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फिल्म परिषद के कामों पर आमने सामने बैठकर करें बात : पांडे

बोर्ड के उपाध्यक्ष बोले- सीएम साहब कुमाऊं के शूटिंग स्थलों का भी कर देते जिक्र
हल्द्वानी। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के सभी गैर सरकारी सदस्यों को हटाने के सरकारी फैसले को लेकर परिषद के पूर्व सदस्य अब सरकार के सामने आ डटे हैं। हालांकि परिषद के उपाध्यक्ष व उत्तराखंड से जुड़े चर्चित कलाकार हेमंत पांडे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत द्वारा फिल्मों की शूटिंग पर कोई शूटिंग टैक्स न लेने की घोषणा करने पर उनका आभार जताते हैं लेकिन वे इस आरोप के खिलाफ खम गाड़ कर खड़े हो गए हैं, जिसमें कहा गया है कि परिषद ने दो साल तक सिर्फ बैठकें ही कीं कोई जमीनी कार्रवाई नहीं हुई।
फिल्मकार हेमंत पांडे ने मुंबई से दूरभाष पर बताया कि जो भी व्यक्ति उनके नेतृत्व वाली परिषद पर यह आरोप लगा रहा है वे उसके साथ आमने-सामने सवाल जवाब के लिए तैयार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि परिषद का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है और पिछले एक साल के अंतराल में सीएम त्रिवेंद्र रावत को परिषद की बैठक बुलाने की फुर्सत ही नहीं मिली। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई बताए कि बिना बजट के परिषद क्या जमीनी काम कर सकती थी।
हेमंत कहते हैं कि कल एक फिल्म की शूटिंग के शुभारंभ में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गढ़वाल के कुछ स्थानों के नाम लेकर फिल्मकारों को शूटिंग के लिए आमंत्रित किया लेकिन कुमाऊं के पटवा डांगर का नमा उन्होंने नहीं लिया। जबकि परिषद यहां फिल्म सिटी बनाने के काम को काफी आगे ले जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री से न सिर्फ हाथ जोड़कर विनती करते हैं कि वे गढ़वाल के साथ कुमाऊं के लिए भी फिल्मकारों को आमंत्रित करें। इसके लिए वे सीएम के पैर पकडऩे के लिए भी तैयार हैं।
इधर हल्द्वानी में परिषद के सदस्य विक्की योगी ने भी परिषद को आरोपों के साथ भंग किए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे कलाकारों में अच्छा संदेश नहीं गया। सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत एक बार भी उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद की मीटिंग मे नहीं आ पाये, ‘यूएफडीसी’  में रहते हुए 40 लाख रूपये शूटिंग शुल्क के तौर पर परिषद को मिले उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के पूर्व सदस्य व फिल्म निर्माता निर्देशक विक्की योगी ने कहा कि ‘केएमवीएन’ ,’जीएम वीएन’ के अतिथि गृह मे शूटिंग के यूनिट के लिए 50प्रतिशत छूट देने के आदेश जारी किया गया है फिल्म डिक्शनरी हेतू कलाकारों का चयन भी किया गया । शूटिंग के दौरान वन विभाग व अन्य विभागों से आ रही दिक्कतों का भी निराकरण किया । उत्तराखंड फिल्म स्टूडियो बनाने हेतु भूमि चयन करने हेतु उपाध्यक्षों, सदस्यों ने दौरे कर पटवाडागर नैनीताल को फाइनल कियागया फिल्म शूटिंग हेतु वन विन्डो सिस्टम लागू किया। क्षेत्रीय भाषाओं के फिल्मों को अनुदान 25 लाख से बडाकर 50 लाख करने का प्रस्ताव को परिषद की मुहर लगाई गयी। प्रदेश को उभरते निर्देशकों से 150 फिल्में बनवायी गयी। अब फिल्म फेस्टीवल में उत्तराखंड के फिल्म निर्माताओं को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मान दिया जाना था। जो मुख्यमंत्री के समय नहीं देने की वजह से फिल्म फेस्टीवल को रद्द किया गया। आर्थिक संकट होने के चलते वह योजना धरातल तक नही पहुंच पायी। मुख्यमंत्री ने यदि उपाध्यक्षों, सदस्यों से मिलकर बैठक मेंं कार्यों की समीक्षा कर यह बड़ा फैसला लिया होता तो ठीक था मुख्यमंत्री ने कहा कि परिषद ने काम नहीं किया जो हम सभी को सही नहीं लगा है। उत्तराखंड के निर्माता निर्देशक हम से आश लगाए बैठे है । उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद का राजनीतिकरण नही होना चाहिए।

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