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ऐतिहासिक रहा है पालिका का पांच साल का कार्यकाल: पालिकाध्यक्ष

पालिकाध्यक्ष की प्रेस वार्ता, 5 साल की उपलब्धियां गिनाई

अल्मोड़ा। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि पालिका बोर्ड का विगत पांच साल का अत्यंत उल्लेखनीय कार्यकाल रहा है। कई बड़े कर्ज चुकाये गये हैं, मलिन बस्तियों के अधूरे मकानों का निर्माण पूरा हुआ है, वर्षों पुराने अतिक्रमण हटे हैं तथा कई नये पार्किंग स्थलों का निर्माण हुआ है।
यहां पालिका सभागार में मीडिया से मुखाबित पालिकाध्यक्ष ने कहा कि जब उन्होंने पालिकाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया था तब बोर्ड पर 14 करोड़ का कर्ज व तमाम देनदारियां थीं, लेकिन तमाम कर्मचारियों, सभासदों आदि के सहयोग से काफी हद तक कर्ज चुका लिया गया है। अब हर कर्मचारी को हर माह के प्रथम सप्ताह में तनख्वाह मिल जा रही है। पालिकाध्यक्ष ने तमाम विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि 5.80 करोड़ ब्याज सहित हुडको का चुका लिया गया है। एचएसजीबी के अधूरे मकान, मलिन बस्तियों के जिनको तोड़ दिया गया था उनमें से 40 मकानों का काम पूरा हो चुका है तथा बेघर लोग अब वहां रह रहे हैं। पालिका ने पूर्व सीएम हरीश रावत के कार्यकाल में मिले 70 लाख से एलईडी की खरीद करी थी। जिससे आज पूरा शहर एलईडी से जगमगा रहा है। रैन बसेरा का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने को है, बारात घर, वॉटर एटीमी, नई पार्किंगों पर काम चल रहा है। बोर्ड ने 5 नये वाहन खरीदे हैं, जो कूड़ा निस्तारण व अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उपयोग में आ रहे हैं। लिंक रोड में वर्शों पुराने अतिक्रमण को खाली कर दिया गया है। यहां सड़क कटिंग के बाद चैढ़ीकर का काम लोनिवि कर रहा है। यहां पार्किंग बनाने का प्रस्ताव भी है। लक्ष्मेश्वर में जिला योजना से 10 लाख के बजट से पार्किंग का निर्माण किया जायेगा। ट्रक स्टैंड का भी प्रस्ताव भेजा गया है। लोनिवि के माध्यम से डीआरपी बनायी जायेगी। उन्होंने बताया कि आयुक्त की सहमति से ब्राइट एंड कार्नर का नाम बदलकर विवेकानंद कार्नर रख दिया गया है, ताकि यहां स्वामी विवेकानंद से जुड़ी स्मृतियों को जीवित रखा जा सके। यहां स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के निर्माण व पार्क के लिए 40 लाख की डिमांड की गई है। जिसमें से 20 लाख जिला योजना व 10 लाख शासन से मिला है। शहीदों की स्मृति में लक्ष्मेश्वर में पार्क का निर्माण किया गया है। यहां महात्मा गांधी ने वर्श 1931 में सभा की थी। 20 लाख रूपया शासन से इसके लिए प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सर्वाधिक कुत्तों की नसबंदी का काम केवल अल्मोड़ा में हुआ है। जल्द ही बंदरों की भी नसबंदी की जायेगी। जिला योजना से कई मार्गों पर सड़क निर्माण कार्य किया गया है। विश्वनाथ घाट में टिन शैड, प्रवेश द्वारों आदि का भी निर्माण किया गया है। हर वार्ड में सोलर लाइटें लगाई गई हैं। स्वतंत्रा संग्राम सेनानी दुर्गा सिंह रावत व हरगोविंद पंत की प्रतिमा भी शहर में लगाई जायेगी। शहर में तमाम छोटे-बड़े कूड़ेदान लगाये गये हैं। 22 जोड़े बड़े कूड़ेदान खरीदें हैं, जिन वार्ड में भी जरूरत है वहां लगाये जा रहे हैं। ग्रीन हिल्स के सहयोग से लगभग 5 टन प्लास्टिक कचरा जमा किया गया है। जिसका उपयोग लोनिवि के माध्यम से सड़क निर्माण के लिए किया जायेगा। अंडर ग्राउंड डस्टबिन के लिए 1 करोड़ 4 लाख का प्रस्ताव है। 15 स्थान इसके लिए चयनित किये जायेंगे। घरेलू प्रयोग के लिए भी कूड़ेदान खरीदे जा रहे हैं, जिनका प्रयोग के रूप में फिल्हाल किसी एक वार्ड में वितरण किया जायेगा। 90 प्रतिशत संपर्क मार्गों का जीर्णोद्धार पूरा कर लिया गया है। शहर में जल्द स्थान चयनित कर वैंडर्स जोन भी बनाया जायेगा, जिससे बाजार से अतिक्रमण हट जायेगा। कर्मचारियों के तीन साल का पीएफ जमा कर लिया गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की 8.50 करोड़ की देनदारी थी अब केवल 2.50 करोड़ की रह गई है। 5 करोड़ सेवानिवृत्तों तथा 10 लाख पावर कारपोरेशन का चुका दिया गया है। प्रेस वार्ता में अधिशासी अधिकारी श्याम सुंदर सहित तमाम सभासद मौजूद थे।

 

 

जनहितकारी योजनाओं का लाभ लेने को जरूरी है सीमा विस्तार

अल्मोड़ा। पालिकाध्यक्ष ने सीमा विस्तार को लेकर कहा कि मौजूदा दौर में पालिका का सीमा विस्तार समय की मांग है और बहुत जरूरी है। अल्मोड़ा में महत्वपूर्ण योजना सीवर लाइन के तृतीय चरण का काम केवल इसी कारण रूका है। आज भी तीन चैथाई आबादी अमृत योजना के लाभ से वंचित रह गई है। सीमा विस्तार का प्रकरण कई सालों से चल र हा था। इसको लेकर पालिका पर सरकार का बड़ा दबाव था। जिसको लेकर उन्हें मजबूरन प्रस्ताव बनाकर भेजना पड़ा। अब जिला जजी, बेस अस्पताल, प्रस्तावित मेडिकल कालेज व आवास विकास का पालिका में विलय का प्रस्ताव है।

 

 

हमारी कई मांगों पर शासन ने नहीं दिया ध्यान

अल्मोड़ा। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि कई प्रस्तावित कार्यों में उन्हें सफलता नहीं मिल पाई है। जलकर में प्रतिवर्श होने वाली वृद्धि को समाप्त करने के लिए वह कई बार शासन से पत्र व्यवहार कर चुके हैं। जलकर की वसूली मीटर के आधार पर करने की उनकी मांग है। वहीं टम्टा धर्मशाला का निर्माण भी लंबित है।

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