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आईजीएनएफए पहुंचे उपराष्ट्रपति, दीक्षांत समारोह में लिया भाग

आईएफएस अधिकारियों को किया सम्मानित
देहरादून। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू बुधवार को दून के संक्षिप्त दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के दीक्षांत समारोह में शिरकत कर आईएफएस अधिकारियों को सम्मानित किया। उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लेकर दून शहर तक पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी।
उपराष्ट्रपति सुबह करीब आठ बजे दिल्ली से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचें। इस दौरान राज्यपाल डा केके पॉल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत सहित मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और डीजीपी अनिल के रतूड़ी ने पुष्प भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद वह कार से राजभवन के लिए रवाना हुए। वह कुछ देर राजभवन में रुकने के बाद सडक़ मार्ग से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के दीक्षांत समारोह में भाग लेने पहुंचे। समारोह में नायडू आईएफएस अधिकारियों को सम्मानित किया। व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 2016-18 में कुल 53 अधिकारी पासआउट हुए। इनमें 51 भारत और 2 मित्र देशों के अधिकारी शामिल हैं। प्रशिक्षण पाठयक्रम के 18 अधिकारियों ने 75 फीसद से ज़्यादा अंक प्राप्त किए हैं। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल डा केके पॉल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व केंद्रीय मंत्री डा हर्षवर्धन भी मौजूद रहे।

वनों के संरक्षण में अच्छा काम करने वालों को मिले इन्सेंटिव : नायडू
देहरादून। दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि जो राज्य वनों के संरक्षण और संवद्र्धन में अच्छा काम कर रहे है उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्हें इन्सेंटिव दिया जाना चाहिए। वनों को बचाए रखने के लिए स्थानीय लोगों को, पंचायतों तथा स्थानीय निकायों को इन्सेंटिव दिया जाय, उनको ऑपरेशनल राइट्स दिए जाएं। इससे राज्यों को, लोगों को ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। अपने बच्चों और आने वाली पीढिय़ों के लिए हमें वनों को बचाना जरूरी है। प्रशिक्षु अधिकारियों को कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत करते हुए उप राष्ट्रपति नायडू ने कहा की वन संरक्षण सहित हर राष्ट्रीय कार्यक्रम को जनांदोलन का रूप देना जरूरी है। समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान पहले होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सतत वैज्ञानिक उपायों से एकीकृत ईको सिस्टम को बनाए रखना और उसको मजबूत बनाना जरूरी है। वनाधिकारियों को वनों में निवास करने वाले आदिवासी समुदायों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उप राष्ट्रपति ने भारतीय वन सेवा वर्ष 2016-18 बैच में प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया।
ग्रीन एकाउंटिंग की अवधारणा को अपनाना आवश्यक : राज्यपाल
देहरादून। राज्यपाल डॉ कृष्ण कांत पाल ने भारतीय वन सेवा के प्रोबेशनर अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि एक प्रोफेशनल व प्रशिक्षित फोरेस्टर बदलते पर्यावरण की समस्याओं को समझ सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि दून घाटी को भारतीय वानिकी का पालना कहा जा सकता है। चिपको आंदोलन जिसकी पर्यावरण संरक्षण के मॉडल के तौर पर पूरे विश्व में पहचान है, की शुरूआत हिमालय में हुई थी।
राज्यपाल ने कहा कि वन अधिकारियों को वन संरक्षण में गहन तकनीक व समाजार्थिक इनपुट का प्रयोग करना चाहिए। वन संरक्षण में अधिक शोध की भी आवश्यकता है। वन प्रबंधन की आयोजना में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है। बाढ़, सूखा, मृदा उर्वरता में कमी आदि प्राकृतिक आपदाओं के नियंत्रण में वनों की अहम भूमिका है। वन अधिकारियों को वैज्ञानिक ज्ञान के प्रयोग के साथ स्थानीय लोगों को तकनीकी तौर पर दक्ष करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
पर्यावरण को बचाते हुए, नई तकनीकों को बढ़ावा दें : सीएम
देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दीक्षांत समारोह में उपाधि पाने वालों को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन उनकी तपस्या, मेहनत और लगन के फल प्राप्ति का दिन है। यह दिन आईएफएस अधिकारियों को नई जिम्मदारियों से जोडऩे वाला दिन है। वनों का महत्व हमारे लिए दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड का 71 प्रतिशत भू भाग वन क्षेत्र है। उत्तराखंड चिपको आन्दोलन की भूमि है। मुख्यमंत्री ने दीक्षांत में पासआउट अधिकारियों से नई तकनीकी और शोध को बढ़ावा देने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि वन सम्पदा हमारे जीवन का आधार है। वनों और मानव जीवन की मूल आवश्यकता में सामंजस्य बनाना एक बड़ी चुनौती है। वनों का अधिक से अधिक लाभ भी हो और उन पर कोई संकट न आए, ये देखना हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए नयी तकनीकी और उपाय अपनाने पर बल दिया।
केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने वनाश्रित समुदायों को सशक्त बनाने तथा वनों से दीर्घकालीन लाभ प्राप्त करने, ग्रामीणों की आजीविका के स्रोत एवं जलवायु परिवर्तन को रोकने के एक साधन के रूप में वनों को संरक्षित किए जाने के प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ये युवा अधिकारी राष्ट्र की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

53 आईएफएस अधिकारियों को मिला डिप्लोमा
देहरादून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ शशि कुमार ने बताया कि वर्तमान 2016-18 व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में 5 उत्तर प्रदेश, 6 बिहार, 3 दिल्ली, 3 पंजाब, एक पश्चिम बंगला, 7 राजस्थान, एक मध्य प्रदेश, 6 तमिलनाडु, 2 झारखंड, 4 महाराष्ट्र, 3 कर्नाटक, 4 आन्ध्र प्रदेश, 2 हरियाणा, 4 तेलंगाना, 2 भूटान के विदेशी प्रशिक्षु अधिकारियों सहित कुल 53 आईएफएस परिवीक्षार्थियों को दीक्षांत समारोह में डिप्लोमा प्रदान किया गया है। इन अधिकारियों में से 18 ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करते हुए ऑनर्स डिप्लोमा प्राप्त किया है।

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