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कुमाऊं की वीरांगना ने रणक्षेत्र में छुड़ाये थे दुश्मनों के छक्के

किच्छा। धर्म जागरण समन्वय जिया रानी यात्रा का किच्छा पहुंचने पर गणमान्य लोगों ने स्वागत किया गया। खटीमा से प्रारम्भ हुई कुमाऊं की वीर महारानी जिया रानी की यात्रा का अम्बेडकर चौक पर स्वागत किया गया। इधर यात्रा के प्रान्त संयोजक अनिल खैरा ने बताया कि हरिद्वार के मायापुर क्षेत्र के राजा अमरदेव की पुत्री जिया रानी का बचपन का नाम मौला देवी था। उन्होंने बताया कि कुमाऊं व गढ़वाल में तुर्कों के हमलों के दौरान कुमांऊ के कत्यूरी राजा प्रीतमदेव ने हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की सहायता के लिये अपने भतीजे ब्रहमदेव को सेना के साथ भेजा, जिसके बाद राजा अमरदेव ने अपनी पुत्री मौला देवी उर्फ जिया रानी का विवाह कुमाऊं के कत्यूरी राजवंश के राजा प्रीतमदेव उर्फ पृथ्वीपाल से कर दिया। मौला देवी प्रीतमदेव की दूसरी पत्नी थी तथा विवाह के पश्चात मौला देवी ने मालूशाह व धामदेव नामक दो पुत्रों को जन्म दिया। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिलने के बाद उन्हें जिया रानी के नाम से जाना जाने लगा। पति प्रीतमदेव से अनबन होने के बाद मौला देवी अपने पुत्र के साथ गोलाघाट चली गयी और रानीबाग भवन का निर्माण कर वहां 12 वर्षों तक रहीं। इधर तैमूर ने भारत पर हमला किया और दिल्ली-मेरठ को रौंदता हुआ हरिद्वार पहुंचा। उस समय हरिद्वार में राजा वत्सराज देव को शत्रुसेना के सामने उन्हे हार का सामना करना पड़ा। राज परिवार को नकौट क्षेत्र में शरण लेनी पडी, जहां आज भी उनके वंशज निवास करते हैं। जिया रानी ने कुमाऊं के राजपूतों की एक सेना का गठन किया तथा दोनों की सेनाओं के बीच रानीबाग क्षेत्र में युद्व हुआ तथा तैमूर की सेना हार गयी। जीत के बाद जश्न मना रही जिया रानी की सेना पर तैमूर की सेना ने अचानक हमला कर दिया जिसमें जिया रानी की हार हुई। अपने सतीत्व की रक्षा को जिया रानी गुफा में चली गयी। जब प्रीतम देव को इस हमले की सूचना मिली तो उन्होने तैमूर सेना पर हमला कर सभी को मार भगाया और जिया रानी को अपने साथ ले आये। राजा प्रीतम देव की मौत के बाद मौला देवी ने अपने बेटे धामदेव को राज्य का सरंक्षक नियुक्त किया।
इस मौके पर यात्रा का स्वागत करने वालों में विधायक राजेश शुक्ला, भाजपा मंडल अध्यक्ष लवी सहगल, ओम प्रकाश दुआ, कुलदीप बग्गा, मूलचंद राठौर, धर्मराज जायसवाल, श्रीकान्त राठौर, नीरज बजाज, प्रीतम सिंह, संदीप अरोरा सोनू, आशीष तिवारी, गुड्डू राठौर आदि मौजूद थे।
मकर सक्रांन्ति को रानीबाग में लगता है मेला रानीबाग में जिया रानी की एक गुफा है जहां आज भी हजारों लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। कहा जाता है कि गुफा के निकट गौला नदी में रानी के नहाने के दौरान मुस्लिम सेना ने उन पर हमला कर दिया। रानी जिया शिव भक्त और सती महिला थी तथा उन्होंने अपने ईष्ट देव को याद कर खुद को अपने घाघरे में छिपा लिया और खोज के बाद भी किसी को रानी नहीं मिली। कहा जाता है कि वहां पर्वतीय घाघरे का आकार की शिला मौजूद है जिसमें रानी ने शिला का रुप धारण किया था। आज शिला को रानी जिया के रुप में आज भी पूजा जाता है । वीरांगना की याद में महारानी जिया रानी के बाग व उनकी शिला के दर्शन करने लोग पहुंचते हैं।

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