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चीनी मिल को हो रहा प्रति कुंतल 2 हजार से अधिक का नुकसान

चीनी मिल में विक्रय मूल्य से अधिक है उत्पादन लागत

डोईवाला/ब्यूरो। डोईवाला चीनी मिल में चीनी के विक्रय मूल्य से अधिक उत्पादन की लागत आ रही है। जिससे चीनी मिल को करोड़ों का घाटा हो रहा है।

भाजपा मंडल महामंत्री और नगर सभासद विजय बक्शी ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के गन्ना सर्मथन मूल्य में असमानता होने और पुरानी चीनी नीति में बदलाव न होने के कारण चीनी मिल की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। पेराई सत्र 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने का सर्मथन मूल्य 255 रूपये प्रति कुंतल और राज्य सरकार ने 316 और 326 प्रति कुंतल सर्मथन मूल्य तय किया था। चीनी मिल में चीनी की उत्पादन लागत 4500 रूपये से लेकर 5000 रूपये प्रति कुंतल के बीच आ रही है। जबकि चीनी मिल को चीनी विक्रय से कुल 2600 रूपये प्रति कुंतल मिल रहे हैं।

ऐसे में चीनी मिल को 1900 रूपये से लेकर 2400 रूपये प्रति कुंतल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिस कारण मिल करोड़ों के घाटे में चली गई है। और यही कारण है कि चीनी मिल कर्मचारियों का वेतन, एरियर, चिकित्सा प्रतिपूर्ति समय पर नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में बक्शी ने कहा कि जब गन्ना सर्मथन मूल्य सरकार तय करती है तो मिल के नुकसान की भरपाई भी सरकार को करनी चाहिए। उनकी मांग है कि चीनी मिल के लिए ठोस नीति बनाई जाए। और चीनी मिल को 15 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी जाए।

 

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