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जलागमों का निरीक्षण कर लौटी टीम, टीम ने झील में मिलने वाले नालों का भी लिया जायजा

नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के घटते जल स्तर के कारणों का पता लगाने व इसके जलागम क्षेत्रों व नालों के बावत जानकारी लेने नैनीताल आई आईआईएसडब्ल्यूसी यानि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोयल एंड वाटर कंजर्वेशन देहरादून की सात सदस्यीय टीम शुक्रवार को लौट गई है। आठ जनवरी को नैनीताल पहुंची इस टीम ने नैनी झील के प्रमुख सूखाताल कैचमेंट एरिया सहित झील के अन्य जलागम क्षेत्रों का भी गंभीरता से अध्ययन किया। डॉ. ओजस्वी की अगुवाई में आई इस सात सदस्यीय टीम ने इन चार दिनों में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ हांडीबांडी, अयारपाटा, स्नोव्यू, कलक्ट्रेट क्षेत्र सहित सूखाताल क्षेत्र पहुंच कर निरीक्षण किया। इसके अलावा नैनी झील में मिलने वाले प्रमुख नालों का भी निरीक्षण किया। टीम ने नालों के माध्यम से झील में पहुंच रहे मलुबे के बावत भी विस्तार से जानकारी ली। इससे पूर्व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईड्रोलॉजी रुड़की के विशेषज्ञ नैनीताल पहुंच चुके हंै। इन संस्थानों द्वारा सिंचाई विभाग से डीपीआर कार्यों के लिए अनुबंध भी किया जा चुका है। सिंचाई विभाग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोयल एंड वाटर कंजर्वेशन देहरादून की सात सदस्यीय टीम ने नैनीताल पहुंच कर प्रमुख जलागम सूखाताल का निरीक्षण किया। इसके अलावा बरसात में झील को रिचार्ज करने वाले नालों का भी निरीक्षण किया गया है। टीम शुक्रवार को वापस लौट गई है।
झील का जलस्तर 4.2 फीट पहुंचा
नैनीताल। बीते तीन सालों से लगातार नैनी झील के गिरते जल स्तर पर स्थानीय लोगों की चिन्ता के साथ ही शासन स्तर पर भी चिंता प्रकट की गई है। यही नहीं आजादी के पूर्व से झील का रखरखाव करने वाले लोनिवि से अधिकार वापस लेकर इसकी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंप दी गई है। तीन वर्षों में विश्व प्रसिद्ध नैनी झील का जलस्तर चिन्ताजनक स्थिति में गिर रहा है। अब तक झील का जलस्तर 12 फीट से गिरकर 4.2 फीट पहुंच गया है।

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