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ढ़ाणा के लिए खतरा बना है कफूल्टा नाला

बरसात के आते ही सहम जाते हैं क्षेत्र के ग्रामीण
1998 व 2013 में बरपा चुका है कहर
मुकेश रावत
थत्यूड़ (टिहरी)। विकासखंड़ थत्यूड़ के निकट स्थित ग्राम ढ़ाणा बस्ती के लिए कफूल्टा नाला अभी भी खतरा बना है। हर वर्ष बरसात की आहट से ही किसी अनहोनी के आशंका में बस्ती के लोग सहम जाते हैं। ग्रामीणों को बरसात में अपना घर छोडने को भी मजबूर होना पड़ रहा है। वर्ष 1998 और 2013 में कफूल्टा नाले तांडव से मची तबाही का भयावह मंजर आज भी ढा़णा के लोगों दिलों-दिमाग में बना है।
पिछले पांच-सात वर्षों के दौरा ढ़ाणा क्षेत्र का काफी विस्तार हो चुका है। इस क्षेत्र में लोगों ने बड़ी संख्या में अपने मकान बना लिए हैं। साथ ही ढ़ाणा बस्ती में प्राइवेट विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज थत्यूड तथा पीजी कॉलेज आदि कई शिक्षण संस्थाओं और विभागीय कार्यालयों के अलावा अन्य आवासीय भवन भी स्थापित हो चुके हैं। ऐसे में भवन निर्माण और जनसंख्या के लिहाज से भी ढ़ाणा बस्ती का अब काफी विस्तार हो चुका है। बावजूद इसके, कफूल्टा नाले का खतरा बस्ती के ऊपर जस का तस बना है।
बस्ती के ठीक उपर स्थित पहाडी भूभाग पिछले वर्ष में लगातार दरक रहा है और इस कारण पहाड़ी मलबा कफूल्टा नाले में जमा हो चुका है। जंगलात चौकी के किनारे वाली पहाडी पर दरारें पडी हुयी है और इस स्थिति में खतरा और बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष थत्यूड-कैम्पटी मोटर मार्ग का निर्माण उक्त नाले के ऊपरी भाग से किया गया। इस मोटर मार्ग के कटिंग का मलबा भी नाले में डाला गया है, जो कभी भी झील बनाकर बस्ती को नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों का डर है कि कभी भी कफूल्टा नाला हल्की सी बरसात में ही कहर बरपा सकता है।
भूगर्भ वैज्ञानिक प्रदीप कुमार निवासी ग्राम ढाणा, थत्यूड़ ने नाले की स्थिति और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की है। प्रदीप कुमार के अनुसार कफूल्टा नाले में मोटर मार्ग की कटिंग से डाला गया मलबा तथा टूटी पहाडी का मलबा नाले में जमा होने के कारण कभी भी बस्ती की बर्बादी का बड़ा कारण बन सकता है। क्योंकि उक्त नाले का ग्रेडियेन्ट अधिक तीव्र है जिसमें पानी अधिक तीव्रता से बहता है, और जहां उसे लूज मैटिरियल मिलता है उसी ओर कटाव करता है। उनका यह भी कहना है कि उक्त बस्ती पुराने मलबे के ढेर पर बसी है, जिसमें कभी हजारों वर्ष पहले का मलबा जमा है। क्षेत्र में कठोर चटटानों का अभाव है, जो बरसाती नाले के कटाव से रोकथाम कर सके। उनका कहना है कि बस्ती के बचाव के लिए बस्ती के ऊपरी भाग में कफूल्टा नाले को दोनों ओर से सुरक्षा दीवारों से चैनेलाइज करना होगा।
स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि ढ़ाणा बस्ती में जानमाल की सुरक्षा के लिए प्रशासन को कफूल्टा नाले तथा बस्ती को पुन: भूगर्भीय अध्ययन कराकर ठोस कदम उठाए। ग्रामीणों ने बताया कि नाले में अधिक मलबा जमा होने के कारण बरसात के दौरान कभी-कभी नाले का पानी मोटर मार्ग से ढाणा बाजार तक आ जाता है, जिससे बरसात में जन जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। उक्त नाला सीधे अगलाड़ नदी में समा जाता है और अधिक बाढ़ की स्थिति में अगलाड नदी के प्रवाह को भी अन्य भागों की ओर मोडता है। अब मानसून का सीजन कुछ ही दूर देख ग्रामीणों में एक बार फिर कफूल्टा नाले का डर फिर से गहराने लगा है।

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