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कैलास मानसरोवर : 12 जून से ही होगी यात्रा

आठ जून को यात्रा में जाने वाला पहले जत्थे का दिल्ली में होगा स्वास्थ्य परीक्षण

ऑनलाइन बुकिंग नौ मई तक रहेगी जारी

चन्द्रेक बिष्ट,नैनीताल। बीते वर्ष मानसरोवर यात्रा के दौरान मौसम खराबी के कारण जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई मध्य तक हुई परेशानी को देखते हुए कुमाऊं मंडल विकास निगम ने विदेश मंत्रालय को इस दौरान यात्रा रोकने का प्रस्ताव भेजा था उसे मंत्रालय ने उसे नामंजूर कर दिया है। अब पूर्व वर्षों की भांति इस बार भी 12 जून से ही यात्रा शुरू होगी। इस यात्रा की इन दिनों आन लाईन बुकिंग चल रही है। जो नौ मई तक चलेगी। हर वर्ष 12 जून से होने वाली सबसे लम्बी दूरी की धार्मिक कैलास मानसरोवर यात्रा की तैयारी दिल्ली व नैनीताल में तेज हो गई है। विदेश मंत्रालय ने कुमाऊं के लिपूलेख दर्रे के लिए 1080 व सिक्किम के नाथूला दर्रें से 400 यात्रियों को कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए भेजने के लिए चयन किया जायेगा। विदेश मत्रालय द्वारा जारी तय कार्यक्रम के अनुसार नौ जून से दिल्ली में होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 100 यात्रियों की टोली बनाई जायेगी। जो आठ जून को विभिन्न प्रदेशों से दिल्ली पहुंच जायेंगे। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले इन यात्रियों का दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट में नौ जून को स्वास्थ्य परीक्षण होगा। इसके बाद 10 जून को आईटीबीपी अस्पताल में सघन स्वास्थ्य परीक्षण किया जायेगा। इसके बाद यात्री बीजा, पासपोर्ट आदि की औपचारिकता पूरी कर 11 जून को दिल्ली से बसों द्वारा पहला जत्था काठगोदाम के लिए रवाना होगा। 12 जून को दल काठगोदाम से अल्मोड़ा के लिए रवाना होगा। रात्रि विश्राम अल्मोड़ा में ही करेगा। 13 जून को आगे की यात्रा के लिए रवाना होगा। पिथौरागढ़ गुंजी पड़ाव में यात्रियों का अंतिम स्वास्थ्य परीक्षण होगा। यहां असफल होने वाले यात्रियों को यात्रा में नही जाने दिया जायेगा। इस तरह लिपूलेख दर्रे से चार-चार दिन के अंतराल में 60-60 यात्रियों के 18 दल यात्रा के लिए भेजे जायेंगे। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद यात्रियों की संख्या का निर्धारण होगा। इस बार कुल 18 यात्री दल यात्रा में भेजे जाने है। मालूम हो कि विदेश मंत्रालय द्वारा कैलास मानसरोवर यात्रा वर्ष 1980 से लिपूपास दर्रे से करवाई जाती है इसका संचालन कुमांऊ मंडल विकास निगम करता है। धार्मिक महत्व की यह कठिन पैदल यात्रा मानी जाती है पिथौरागढ जनपद के नारायण आश्रम से यह यात्रा पैदल आरम्भ होती है यात्रा मार्ग में गब्र्यांग व गुुंजी में 20 किमी मोटर मार्ग भी है लेकिन वाहन नही होने से स्थानीय लोग व यात्री इसका लाभ नही उठा पाते है। निगम के महा प्रबंधक अशोक जोशी ने पिथौरागढ़ जिला प्रशासन, लोनिवि व आईटीबीपी के लोग यात्रा मार्ग को दुरस्त करने में जुटे है। नजंग में बीते वर्ष बंद मार्ग फिलहाल खोल दिया है।

 

 

