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35 किलो घी की गुफा में समाये जागेश्वर महादेव, एक माह के तप पर बैठे देवों के देव महादेव

जागेश्वर (अल्मोड़ा)। प्राचीन मान्यताओं व परंपराओं के अनुसार भगवान शिव ने मकर संक्रांति उत्तरायणी से एक माह गुफा रहकर कठिन तप किया था। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जागेश्वर धाम मंदिर के पुरोहित-पंडितों ने रविवार को हर वर्ष की भांति शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंग जागेश्वर धाम में करीब 35 किलो गाय के घी को पानी में उबालकर शुद्ध कर उसको गुफा रूप दिया व वैदपाठी ब्राह्मïणों के मंत्रोचारण कर घी से निर्मित गुफा में श्री ज्योतिर्लिंग जागेश्वर महादेव को सुबह करीब 11 बजे एक माह तपस्या के लिए एकांत वास में भेज दिया।

इस अवसर पर सवा करोड़ की आरती बत्ती से महाआरती का आयोजन हुआ। इस महापूजन में ढोल नगाड़ों के साथ ज्योर्तिलिंग जागेश्वर, माता पुष्टी देवी, महामृत्युंजय महादेव व केदारनाथ जी सहित 125 मंदिरो के भोग पूजन परिक्रमा में सवा करोड़ आरती बत्ती से महाआरती कर यह विशेष अनुष्ठान संमपन्न किया गया। हजारों वर्षों से इस धाम में इस अनूठी परंपरा के पूजन का विधान बना हुआ है। एक माह के बाद फालगुन संक्राती को ज्योर्तिलिंग जागेश्वर महादेव को गुफा से बाहर निकालकर गुफा स्वरूप घी का प्रसाद के रूप में शिवभक्तों को वितरित किया जायेगा। इस पवित्र घी से शरीर, त्वचा व दिमाग की कई जानलेवा बीमारियों से मुक्ति मिलती है। इस पूजन में पारंपरिक रूप से मंदिर समूह के मुख्य पुजारी पंडित हेमंत भट्ट ‘कैलाशÓ के अलावा पंडित रमेश चंद्र भट्ट, पंडित रघुनाथ भट्ट, पंडित लक्ष्मी दत्त भट्ट, पंडित कश्तुवानंद भट्ट, आचार्य गिरीश भट्ट, पंडित पितांबर भट्ट, पंडित दीपक भट्ट, पंडित कमल भट्ट, पंडित दयाकिशन भट्ट, आचार्य ललित भट्ट, कैलाश संगम, आनंद भट्ट, आचार्य हरीश भट्ट, आचार्य गोकुल भट्ट आदि के द्वारा पूजन संपन्न करवायी गयी।

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