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महाशिवरात्रि पर विशेष: जागेश्वर धाम में होगी चार पहर पूजा

कैलाश भट्ट, जागेश्वर (अल्मोड़ा)। महाशिवरात्र इस वर्ष 13 फरवरी फालगुन कृष्ण चतुदर्शी को मनायी जा रही है। 13 फरवरी को प्रदोश के साथ-साथ मध्य रात्री में चतुदर्शी भी है। रात्री 10.22 के बाद चतुदर्शी तिथी लगेगी, जो 14 फरवरी रात्री 12.17 तक रहेगी। धर्म शास्त्रों मे प्रदोष एवं अधंरात्री मे चतुदर्शी को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया है। जागेश्वर धाम में इस दिन चार पहर की पूजा की जाती है, चतुदर्शी को रात्रि 12 बजे ज्योर्तिलिंग जागेश्वर महादेव जी को महाभोग लगाया जाता है। जिसमे 11 वेदपाठी ब्रह्मणों, पंडितों के द्वारा भगवान भोलेनाथ के 1008 नामो से पूजन किया जाता है।

माना जाता है कि महाशिवरात्र से ही सृष्टी का आरंभ हुआ, इस महापर्व पर जागेश्वर धाम में प्राचीन काल से ही मनोकामना पूर्ण के लिए कुछ विशेष पूजन किये जाते रहे हैं। चर्तुदशी को भगवान शंकर व माता पार्वती का विवाह की शुभ रात्री है, इसलिए इसे शिवरात्री भी कहा जाता है। नि:संतान महिलायें जागेश्वर धाम में संतान प्राप्त के लिए साडिंका चावल से 1100 या 1500 शिवलिंग बनाकर पार्थिव पूजन करती हैं, वहीं रात्रि में हाथ में अखंड बत्ती लेकर पूरी रात भोलेनाथ के सम्मुख खड़ी होकर तपस्या करती हैं। उनके इस तप से प्रसन्न होकर जागेश्वर महादेव एक वर्ष के भीतर ही उन्हे संतान प्राप्ती या अन्य वरदान देते हंै। महाशिवरात्रि को भोलेनाथ प्रसन्न रहते हैं। भक्तों के द्वारा मांगी गयी सभी मनोकामना पूर्ण करते हैं। सनातन धर्म सबसे प्राचीन धर्म है। इस धर्म में भोलेनाथ का पूजन हजारों वर्षों से किया जाता रहा है। प्राचीन काल मे ऋषि-मुनियों व राजा-महाराजाओ के द्वारा मनोवांछित वरदान के लिए भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न किया जाता था। वही जगत में कल्याणकारी देव हैं

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