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खुलासा: सावधान हो जाइये डेंगू का दोस्त बन गया है प्रदूषित जल

गुरूकुल कांगड़ी विवि की शोधार्थिनी ने किया प्रदूषित जल पर बड़ा शोध
प्रदूषित जल मानव जीवन से मानव जीवन संकट में, हुआ बड़ा खुलासा
प्रदूषित जल में फिनोल की मात्रा अधिक मिली, जिससे मंडरा रहा संकट

नवीन पाण्डेय, हरिद्वार। यदि आपके आपस प्रदूषित जल है या फिर आप किन्हीं कारणों से इसे पीने को मजबूर हैं तो सावधान हो जाईये। ये प्रदूषित जल छोटी-मोटी नहीं बल्कि जानलेवा बीमारियों को आपके शरीर में पहुंचाकर आपको बीमार और कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। डेंगू जैसे खतरनाक बीमारी ने प्रदूषित जल का साथ पकड़ लिया है और जहां भी ये जल है वहां पर डेंगू अपना तांडव दिखा रहा है और लोगों की जान ले रहा है। इसके अलावा कई गंभीर बीमारियां मानव जीवन को लगातार संकट में डाल रहा है।
यह बात हम नहीं बल्कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर रणधीर सिंह के निर्देशन और युवा वैज्ञानिक डा. सुहास के सह-निर्देशन में अलका हरित ने हैरान करने वाले शोध कार्य में खुलासा के दौरान किया। विश्वविद्यालय की शोधार्थिनी अलका हरित ने जल प्रदूषण की विषमता को लेकर अपने शोध कार्य में कई बड़े खुलासे किए हैं शोध के दौरान यह बात सामने आई है कि लगातार औद्योगिक ईकाइयों का प्रसार होने से जल प्रदूषित होता जा रहा है। फैक्ट्रियों से निकलने वाले विभिन्न प्रकार के रसायनिक पदार्थ नदी, नाले, तालाब एवं समुद्र के जल में मिलकर जल को प्रदूषित कर रहे हैं। जो फैक्ट्रियों से रासायनिक पदार्थ निकलते हैे उन रसायनिक पदार्थों से मानव जीवन एवं जीव जन्तुओं के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

 
प्रदूषित जल कई गंभीर बीमारियों को दे रहा है दावत
हरिद्वार। शोध में खुलासा हुआ है कि जिन-जिन स्थानों पर यह प्रदूषित पानी पीया जा रहा है, वहां पर विभिन्न प्रकार की बीमारियों जैसे हैजा, टाईफाइड, उल्टी, पीलिया और डेंगू जैसी भयंकर बीमारियां फैल सकती है।

 
शोधार्थिनी ने ऐसे किया शोध फिर आया परिणाम सामने
हरिद्वार। शोधार्थिनी अलका हरित ने अपने शोध विश्लेषण में यह बताया कि रसायनिक पदार्थ, फिनोल एवं डाइस को जल से अधिशोषण प्रक्रिया से निकाला गया। शोध में यह भी खुलासा हुआ कि लिंगनिन को अधिक तापमान में जलाकर उसका कार्बन बनाया। लिंगनिन पेपर एवं पल्स फैक्ट्रियों से निकला अनावश्यक पदार्थ होता है। इस पदार्थ को उपयोग में लाकर कार्बन बनाया गया, जिससे विभिन्न प्रकार के फिनोलस एवं डाइस को जल से निकाला गया और अच्छे परिणाम देखने को मिले। शोधार्थिनी अलका ने बताया कि लिंगनिन से बना कार्बन रासायनिक पदार्थ (फिनोलस एवं डाइस) को जल से निकालने के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है। शोध टेस्टिंग में लिंगनिन कार्बन जल की अशुद्धता से जुड़कर जल से इन्हें बाहर निकालता है, जिसके परिणाम विभिन्न प्रकार की मात्रा में अलग-अलग प्राप्त हुए हैं। जल के शोधन से यह ज्ञात हुआ है कि जल में फिनोल की मात्रा से ज्यादा क्लोरोग्रुप थे। प्रदूषित जल में फिनोल की मात्रा अधिक थी, जिसका प्रभाव मानव जीवन के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक हो सकती है।

 
कुलपति से लेकर विभागाध्यक्ष ने की शोध की सराहना
हरिद्वार। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सुरेन्द्र कुमार ने शोध पर कहा कि जल प्रदूषण पर रसायन विभाग ने बेहतरीन कार्य किया है। रसायन विभाग अपने शोध विश्लेषणों में अच्छे-अच्छे शोध कार्य कर रहा है, जिसका तुलनात्मक अध्ययन अन्य विश्वविद्यालयों से बहुत अच्छा है। रसायन विज्ञान में प्रो. आरडी कौशिक और उनके सहयोगी मानवीय संवेदनाओं पर बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि जल प्रदूषण को लेकर जन्तु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, वनस्पति एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग भी काम कर रहे हैं, मगर जल से लिंगनिन को जलाकर कार्बन बनाना तथा जल का शोधन करके विषैले तत्वों को जल से अलग करना यह बहुत बड़ा काम है। रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. आरडी कौशिक ने बताया कि विभाग में उच्च कोटि के शोध कार्य हो रहे हैं। रसायन विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुहास ने बताया कि शोध के विश्लेषण में प्रदूषित जल को मानव के स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक बताया गया है। जल के सम्पर्क में आने के बाद कई बैक्टिरिया मानव के जीवन पर सीधा असर डालते हैं। इसीलिए जल शुद्ध पीना चाहिए और प्रदूषित जल को सेवन करने से बचना चाहिए।

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