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बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार कटारमल सूर्य मंदिर

पर्यटकों, श्रद्धालुओं के लिए कोई सुविधा नहीं
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर स्थित सूर्य मंदिर कटारमल शासन-प्रशासन व संबंधित विभाग की उदासीनता के चलते बदहाल बना हुआ है। पर्यटकों व श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां किसी किस्म की व्यवस्था नहीं है।
उल्लेखनीय है कि अल्मोड़ा से कटारमल 15 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां स्थित मंदिर को कटारमल सूर्य मंदिर कहा जाता है। इसका निर्माण एक ऊंचे वर्गाकार चबूतरे पर है, जो भारतवर्ष में सूर्यदेव को समर्पित प्राचीन और प्रमुख मंदिरों में से एक है। आज भी मंदिर के ऊंचे खंडित शिखर को देखकर इसकी विशालता व वैभव का अनुमान स्पष्ट होता है। मुख्य मंदिर के आस-पास 45 छोटे-बड़े मंदिरों का समूह भी बेजोड़ है। कटारमल सूर्य मंदिर का निर्माण मध्ययुगीन कत्यूरी राजवंश के शासक कटारमल के द्वारा छठी से नवीं शताब्दी में किया जाना ऐसा प्रतीत होता है। देश का यह प्रमुख सूर्य मंदिर सड़क, स्कूल, हास्पिटल, पानी व अन्य जरूरी सुविधायें न होने से दुर्दशा की मार झेल रहा है। मंदिर में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा कर्मचारी रखे गये हंै, जो मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं का प्रसाद चढ़ाते हैं। मंदिरों में कोई पारंपरिक तरीके से पुजारी की नियुक्ति भी नहीं है और न ही कोई दानपेटी, साधु संतों के लिये अखाड़ा, धर्मशाला आदि किसी तरह की कोई सुविधा है। वर्तमान में मंदिर की छत पूरी तरह टूटी हुई है। प्राचीन मंदिरों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेने वाले पुरातत्व विभाग को शायद क्षतिग्रस्त छत नजर नहीं आ पाती। सरकार द्वारा ऐसे प्राचीन धरोहर के संरक्षण व विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, तभी उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

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