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हल्द्वानी में नहीं मिला उपचार, बच्चे को लेकर वापस लौटेे धारचूला

-ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मासूम को पैसे के अभाव में नहीं मिल पाया उपचार
-एक साल के बच्चे को परिजन वापस ले गये धारचूला
-गरीबी से जूझ रहे परिवार की कहानी,
हल्द्वानी। चिकित्सा सेवा के अभाव में दिमाग की बीमारी से जूझ रहा एक साल का बच्चा बिना उपचार कराये ही लौट गया। धारचूला से उपचार के लिए यहां लाये गये गरीब परिवार से जुड़े एक साल के बच्चे को सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार नहीं मिल पाया। यह मामला कुमाऊं के प्रवेश द्वार की चिकित्सा सेवाओं की पोल भी खोल रहा है। धारचूला के ग्राम हाट निवासी रूपम मेहनत-मजदूरी कर परिवार पालता है। उसके एक साल के बेटे आर्यन को ब्रेन ट्यूमर है। उसे पहले पिथौरागढ़ के बीडी पांडे अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां तैनात नर्स ने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई तो उसे सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया। यहां न्यूरो सर्जन न होने का हवाला देकर उसे भर्ती नहीं किया गया। गरीबी से जूझ रहा परिवार आर्यन का इलाज निजी अस्पताल में कराने में असमर्थ है। इसी बीच समाजसेवी गुरविंदर सिंह चड्ढा को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने आर्यन को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। इस अस्पताल प्रबंधन ने भी मानवता के नाते पीडि़त परिवार की मदद की। तब तक रूपम की जमा पूंजी एंबुलेंस आदि के खर्च में खत्म हो गई। हालांकि आर्यन का उपचार यहां निजी अस्पताल में संभव नहीं हुआ। इस पर चड्ढा ने आर्यन को दिल्ली ले जाने के लिए एंबुलेंस का प्रबंध करने के साथ ही रूपम को नगद धनराशि भी मुहैया कराई लेकिन उपचार में अधिक खर्च होने से परिवार डर गया और आर्यन को बिना उपचार के वापस धारचूला ले गया।

 

 
राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को भी मामले से अवगत कराया
हल्द्वानी। समाजसेवी गुरविंदर सिंह चड्ढा ने बताया कि उन्होंने व गुंजन अरोरा ने आर्यन को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। चड्ढा ने बताया कि आर्यन को दिल्ली रेफर करने के बावत उनकी सांसद अजय भट्ट से भी वार्ता हुई। उन्होंने एम्स में उपचार कराने का भरोसा दिलाया। इस पर दिल्ली जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की गई लेकिन गरीबी से जूझ रहा परिवार आर्यन को दिल्ली ले जाने के लिए राजी नहीं हुआ। बाद में दुखी मन से परिवार वाले आर्यन को लेकर धारचूला लौट गये। चड्ढा ने बताया कि आर्यन की एक आंख की रोशनी भी चली गयी है। उन्होंने कहा कि अगर अभी भी उपचार मिल जाये तो एक साल के नन्हे आर्यन को बचाया जा सकता है। चड्ढा के अनुसार उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यसभा सांसद को ट्विट कर मामले से अवगत कराया है।

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