग से ग्रसित हो रहे हैं, इसकी वजह तेजी से बिगड़ती जीवनशैली है। हमने इस सम्बंध में कैलाश न्यूरो सेंटर पीली कोठी हल्द्वानी के वरिष्ठ न्यूरो फिजीशियन डॉ. लक्ष्मीकांत जोशी से बातचीत कर युवाओं में बढ़ती बे्रन स्ट्रोक की समस्या पर जानकारी हासिल की।
उन्होंने बताया कि युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कुल ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में लगभग 30 फीसदी तक युवा 40 साल से कम उम्र के हैं। इन युवा मरीजों में 80 फीसदी पुरुष हैं। डॉ. जोशी ने बताया कि इसका मुख्य कारण नशे की लत, तनाव भरी जिन्दगी, खराब जीवनशैली, बढ़ती पारिवारिक समस्यायें एवं जागरूकता का अभाव है। किसी भी समस्या के शुरुआती दौर में कुशल न्यूरो फिजीशियन से जांचें कराकर उपचार कराया जा सकता है ताकि होने वाली गम्भीर समस्या से बचा जा सके।

 

 

 

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:-हैमरेजिक स्ट्रोक-:

रक्त धमनियों में सिकुडऩ या क्लॉटिंग (नलियों में वसा का जमना) के कारण मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है जिसे इस्कमिक स्ट्रोक कहते हैं। लेकिन जब मस्तिष्क के भीतर धमनियां फट जाती हैं तो इसे हैमरेजिक स्ट्रोक या ब्रेन हैमरेज कहते हैं।

 

प्रमुख लक्षण-
-शरीर के आधे हिस्से में कमजोरी।
-आधे चेहरे, एक हाथ या पैर में
-सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना
-आवाज में तुतलाहट या बंद होना।
-चाल में लडखड़ाहट।
-हाथ-पैर का संतुलन बिगडऩा।
-बेहोशी आना।
-सिर में तेजदर्द के साथ उल्टी और
चक्कर आना।
-भ्रम की स्थिति होना
-आंख से धुंधला या डबल दिखना।
-निगलने में परेशानी।

 

 

जल्द उपचार से हो सकता है बचाव:-
उपरोक्त लक्षण 24 घंटे से अधिक समय तक बने रहें तो ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए जहां फौरन सीटी स्कैन और ब्लड टेस्ट की व्यवस्था हो। अगर किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण दिखते हैं और स्वत: ही (24 घंटे के अंदर) ठीक भी हो जाते हैं तो इसे ट्रांजियंट इस्कमिक स्ट्रोक कहते हैं। यह ब्रेन स्ट्रोक की चेतावनी है। ऐसे में तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

 

 

शुरू के 3 घंटे अति महत्वपूर्ण:-
ब्रेन स्ट्रोक में शुरू के 3 घंटे अहम होते हैं। इस दौरान मरीज को सही इलाज मिलने पर रिकवरी जल्दी होती है। इलाज में देरी से मरीज की जान जाने का भी खतरा रहता है। इसका इलाज मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।

 

 

सावधानी ही बचाव-
-हाई रिस्क फैक्टर को पहचानें और उससे बचें।
-अगर हार्ट, बीपी और शुगर के मरीज हैं तो इसे नियंत्रण में रखें व नियमित दवाइयां लें।
-शराब, तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
-वजन नियंत्रित रखें।
-एक्सरसाइज और योग करें।
-शरीर में पानी की कमी न होने दें।
-जंक फूड से परहेज करें।
-परेशानी होने पर कुशल न्यूरो चिकित्सक से ही सम्पर्क करें।

 

-वरिष्ठ न्यूरो फिजीशियन डॉ. लक्ष्मीकांंत जोशी एवं आनन्द बत्रा की बातचीत पर आधारित-

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