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कालाढूंगी: सीएचसी को ही इलाज की जरूरत , महिला चिकित्सक और फिजीशियन तक नहीं

महमूद हसन बंजारा/शाकिर हुसैन , कालाढूंगी। क्षेत्र का एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार है या यूं कहिये कि सिर्फ कागजों में ही इसका उच्चीकरण कर जनता को गुमराह किया जा रहा है। जिस कारण यहां आने वाले मरीज भी अब मजबूरन प्राइवेट चिकित्सकों की और रुख करने लगे हैं। सरकार व यहां के जन प्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बेकद्री हो रही है। यहां एक फिजीशियन की अति आवश्यकता है ताकि मरीजों को कुछ लाभ मिल सके। इसको घोर उपेक्षा ही कहा जा सकता है कि एक वर्ष पूर्व महिला चिकित्सक का तबादला तो दस माह पूर्व हड्डी रोग चिकित्सक का तबादला हुआ लेकिन इनके स्थान पर आज तक किसी को नहीं भेजा गया। देखा जाए तो अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से उच्चीकरण करते हुए 16 अगस्त 2006 को स्वास्थ्य मंत्री रहे तिलकराज बेहड़ ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में इसका शिलान्यास किया तथा उसके बाद 3 दिसंबर 2011 को मुख्य्मंत्री रहते बीसी खंडूरी ने इसका लोकार्पण भी कर दिया और 28 मार्च 2015 को मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे संयुक्त चिकित्सालय बनाने की घोषणा कर दी। लेकिन मानक अनुसार जो सुविधाएं इस अस्पताल को मिलनी थी आज तक नहीं मिल सकीं। महिला चिकित्सक न होने के कारण डिलीवरी का मामला आने पर राम भरोसे ही छोड़ दिया जाता है। अगर बच्चा हो गया तो ठीक वर्ना जान को जोखिम में डालकर हल्द्वानी दौडऩा पड़ता है। इसके अलावा सबसे अधिक परेशानियों का सामना उस समय करना पड़ता है जब कोई सड़क दुर्घटना का मामला अस्पताल आ जाए यहां नैनीताल मार्ग होने पर अधिकांश दिन भयंकर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं ऐसे में अस्पताल में संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को तड़पना पड़ता है। एक 108 वाहन के अलावा यहां एक एंबुलेंस की भी अति आवश्यकता है। यहां एक्सरे मशीन तो है एक्सरे भी होते हैं मगर हड्डी रोग चिकित्सक नहीं होने से एक्सरे कराने से कोई लाभ नहीं मिल पाता प्लास्टर सुविधा तक नहीं है वहीं देखा जाए तो इस समय यहां 6 चिकित्सक हैं परंतु उपकरण के अभाव में मरीजों को परेशानियों से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा आज तक यहां आईसीयू तथा अल्ट्रा साउंड की व्यवस्था तक नहीं होना सरकारी दावों की पोल खोल रहा है। इतना ही नहीं यहां बच्चों के डॉक्टर भी नहीं हैं। नेत्र चिकित्सक न होने से दृष्टि मितिज्ञ के सहारे आंखों का इलाज हो रहा है।
यह भी सत्य है कि अस्पताल में हमेशा ही दवाओं की कमी रहती है या रखी जाती है। अधिकांश लोगों की शिकायत रहती है कि उन्हें बाजार की महंगी दवाएं लिखी जाती हैं जो गरीब परिवार के लोग नहीं ले पाते हैं। रात्रि को किसी मरीज के आने पर उसे इलाज मिलने की भी कोई गारंटी नहीं है।

 
सरकार को भेजा है प्रस्ताव।
कालाढूंगी। प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि कालाढूंगी अस्पताल की सुविधा बढ़ाने व चिकित्सकों की मांग को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। वह अभी नए आए हैं और यह शासन स्तर का मामला है स्थिति से शासन को अवगत कराया जाएगा। दवाइयां क्यों कम हैं किस तरह की जांचें लिखी जाती हंै इसको वह स्वयं देखेंगे।
महिला चिकित्सक के 2 वर्षों से पड़े रिक्त पद के चलते गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा। छोटी-छोटी समस्या के लिए भी हल्द्वानी, बाजपुर, रामनगर जाना पड़ रहा है या मजबूर होकर पुरुष चिकित्सक को ही दिखाना पड़ रहा है। कई बार स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा ज्ञापन व धरना देकर मांग की जा चुकी है मगर जनता की सम्सय्या का अभी तक हल नहीं किया जा सका है।

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