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संयुक्त चिकित्सालय रामनगर।

लाइलाज बीमारियों की जद में है संयुक्त चिकित्सालय रामनगर

-प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज पहुंचते हैं इलाज को
-चिकित्सकों व सुविधाओं के अभाव में प्राइवेट चिकित्सालयों की हो रही पौ बारह
रामनगर। कुमांऊ व गढ़वाल के प्रवेश द्वारा पर स्थित रामनगर का एक मात्र स्व. रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय खुद बीमार पड़ा हुआ है। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ व चिकित्सा सुविधा हर घर तक पहुंचाने की घोषणा पूरी तरह हवाई सावित हो रही है। चिकित्सालय में संसाधनों व चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को प्राइवेट चिकित्सालयो की शरण लेने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है।
रामनगर चिकित्सालय की वर्तमान स्थित को देखते हुये लगता है कि चिकित्सालय में मरीजों के उपचार की गई बल्कि चिकित्सालयों को खुद अपना उपचार कराने की जरूरत है। हर रोज इस चिकित्सालय में रामनगर के अलावा विभिन्न पर्वतीय इलाको व उत्तराखंड से सटे उत्तरप्रदेश के कई ईलाको के मरीज भारी संख्या में यहा उपचार कराने के लिये आते है। हर रोज चिकित्सालय में 500 से 600 मरीजों का पंजीकरण किया जाता है लेकिन चिकित्सालय सुविधा पर्याप्त मात्रा में न मिलने के कारण मरीजो को बिना उपचार के ही वापस लौटने के साथ निजि चिकित्सालयो में महंगे दामो पर उपचार कराने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। एक तरफ सरकार हर घर तक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात कहती है तो वहीं रामनगर का चिकित्सालय कई संसाधाना की कमी व चिकित्सको की कमी जैसी बीमारी से जुझ रहा है।
रामनगर में वर्षों पहले ब्लॅड बैंक की स्थापना की गई थी लेकिन आज तक यह ब्लॅड बैंक शुरू नही हो पाया है तथा कई मरीज ब्लॅड की कमी के कारण भी मौत का शिकार हो चुके है। चिकित्सालय में सर्जन, बेहोशी चिकित्सक व एक अतिरिक्त महिला चिकित्सक की कमी के कारण मरीजो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में चिकित्सालय में सर्जन ना होने के चलते मरीजो को काफी दिक्कते उठानी पड़ रही है तथा चिकित्सालय में वर्तमान में तैनात एक महिला चिकित्सक डा अर्चना कौशिक के अवकाश पर जाने के बाद गर्भवती महिलाओ को भी परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है।
चिकित्सालय के प्रभारी सीएमएस डॉ0 टीके पंत ने बताया कि चिकित्सालय में पर्याप्त मात्रा में दवाई उपलब्ध है लेकिन चिकित्सको व अन्य स्टॉफ की कमी के चलते यह परेशानी हो रही है। उन्होने बताया कि इस सम्बंध में उनके द्वारा उच्चाधिकारियो को अवगत करा दिया गया है तथा चिकित्सालय में रेडियोलोजिस्ट डा जेके झां के अवकाश पर जाने के बाद प्रभारी सीएमएस भी रेडियोलोजिस्ट है लेकिन सीएमएस का अतिरिक्त कार्यभार मिलने के बाद वह भी अल्ट्रासांउड नही कर पा रहे है जिससे मरीजो को परेशानी उठानी पड़ रही हैं तथा अल्ट्रासाउंड ना होने की स्थिति में खासतौर पर गर्भवती महिलाओ को परेशानी उठानी पड़ रही है। रामनगर जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सालय में सुविधायें उपलब्ध न होकर मरीजों को सिर्फ रेफर किया जा रहा है। इसके पीछे स्थानीय जन प्रतिनिधियों की खामोशी भी उनकी कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर रही है। जन प्रतिनिधि भी चिकित्सा सुविधा बहाल करने की बात कहकर पिछले लम्बे समय से जनता को ठगने का काम कर रहे हैं। जनता ने स्पष्ट तौर पर ऐलान किया है कि अब इसका जबाव आने वाले 2019 में लोक सभा के चुनाव में दिया जायेगा।

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