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कैलास मानसरोवर यात्रा: तीसरा दल सेना के हैलीकाफ्टरों से पहुंचा गुंजी

तीसरे दल के 59 सदस्य 24 जून को करेंगे यात्रा मार्ग के नाभिगांव में होम स्टे

गुंजी में यात्रियों का अंतिम स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे आईटीबीपी के डाक्टर

चन्द्रेक बिष्ट, नैनीताल। सबसे लम्बी दूरी की धार्मिक कैलास मानसरोवर यात्रा का 59 यात्रियों के तीसरे जत्थे को शुक्रवार को सुबह को सेना के तीन एमआई-17 हैलीकाफ्टरों से गुंजी पहुंचाया गया। सुबह मौसम साफ होने के बाद सेना के हैलीकाफ्टरों चार उड़ाने भरी। पहले फेरे में 19, दूसरे फेरे में 13 व तीसरे फेरे में 19 शेष चैथे उड़ान में 18 यात्रियों को मय समान गुंजी पहुंचाया गया। सभी यात्री सुबह 11 बजे सुरक्षित गुंजी पहुंच गये है। इस दल में 47 पुरूष व 12 महिला यात्री शामिल है। इस दल का स्वास्थ्य परीक्षण आईटीबीपी के चिकित्सकों द्वारा 22 व 23 जून को किया जायेगा। 24 जून को यात्री नाभिगांव में होम स्टे कर 26 जून को लिपूलेख दर्रे से तिब्बत चला जायेगा। इससे पूर्व दो दल मानसरोवर की सकुशल यात्रा कर रहे गुंजी में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के चिकित्सकों द्वारा किया जायेगा। यहां परीक्षण में असफल यात्री को वापस भेज दिया जायेगा।

मालूम हो कि दो माह पूर्व बंद हुए नजंग-लखनपुर मार्ग को यात्रियों के गुजरने के लिए खोल दिया गया था। 14 जून को पहले जत्थे के 59 यात्री मार्ग खुलने के बाद नजंग को पार कर आगे निकल गया था। आयोजकों ने नजंग-लखनपुर में मार्ग बंद होने की स्थिति में सेना के हैलीकाफ्टरों की मदद लेने का विकल्प चुना है। बीते सोमवार को दूसरे दल के 57 यात्रियों को सकुशल गुंजी पहुंचाया गया। निगम सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को यात्रियों के दूसरे जत्थे के 59 यात्रियों को सेना के हैलीकाफ्टरों से पिथौरागढ़ से गुंजी के लिए भेज दिया गया है। 26 जून को यह दल लिपूपास दर्रे से होते हुए चीन शासित तिब्बत में प्रवेश कर जायेगा। इसके बाद तिब्बत के तकलाकोट से चीन की सुरक्षा में यात्री दल के लोग कैलास मानसरोवर की परिक्रमा शुरू कर देंगे। मालूम हो कि विदेश मंत्रालय ने कुमाऊं के लिपूलेख दर्रे के लिए 1080 यात्रियों को कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए भेजने के लिए चयन किया गया है। प्रथम दल के 59 यात्री व दूसरे दल के 57 यात्री व तीसरे दल में 59 लोग इस समय यात्रा कर रहे है। चैथे जत्थे के लोग दिल्ली पहुंच गये हैं। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले चैथे जत्थे के यात्रियों का दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट व आईटीबीपी अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। इस तरह लिपूलेख दर्रे से चार-चार दिन के अंतराल में 60-60 यात्रियों के कुल 18 दल यात्रा के लिए भेजे जायेंगे। इस बार कुल 18 यात्री दल यात्रा में भेजे जाने है। उन्होंने बताया कि निगम प्रशासन ने मार्ग बंद होने की स्थिति में विदेश मंत्रालय से सेना के हैलीकाफ्टरों की मांग की थी जो उपलब्ध किये गये है। नजंग-लखनपुर में मार्ग को खोलने के प्रयास भी किये जा रहे है। लेकिन इस मार्ग में लगातार भूस्खलन हो रहा है एहतियात के तौर पर यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए सेना के हैलीकाफ्टरों का उपयोग किया जा रहा है। अभी तक मौसम सामान्य होने पर हैलीकाफ्टरों के उड़ान में कोइ बाधा नही उत्पन्न हुई है। सेना के तीन एमआई-17 हैलीकाफ्टर पिथौरागढ़ में तैनात किये गये है। मानसरोवर परिक्रमा कर लौटने वाले दलों को वापस गुंजी से पिथैरागढ़ लाया जायेगा।

 

 

मानसरोवर यात्रा का 59 यात्रियों के तीसरे जत्थे को शुक्रवार को सुबह को सेना के तीन एमआई-17 हैलीकाफ्टरों से गुंजी पहुंचाया गया। सुबह मौसम साफ होने के बाद सेना के हैलीकाफ्टरों चार उड़ाने भरी। पहले फेरे में 19 व दूसरे फेरे में 13 व शेष दो उड़ानों में सभी 37 यात्रियों को मय समान सुरक्षित गुंजी पड़ाव पहुंचाया गया। सभी यात्री सुबह 11 बजे सुरक्षित गुंजी पहुंच गये है। इस दल में 47 पुरूष व 12 महिला यात्री शामिल है। इस बार यात्रियों को कैलास यात्रा मार्ग के नाभिगांव में होम स्टे करवाया जा रहा है। जहां कुमाऊनी व्यंजनों को परोसने के साथ ही यात्रियों को लोक संस्कृति से भी परिचित कराया जा रहा है। इसके बाद ही अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व गुंजी पड़ाव में भी कुमाऊंनी व्यंजनों को परोसा जा रहा है। अब तक तीनों दलों के लोग सुरक्षित यात्रा कर रहे है। चैथे दल के लोग दिल्ली पहुंच गये है। जंहा उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर यात्रा के लिए हरी झंडी दी जायेगी। -त्रिलोक सिंह मर्तोलिया महाप्रबंधक कुमंविनि नैनीताल।

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