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उमा देवी मंदिर, कर्णप्रयाग: भव्य, आलोकिक और पौराणिक मंदिर

कर्णप्रयाग । उत्तराखण्ड के इन अलोकिक पौराणिक एवं भव्य  मंदिरों में से एक मंदिर है, माँ उमा देवी का मंदिर, जो साक्षात माँ दुर्गा  (पार्वती) का स्वरूप हैं इनको ब्रह्मचारिणी के नाम से भी पुकारा जाता है, जिनकी पूजा नवरात्रों के दौरान द्वितीय दिवस में की जाती है! माँ उमा देवी का यह पौराणिक मंदिर उत्तराखण्ड मे च़मोली जिले के कर्णप्रयाग नामक स्थान पर स्थापित है, कर्णप्रयाग को पंच प्रयागों मे से एक प्रयाग माना जाता है।
इस पौराणिक मंदिर की स्थापना 8वीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी, परन्तु कुछ लोगों के अनुसार माँ उमा देवी की मूर्ति इसके बहुत पहले ही स्थापित थी। कहा जाता है कि संक्रसेरा के एक खेत में माँ उमा देवी का जन्म हुआ। एक डिमरी ब्रह्मण को देवी ने स्वप्न में दर्शन देकर अलकनंदा एवं पिंडर नदियों के संगम पर उनकी प्रतिमा स्थापित करने का आदेश दिया। यहां के डिमरियों को उमा देवी के मायके वाले माने  जाते है, जबकि कापरिपट्टी के शिव मंदिर को उनका ससुराल समझा जाता है। हर कुछ वर्षों बाद देवी 6 महीने की यात्रा पर जोशीमठ तक गांवों के दौरे पर निकलती है। देवी जब इस क्षेत्र से गुजरती है तो प्रत्येक गांव के भक्तों द्वारा पूजा, मिष्ठान तथा जाग्गरों का आयोजन किया जाता है, जहां से देवी की डोली  गुजरती है हर तरफ गाँव वालों का जमावडा़ माँ के दर्शन की एक झलक के लिए लग जाता है, और  जब वह अपने मंदिर लौटती है तो एक भगवती पूजा कर उन्हें मंदिर में पुनर्स्थापित कर दिया जाता है।

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