नौ जून से दिल्ली में होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 100 यात्रियों की टोली बनाई जायेगी। जो आठ जून को दिल्ली पहुंच जायेंगे। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले इन यात्रियों का दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट में नौ जून को स्वास्थ्य परीक्षण होगा। इसके बाद 10 जून को आईटीबीपी अस्पताल में सघन स्वास्थ्य परीक्षण किया जायेगा। इसके बाद यात्री वीजा, पासपोर्ट आदि की औपचारिकता पूरी कर 11 जून को दिल्ली से बसों द्वारा पहला जत्था काठगोदाम के लिए रवाना होगा। 12 जून को दल काठगोदाम से अल्मोड़ा के लिए रवाना होगा। रात्रि विश्राम अल्मोड़ा में ही करेगा। 13 जून को ओ के लिए रवाना होगा। इस तरह लिपूलेख दर्रे से चार-चार दिन के अंतराल में 60-60 यात्रियों के 18 दल यात्रा के लिए भेजे जायेंगे। निगम ने विदेश मंत्रालय को भारी बरसात के दौरान यात्रा रोकने का प्रस्ताव भेजा था उसे मंत्रालय न नही माना। लिहाजा अब यात्रा पूर्व कार्यक्रम के तहत ही होगी। अशोक जोशी, महा प्रबन्धक कुमंविनि नैनीताल।

 

 

 
दोकलाम विवाद के चलते चीन ने खोला नाथूला दर्रा
नैनीताल। वर्ष 2017 में दोकलाम विवाद के चलते चीन ने सिक्किम से नाथूला दर्रे से होने वाली मान सरोवर यात्रा को रोक दिया था। इस बार दोकलम विवाद को किनारे करते हुए चीन ने यात्रा की मंजूरी दे दी है। इस मार्ग से इस बार 400 यात्री 40-40 की संख्या में 10 जत्थों में कैलास मानसरोवर की यात्रा करेंगे। मालूम हो कि वर्ष 2017 में चीन ने मौसम खराब होने का हवाला देते हुए दो जत्थों को वापस कर दिया था। इन जत्थों में 81 यात्री शामिल थे। इसके बाद भारत व चीन के बीच दोकलम पर भी कूटनीतिक तनातनी चरम पर पहुंच गई थी। लेकिन इस वर्ष नाथूला से यात्रा के लिए चीन ने सहमति दे दी है। इस दर्रे से यात्रा में 21 दिन लगते हैं। यहां अधिकांश यात्रा वाहनों से तय की जाती है। लिपूलेख दर्रे से यात्रा करने में 24 दिन लगते है। अधिकांश यात्रा पैदल होती है। इस यात्रा में 18 से 70 वर्ष तक के लोग शामिल होते है।

 

 

 

हाई कोर्ट ने लगाई बारात घर निर्माण पर रोक
नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने किच्छा के दोपहरिया गांव में शिव मन्दिर की भूमि पर ग्राम प्रधान द्वारा बारात घर के निर्माण के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धनिक की खण्डपीठ ने निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। मामले के अनुसार चोखे लाल निवासी दोपहरिया किच्छा ऊधम सिंह नगर ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि ग्राम सभा में शिव मंदिर है जिसका खसरा नम्बर 408, 406 और रकबा 2360 है। मन्दिर की चारदिवारी पूर्व में विधायक द्वारा बनाई गयी थी और खाली भूमि पर पेड़ लगाने के लिए सुरक्षित रखी गयी थी। परन्तु ग्राम प्रधान द्वारा इस भूमि पर बारात घर का निर्माण किया जा रहा है जिसका विरोध ग्रामवासियों द्वारा किया गया उनका कहना है कि बारात घर के निर्माण करने से मन्दिर परिसर का माहौल खराब हो जायेगा। जिसकी शिकायत ग्रामवासियों ने 28 जनवरी 2019 को जिला अधिकारी से की गयी। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद बारातघर के निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए सरकार से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।

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