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हल्द्वानी : खुशियों के कर्मी दु:खों की सवारी पर सवार!

हल्द्वानी। स्वास्थ्य सेवाओं की धमनियां कहे जाने वाले 108 तथा खुशियों की सवारी के कर्मचारियों पर रोजगार का संकट आ खड़ा हो गया है। पुरानी कंपनी के पास से टेंडर जाने तथा नई कंपनी के पास टेंडर आने के कारण इसमें काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी खतरे में आ गयी है।
108 व खुशियों की सवारी के कर्मचारी विगत 10 वर्षों से कार्यरत हैं। समस्त इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन तथा पायलट उत्तराखंड राज्य में विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में रहकर लगातार जीवनदायिनी सेवा में कार्य कर रहे थे लेकिन आज सरकार की नीतियों ने इन कर्मचारियों को उनके ही राज्य में बेरोजगारी के कगार में पहुंचा दिया है।
108 व खुशियों की सवारी के कर्मचारियों को 31 मार्च 2019 से सेवा समाप्ति का नोटिस प्राप्त हो गया है जिससें ये समस्त कर्मचारी अप्रैल माह में परिवार सहित गांव को छोड़ कर अन्य राज्यों में नौकरी के संपर्क में लगे हैं। ये कर्मचारी बाल संरक्षण आयोग को भी अपने परिवार के पलायन व बच्चों के पालन पोषण की सूचना पूर्व में भी दे चुके हैं। कर्मचारी संगठन के नेता दीप ने बताया कि 108 व खुशियों की सवारी के लगभग 800 कर्मचारी अन्य राज्यों में नौकरी हेतु आवेदन देने में लगे हैं। यहां पर 10 सालों से नौकरी करने के बाद भी भविष्य खतरे में आ गया है। कहा कि सरकार ने इन कर्मचारियों को नई कंपनी कैम्प में समायोजित न कर आज 800 से अधिक परिवारों को पलायन करने को मजबूर कर दिया है। 108 व खुशियों की सवारी फील्ड कर्मचारी संघ के दिवाकर भट्ट, विक्रम महर, अमित रतूड़ी, लक्ष्मी प्रसाद व्यास, जगमोहन राणा का कहना है कि कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ है।

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