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रुद्रपुर:जनता परेशान, अफसर हुए ‘पहलवान’

रुद्रपुर। भले ही इन विकास कार्यों से किसी को सियासी फायदा मिले लेकिन हजारों नहीं लाखों लोगों को तो परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। शायद इससे नगर निगम के अफसरों को इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें शायद जनता की दिक्कतों से भी कोई वास्ता नहीं है तभी तो नगर निगम में स्वीकृत विकास कार्य आधे भी पूरे नहीं हुए। ये हालात तब हैं कि जब इनके वर्क ऑर्डर तक जारी हो गए हैं। ठेकेदार के लिए तय मियाद से काफी वक्त आगे निकल चुका है।
निवर्तमान मेयर सोनी कोली के कार्यकाल में शहर में खूब विकास कार्य हुए। खासकर राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद से काम तेजी से आगे बढ़े लेकिन इसके बाद भी सरकारी मशीनरी का ढीलापन या फिर कहें लापरवाह रवैया कम नहीं हुआ। मई में कोली का कार्यकाल पूरा हो गया। इससे पहले उन्होंने ताबड़तोड़ ढंग से विकास कार्यों को मंजूरी दी। सितंबर महीने में शहर के 129 विकास कार्यों को मंजूरी देकर उनकी टेंडर प्रक्रिया कराई। इसमें वे काम हैं जहां पर लोगों को सडक़ आदि न होने से बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कहीं कीचड़ में से होकर गुजरना पड़ता है तो कहीं पर हालात बद से बदतर हैं। इन निर्माण कार्यों से लोगों को राहत मिलेगी। इसी के आधार पर मंजूरी दी गई। लेकिन सरकारी मशीनरी का लापरवाह रवैया विकास कार्यों में बाधक बन गया। 11 सितंबर 2017 को 64, 12 सितंबर 2017 को 65 विकास कार्यों के टेंडर खोले गए थे। इनमें से तीन कार्यों को तो विभिन््न कार्यों से निरस्त कर दिया गया। बाकी कार्यों के लिए ठेकेदार नियुक्त हो गए। लापरवाह सरकारी मशीनरी ने इन तमाम कार्यों के अनुबंध करने में ही लंबा वक्त लगा दिया। पहला अनुबंध ही ढाई महीने बाद 28 नवंबर को हुआ। इसके बाद अंतिम अनुबंध 12 मार्च 2018 को हो सका। यानी छह महीने में अनुबंध पूरे किये जा सके। किसी ठेकेदार को एक तो किसी को चार महीने का वक्त काम पूरा करने को दिया लेकिन लापरवाही के चलते आधे निर्माण कार्य तो आज तक पूरे नहीं हो सके हैं। ये निर्माण कार्य कब पूरे होंगे, इसके बारे में कोई सही जानकारी नहीं दे रहा है। अफसर इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार पर और ठेकेदार निगम पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। अब तो जब नगर निगम में प्रशासक की तैनाती हो गई है। तब से अधिकारी और भी ज्यादा लापरवाह हो गए हैं।

 

 

53 स्थानों पर निगम के पास कोई बहाना नहीं
53 स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू न होने के लिए नगर निगम अफसरों के पास कोई बहाना नहीं है। एक मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो दो के लिए निर्धारित स्थान पर अतिक्रमण है। एक स्थान को विवादित बता दिया गया है। लापरवाही का आलम तो ये है कि एक निर्माण कार्य का इस्टीमेट ही कम बना दिया गया। जबकि आधा दर्जन से ज्यादा कामों के शुरू होने के पीछे निगम का तर्क है कि अभी यहां पर साइट का निरीक्षण नहीं हो सका है। जबकि दो निर्माण कार्यों के लिए तो साइट का निर्धारण करने में नगर निगम अफसर एकमत नहीं हैं।

 

…तो ब्लैक लिस्टेड क्यों नहीं किये जा रहे ठेकेदार
ठेकेदार यदि निर्माण कार्य को तय मियाद में पूरा नहीं करते हैं तो संबंधित ठेकेदार या कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी किया जाता है। यदि ठेकेदार समय मांगता है तो उसकी समयावधि को बढ़ाया जाता है लेकिन ये भी अधिकमत तीन बार किया जा सकता है। इसके बाद ठेकेदार या कार्यदायी संस्था को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार, इन कार्यों में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि जब काम शुरू ही नहीं हुए तो एक्सटेंशन का सवाल ही नहीं है। अब तो इन ठेकेदारों पर सीधे एक्शन होना चाहिए। यदि एक्शन हो तो दूसरे नंबर पर टेंडर डालने वाले ठेकेदार को काम मिले। लेकिन अधिकारी बस विकास कार्यों पर कुंडली मारकर बैठे हैं।

 

संबंधित क्षेत्रों के लोग भी परेशान
ये काम पूरे न होने से क्षेत्र के लोग परेशान हैं। कभी ये लोग पूर्व मेयर के घर पर पहुंच रहे हैं तो कभी निगम में। पूर्व मेयर भी अफसरों से बात करने का आश्वासन दे रही हैं। निगम अफसर तो अभी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। वे तो बस जनता को टालने वाले अंदाज में जवाब दे रहे हैं।
जिम्मेदारों की बात

 

 

हमने जनहित में इन विकास कार्यों को मंजूरी देकर टेंडर व अनुबंध प्रक्रिया पूरी कराई थी। अब अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते इन 129 में से 40 प्रतिशत काम भी पूरे नहीं हुए हैं। यदि ये काम जल्द पूरे नहीं हुए तो इस पूरे मामले को उच्चाधिकारियों के सामने रखा जाएगा।
– सोनी कोली, निवर्तमान मेयर

 

 

इसमें लापरवाही जैसी कोई बात नहीं है। निगम ने जब पूरी प्रक्रिया के बाद वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं तो ठेकेदार को काम तो पूरा करना ही है। अभी तक काम क्यों नहीं शुरू हुए हैं। इसको दिखवाया जा रहा है। यदि ठेकेदार काम नहीं करेगा तो उसे ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा।
– जयभारत सिंह, नगर आयुक्त

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