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कलियर: दरगाह साबिर-ए-पाक के कथित सेवादारों को प्रबंधतंत्र का झटका

श्रद्धालुओं के लिये बनने वाले लंगर की नयी व्यवस्था शुरू
अब घरों में नहीं, लंगर खाने में आम श्रद्धालुओं के साथ बैठकर खाना होगा
कलियर। दरगाह साबिर-ए-पाक के व्यवस्थापकों ने यहां श्रद्धालुओं के लिये बनाये जाने वाले लंगर (भण्डारा) की नयी व्यवस्था लागू कर दी है। अब यहां से तैयार होकर घरों में पहुुंचने वाला खाना नहीं जायेगा। लंगर जायरीन अथवा गरीब, बेसहारा लोगों के लिये तैयार होता है। जिस पर यहां दरगाह की सेवा व दबंग किस्म के लोग भी कुंडली मारे बैठे थे। सैकड़ों लोगों के उस भोजन को डकार जाते थे जो बेसहारा, मजलूमों के लिये तैयार होता है। नयी व्यवस्था से ऐसे लोगों को दरगाह प्रबंधन तंत्र ने जोर का झटका धीरे से दिया है।
गौरतलब है कि दरगाह साबिर-ए-पाक में सैकड़ों साल से यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिये खाना तैयार होता है। लंगरखाने में तैयार होने वाले खाने को आम लोगों में तकसीम किया जाता है। कुछ समय पूर्व यहां दरगाह पर पहुंचे एक परिवार ने दरगाह की सेवा शुरू की। धीरे-धीरे इस परिवार के कईं रिश्तेदार यहां पहुंचे गये। मानों एक पूरा गांव उनका यहां बस गया। दरगाह के दर्जनों मकानों पर इस समय इन लोगों का कब्जा है। दरगाह साबिर-ए-पाक की सैकड़ों बीघा भूमि को इन्होंने सेवा के नाम पर अपने नाम अभिलेखों में दर्ज करा लिया। यहीं से विवाद शुरू हो गया और इनकी नीयत पर भी सवाल खड़े होने लगे। इस समय ये लोग यहां दरगाह का खाना खाते हैं। बिजली, पानी व रहने की व्यवस्था दरगाह से उठा रहे हैं और दरगाह की करोड़ों रुपये की भूमि के मालिकाना हक को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं। दरगाह प्रबंधन तंत्र की माने तो करीब एक कुंतल आटे की रोटी इन सहित कईं दबंग परिवारों के अलावा पत्रकारों तक के घरों में पहुंच रही थी। अब इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। उनकी माने तो लंगरखाने में खाना तकसीम होने से पहले टोकन की व्यवस्था कर दी गयी है। जो व्यक्ति यहां लंगर खाना चाहता है वह किसी धर्म, जाति अथवा धनाड़ा हो तो भी आम लोगों की तरह खाना खा सकता है। उसके लिये कोई बाध्यता नहीं है। आम लोग जहां इसकी सराहना कर रहे हैं, वहीं सेवा के नाम पर दरगाह की सम्पत्ति के साथ लूट-खसौट करने वाले लोगों के लिये इसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

सैकड़ों ने चखा एक साथ बैठकर लंगर
कलियर। सोमवार से दरगाह पर पहुंचे जायरीन व आम लोगों को नयी व्यवस्था के तहत लंगरखाने में व्यवस्थित तरीके से खाना परोसा गया। लंगरखाने में एक साथ करीब 700 लोगों ने खाना खाया। घरों में खाना ना पहुंचने के चलते काफी खाना बच गया। मंगलवार को लंगरखाने में बैठकर बनाये गये खाने के हिसाब से ही खाना तैयार किया जायेगा। राज्य वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अब्दुल अलीम अंसारी दरगाह साबिर-ए-पाक के लंगरखाने में पहुंचे। यहां उन्होंने आज से लागू हुई व्यवस्था के मुताबिक आम जायरीन को एक साथ बैठाकर खाना खिलवाया। इस मौके पर दरगाह प्रबंधक हाजी शमशाद अंसारी, नायब तहसीलदार प्रीतम सिंह, सुपरवाइजर सैयद इंतखाब आलम, राव शारिक, राव सिकंदर, हारुन अली, अफजाल, दरगाह विशेष खादिम, साबरी मस्जिद के मोअज्जिम अब्दुल सलाम ने अपने हाथों से जायरीन को खाना परोसा। वक्फ बोर्ड सीईओ ने बताया कि इस व्यवस्था से आम लोगों को खाना मिल सकेगा। घरों में पहुंचकर बर्बाद हो रहे खाने को बचाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से अब तक हो रहे खर्च में काफी कमी आने की संभावना है।

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