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हाई कोर्ट : ट्रैक्टर ट्राली पंजीयन संबंधी मामले निस्तारित करने के आदेश

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी चंपावत को शारदा नदी में ट्रैक्टर ट्रालियों को पंजीयन संबंधी मामले में आदेश दिये हैं कि याचिकाकर्ताओं के प्रार्थना पत्रों को विधि अनुसार निस्तारित करें। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। मामले के अनुसार चंपावत निवासी पवन पांडे व सुरेन्द्र सिंह मेहर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि प्रभागीय लौगिंग वनाधिकारी द्वारा पारित आदेश 19 दिसम्बर 2017 जिसके द्वारा याचिकाकर्ताओं के ट्रैक्टर ट्रालियों का पंजीयन शारदा नदी में करने से इंकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं को कहना था कि उन्होंने शारदा नदी में खनन कार्य के लिये ट्रैक्टर ट्रालियां खरीदी हैं जिसको परिवहन विभाग द्वारा विधिवत वाणिज्य कार्य हेतु पंजीकृत किया गया है। किंतु शक्तिमान ट्रक एसोसियेशन के विरोध के चलते उनकी ट्रैक्टर ट्रालियों का पंजीयन नहीं किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं द्वारा लौगिंग अधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया गया था जिसे खारिज कर दिया गया जिसको उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने पूर्व में लौगिंग प्रबंधक खनन को आदेशित किया था कि याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदनों को एक सप्ताह में निस्तारित करें। किंतु इसका निस्तारण नहीं किया गया। मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने जिलाधिकारी चंपावत को आदेश दिये हैं कि याचिकाकर्ताओं के प्रत्यावेदनों को विधि अनुसार निस्तारित करें।

 

बीएचईएल कर्मचारियों की छुट्टी का मामला हाई कोर्ट पहुंचा
नैनीताल। भारत हैवी इलेक्ट्रिक्लस लिमिटेड (बीएचईएल) के कर्मचारियों की छुट्टी का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। बीएचईएल मजदूर यूनियन और अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपील की है कि उनका हाफ डे लीव यानी आधे दिन की छुट्टी को लेकर कंपनी से वर्ष 2016 में करार हुआ था जिसके तहत आधे दिन की छुट्टी लेने पर आधे दिन का वेतन देना तय हुआ था। लेकिन करार के बाद कंपनी ने इसे मानने से इंकार कर दिया। बीएचईएल प्रबंधन का कहना है कि भारत सरकार ने इस करार को मानने से इंकार कर दिया है लिहाजा मजदूरों को करार के मुताबिक छुट्टी नहीं दी जा सकती। पूरे मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति बीके बिष्ट की एकलपीठ ने भारत सरकार व बीएचईएल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।

 
हाई कोर्ट में 15 जनवरी से शीतावकाश
नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट में 15 जनवरी से शीतावकाश रहेगा। अवकाश के दौरान महत्वपूर्ण वादों की सुनवाई के लिये एकलपीठ बैठेगी। हाईकोर्ट 11 फरवरी को खुलेगा। इस दौरान महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिये एक कोर्ट नियमित बैठेगी। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

 
प्रधान अध्यापिका ग्वाल के तबादला आदेश पर रोक
नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्राथमिक विद्यालय ग्वाल गंगोलीहाट जनपद पिथौरागढ़ में कार्यरत प्रधान अध्यापिका पुष्पा कार्की के प्रशासनिक आधार पर किये गये जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक पिथौरागढ़ द्वारा पारित स्थानान्तरण आदेश तथा कार्य मुक्त आदेशों पर अग्रिम सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने विपक्षियों को शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ग्राम प्रधान ग्वाल द्वारा एक शिकायती पत्र याचिकाकर्ता के संबंध में स्थानीय विधायक मीना गंगोला को भेजा था। विधायक द्वारा डीएम पिथौरागढ़ को इस प्रकरण पर जांच करने के लिये कहा गया। जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक को जांच सौंपी गई। उपरोक्त प्रकरण पर जिला शिक्षा अधिकारी उप शिक्षा अधिकारी गंगोलीहाट को जांच अधिकारी नामित किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच अधिकारी द्वारा उसे सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया और बिना उसका पक्ष जाने जांच रिपोर्ट आगे भेज दी। जांच अधिकारी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया दोषपूर्ण है जिसे निरस्त किया जाना चाहिये। इस रिपोर्ट के आधार पर याचिकाकर्ता का स्थानान्तरण ग्वाल से जाड़ापानी कर दिया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने स्थानान्तरण आदेश अग्रिम सुनवाई तक रोक लगा दी।
शेरवुड व सेंट जोसफ के चेयरमैन की गिरफ्तारी पर रोक
नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बिशप आगरा ईसाई धर्म गुरु के अलावा सेंट जोंस कालेज आगरा क्राइस्ट चर्च कालेज आगरा, शेरवुड कालेज नैनीताल, सेंट जोसफ कालेज नैनीताल के चेयरमैन की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता प्रेम प्रकाश हाबिल ने याचिका दायर कर कहा था कि विजय कुमार राबिंसन स्पेबसर जो कि चर्च ऑफ इंडिया डाइसेस ऑफ लखनऊ बिशप ने 20 सितम्बर 2016 को हल्द्वानी थाने में विजय मंटोड, अजीत सुलेमान, कोनल स्विंग, दीपक कुमार, डी प्रसाद व इमेन्युअल मैसी के खिलाफ धारा 420, 419, 467, 469, 471 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज करा रखा है। उनका आरोप था कि इन्होंने गिरोह बनाकर फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार किये। इसी आधार पर उपनिबंधक चिटफंड हल्द्वानी में रजिस्ट्रेशन करा लिया और स्वयं इन शैक्षणिक संस्थानों का प्रबंधक मानकर इनकी संपत्ति को खुर्द-बुर्द किया जाने लगा। याचिकाकर्ता के अनुसार उसका नाम एफआईआर में नामजद नहीं हैं पुलिस द्वारा जबरदस्ती उसे झूठा फंसाया जा रहा है। मामले को सुनने के बाद एकलपीठ ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।

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