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कैलास मानसरोवर यात्रा: निगम का सात लोगों का रेकी दल वापस लौटा

यात्रा पड़ावों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने व वाहनों की व्यवस्थाओं के लिए टैंडर आज

लिपूलेख दर्रे के लिए कुल 2105 आवेदनों की छंटनी के बाद 1080 यात्रियों का होगा चयन

चन्द्रेक बिष्ट,नैनीताल। हर वर्ष 12 जून से होने वाली सबसे लम्बी दूरी की धार्मिक कैलास मानसरोवर यात्रा की तैयारी दिल्ली व नैनीताल में तेज हो गई है। विदेश मंत्रालय दिल्ली में कुल प्राप्त 2332 यात्रियों में से कुमाऊं के लिपूलेख दर्रे के लिए 1080 व सिक्किम के नाथूला दर्रें से 1118 में से 500 यात्रियों को कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए भेजने के लिए लाटरी पद्धति से चयन करेगा। नौ जून से दिल्ली में होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 100 यात्रियों की टोली बनाई जायेगी। यात्रा के सफल संचालन व व्यवस्थाओं को दुरस्त करने के लिए कुमाऊ मंडल विकास निगम का एक सात सदस्यीय रेकी दल यात्रा मार्ग के पड़ावों का निरीक्षण कर वापस लौट आया है। इसके अलावा पिथौरागढ़ से भी यात्रा पड़ाव व अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी अधिकारियों के दल ने यात्रा मार्ग मार्ग का निरीक्षण कर लिया है। नैनीताल मुख्यालय से निगम के तकनीकी कर्मचारियों के अलावा दल में निर्माण विंग के दो अभियंता भी शामिल थे। जबकि पिथौरागढ़ से प्रशासन के अधिकारियों के अलावा विभागीय अभियंता शामिल रहे। निगम के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस रेकी दल में इंजीनियरों के अलावा तकनीकी कर्मचारी भी शामिल थेे। रेकी दल की संस्तुति के अनुसार इस बार यात्रा पड़ावों में यात्रियों को अधिक सुविधा देने के लिए कार्रवाई की जा रही है। पड़ावों में मरम्मत व विद्युतिकरण के निर्देश दिये गये हैं। रेकी दल के अनुसार इस बार नजंग-लखनपुर मार्ग बीआरओ द्वारा खोल दिया गया है। इसके अलावा 20 मई को यात्रा पड़ावों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने व वाहनों की व्यवस्थाओं के लिए टैंडर किये जा रहे हैं। कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए लिपूलेख दर्रे से यात्रा करने के लिए दिल्ली में 1080 यात्रियों का चयन होगा। मालूम हो कि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित व निगम द्वारा संचालित यह यात्रा आगामी 12 जून से शुरू होनी हैं कुमाऊं से 1080 यात्री मानसरोवर के लिए भेजे जायेंगे।

 

 

कैलास मानसरोवर यात्रा पूर्व मार्ग व पड़ावों की व्यवस्थाओं को देखने के लिए भेजा गया पांच सदस्यीय रैकी दल वापस आ गया है। पड़ावों में जो भी सुविधाएं देनी होंगी वह 12 जून से पूर्व दे दी जायेगी। नैनीताल मुख्यालय से निगम के तकनीकि कर्मचारियों के अलावा दल में निर्माण विंग के दो अभियंता भी शामिल थे। जबकि पिथौरागढ़ से प्रशासन के अधिकारियों के अलावा विभागीय अभियंता शामिल रहे। रैकी दल की संस्तुति के अनुसार इस बार यात्रा पड़ावों में यात्रियों को अधिक सुविधा देने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा 20 मई को यात्रा पड़ावों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने व वाहनों की व्यवस्थाओं के लिए टैंडर किये जा रहे हैं। इसके लिए चुनाव आयोग से पूर्व में स्वीकृतिल े ली गई थी। स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 100 यात्रियों की टोली बनाई जायेगी। इनमें से 60 लोगों का चयन किया जायेगा। 18 दलों में 1080 यात्री भेजे जायेंगे।
अशोक जोशी, महाप्रबंधक कुमंविनि नैनीताल।

 

 
बीते वर्ष मौसम खराब कई बार आया व्यवधान
नैनीताल। विदेश मंत्रालय द्वारा कैलास मानसरोवर यात्रा वर्ष 1980 से लिपूपास दर्रे से करवाई जाती है इसका संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम करता है। धार्मिक महत्व की यह कठिन पैदल यात्रा मानी जाती है। पिथौरागढ़ जनपद के नारायण आश्रम से यह यात्रा पैदल आरम्भ होती है, यात्रा मार्ग में गब्र्यांग व गुुंजी में 20 किमी मोटर मार्ग भी है लेकिन वाहन नहीं होने से स्थानीय लोग व यात्री इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। बीते वर्ष धारचूला के लखनपुर व नजंग में भूस्खलन होने के कारण सभी यात्रियों को सेना के हेलीकाप्टरों से पिथौरागढ़ से गुंजी ले जाया गया। कैलास मानसरोवर की परिक्रमा करने के बाद उन्हें गुंजी से पिथौरागढ़ लाया गया। इस दौरान मौसम खराब होने के कारण यात्रा में कई बार व्यवधान भी उत्पन्न हुआ। इस बार निगम द्वारा नजंग-लखनपुर से ही पैदल यात्रा करने के प्रयास किये जा रहे हैं। यदि इस क्षेत्र में भूस्खलन से मार्ग फिर बंद हुआ तो विकल्प में सेना के हेलीकाप्टरों से यात्रा कराई जायेगी।

 

 
नाभिढांग गांव में होम स्टे की होगी व्यवस्था
नैनीताल। मानसरोवर व आदि कैलास यात्रा में शामिल लोगों को इस बार अतिरिक्त पड़ाव नाभिढांग में होम स्टे कराया जायेगा। ग्रामीणों के घरों में यात्रियों को विश्राम कराने के लिए पूर्ण सुविधा दी जायेगी। इससे यात्री सुविधा प्राप्त कर सकेंगे वहीं ग्रामीणों को अतिरिक्त आय भी होगी। यात्री गुंजी पहुंचकर पहले दिन गुंजी पड़ाव में रहेंगे। दूसरे दिन वह तीन किमी दूर नाभिढांग में होम स्टे के लिए पहुंचेंगे। नाभिढांग आदि कैलास मार्ग में पडऩे वाला दुर्गम गांव है। यहां यात्री आदि कैलास पर्वत के दर्शन भी करेंगे। पार्वती सरोवर में स्नान का मौका भी होगा। इसके अलावा यात्री स्थानीय व्यंजनों के साथ ही वहां की लोक संस्कृति से भी रूबरू होंगे। मालूम हो कि नाभिढांग के तीन गांव भोटिया जनजाति के गांव हैं जहां यात्री उनके घरों में रुककर लोक संस्कृति व स्थानीय व्यजनों का आनंद उठाते हैं। रात्रि विश्राम के बाद यात्री दूसरे दिन वापस गुंजी पहुंचेंगे जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण होगा। उसके बाद सफल यात्री भारत में यात्रा के आखिरी पड़ाव कालापानी को रवाना होंगे। रात्रि विश्राम के बाद दूसरे दिन यात्री बर्फ से ढके अति दुर्गम लिपूलेख दर्रे से चीन शासित तिब्बत के तकलाकोट मंडी में प्रवेश करेंगे। वहां से कैलास मानसरोवर की यात्रा शुरू हो जायेगी।

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