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पापा कहते थे वर्दी में दिखो तो एफआईआर कर लिया : कविता

खिलंदड़ स्वभाव, भाषा में पुलिसिया रौब और दिल से एक दम मासूम यह है सब टीवी के चर्चित हास्य धारावाहिक एफआईआर की लीड करेक्टर चंद्रमुखी चौटाला यानि कविता कौशिक का अंदाज। वे अपनी बात को कहने का जो चुटीला और मनोरंजक अंदाज अपनाती हैं वह वाकई में उनके चरित्र को रेखांकित करता है। एफआईआर धारावाहिक के लगातार नौ साल में 1400 एपीसोड सफलता पूर्वक खींचने का रिकार्ड बना चुका था। हालांकि अब यह धारावाहिक नहीं आता लेकिन चंद्रमुखी चौटाला लोगों के दिल  आज भी छाई हुई हैं।  राजस्थानी पिता व बंगाली मां की इकलौती संतान कविता अपने मुंहबोले भाई व सपा नेता शोएब अहमद के घर हल्द्वानी पहुंची । कविता उत्तरांचल दीप के  विशेष कार्यक्रम में  पहुंचने का वक्त रात साढ़े दस बजे निकाल सकीं। उन्होंने इस भेंटवार्ता में कई विषयों पर बातचीत की। तेजपाल नेगी से उनकी बातचीत के प्रमुख अंश-

# ये खिलंदड़ स्वभाव कहां से आया?
– दरअसल स्कूल, कालेज सब जगह में हर तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थी, अमूमन लड़कियों में पाई जाने वाली झेंप वहां से मिट गई।
# एक्टिंग में कैसे आना हुआ?
– दिल्ली में पढाई के दौरान सहेली के साथ समोसे खाने के लिए दुकान पर गई, पता चला किसी सीरियल के लिए आडिशन होने हैं। मैं भी पहुंच गई…नंबर आया नहीं मैं किनारे खड़ी लड़कियों से हंसी मजाक कर रही थी…तभी एक सज्जन ने बुलाया…दो चार लाइनें दीं और कैमरे के सामने बोलने के लिए कहा…मैं यह काम करके लौट गई, दो तीन बाद बाला जी प्रोडक्शन हाउस से फोन आया कि मिलना है। मैं पहुंची तो कांट्रेक्ट लेटर थमा दिया गया…इस तरह से कुटुंब सीरियल में मेरी एंट्री हुई।
# फिर एफआईआर में एंट्री कैसे हुई?
– यह भी ऐसी ही कहानी है। इस सीरियल के  लिए पहले उर्वी जोशी को साइन किया गया था। किसी ने डायरेक्टर को सलाह दी कि एक बार कविता को भी देख लो…मुझे बुलाया गया पुलिस की वर्दी दी गई कुछ डायलॉग बोलने के लिए दिए गए…बस अगले ही दिन मुझे चंद्रमुखी चौटाला के रूप में चुन लिया गया। पहले यह धारावाहिक मराठी बेस्ड बन रहा था, मैंने सलाह दी कि हरियाणावी भाषा का इनपुट डालें इसमें…कुछ एपीसोड के बाद इसमें यह परिवर्तन भी किया गया…नतीजा आपके सामने हैं… नौ साल चला धारावाहिक…
# एफआईआर करते समय टाइप्ड हो जाने का खतरा नहीं लगा?
– बिल्कुल था…लेकिन पापा बचपन से कहा करते थे…बड़े होकर पुलिस में भर्ती होना…खुद भी पुलिस में थे न…स्क्रिप्ट देखकर मुझे लगा अब पापा को बोलूंगी…टीवी खोलिए…मैं वर्दी में दिख रही हूं…टाइप्ड न हा जाऊं इसके लिए इस धारावाहिक में मैंने अलग भेष धरे..
#उत्तराखंड से लगाव कैसे हुआ?
– मैंने काशीपुर और नैनीताल में पढ़ाई की थी, शोएब मेरे भाई हैं…हमने शादी भी त्रियुुगी नारायण मंदिर में की। बहुत खूबसूरत
दिखता है उत्तराखंड…
# एफआईआर के बीच में आपकी बेटी आ गई थी…फिर आप आ टपकीं…क्या था मामला?
– देखिए …सफलता के शिखर पर जा कर इंसान का दिमाग घूम ही जाता है…ऐसा ही हुआ…मुझे तोता-मैंना में भेजा गया…लेकिन दो महीने बाद फिर वापसी करनी पड़ी एफआईआर में…
# अपने आने वाले प्रोजेक्टस के बारे में कुछ बताएं?
– कई हैं…लेकिन अगले महीने पंजाबी फिल्म आ रही है…जिसमें लीड रोल है…फिल्म का नाम है ‘वेख बारातां छलियांÓ। आप भी देखिये…ट्रेलर आ गया है। और हां इस फिल्म में लड़की टाइप रोल में ही हूं….हा…हा…हा…
# एक्टे्रस न होती तो क्या होतीं?
– मैं कैमरा पर्सन बनना चाहती थी…लेकिन किस्मत में एक्ट्रेस बनना लिखा था…बाकी आप लोगों का आशीर्वाद है।

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