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जनवरी में ही नैनी झील का जल स्तर 9.4 फीट नीचे पहुंचा

 

उत्तरांचल दीप ब्यूरो, नैनीताल। इस बार अब तक पर्याप्त वर्षा व बर्फवारी नही होने व लाखों लीटर पानी जलागम क्षेत्रों से दोहन करने के बाद जीवनदायिनी नैनी झील लगातार खतरे की ओर बढ़ रही है। एक ओर नैनी झील का जल स्तर लगातार गिर रहा है। दूसरी ओर झील के जलागम क्षेत्रों से भूमिगत जल 11 नलकूपों से 14.50 लाख लीटर पानी रोजाना लगातार दोहन किया जा रहा है। यह सिलसिला पिछले तीन-चार वर्षों से लगातार चल रहा है। लेकिन शासन प्रशासन महज चिन्ता ही प्रकट कर रहा है। जमीनी योजनाएं कहीं नही दिख रही है। तेजी से घट रहे जलस्तर नैनीताल के लिए सर्वाधिक चिन्ता का विषय बना हुआ है। जनवरी के पहलेे पखवाड़े में ही झील का जलस्तर सामान्य स्तर से 9.4 फीट नीचे चला गया है। चिन्ता यह है कि भीषण गर्मी के दौरान झील की हालत क्या होगी। इधर लगातार झील के जलागम क्षेत्रों से जल संस्थान लाखों लीटर पानी का रोजाना दोहन कर रहा है। लोगों का कहना है कि जल संस्थान अभी से पानी का वितरण रोस्टर से नही करता तो गर्मियों में शहर की हालत दयनीय हो जायेगी। मालूम हो कि मानसून के बाद नैनीताल में पिछले पांच माह से वर्षा नही हुई है। प्रमुख जलागम क्षेत्र सूखाताल पूरी तरह सूख चुका है। जलागम क्षेत्र से ही जल संस्थान नलकूपों से पानी खींच रहा है। वहीं अब तक वर्षा व बर्फवारी नही होने से झील रिचार्ज नही हो रही है। अब बर्फवारी नैनी झील 40 प्रतिशत भूमिगत जल से तथा 60 प्रतिशत बरसात के जल से रिचार्ज होती है। झील के जल स्तर को सामान्य बनाने के लिए शीतकालीन वर्षा व पर्याप्त बर्फवारी जरूरी है। लेकिन इस बार अब तक ऐसा नही हो सका है। जानकारों की माने तो अगर अब भी पर्याप्त वर्षा व बर्फवारी नही हुई तो गर्मियों में जल संकट पैदा हो सकता है। इधर लगातार जलादोहन के बाद झील के जल स्तर पर भारी गिरावट आने के बाद भी सरकारी तंत्र पर कोई प्रभाव नही पड़ रहा है।

 

 

जल स्रोतो के पानी का संरक्षण किये जाने की मांग

नैनीताल। उत्तराखंड देवभूमि क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय संयोजक केएल आर्य ने तल्लीताल के रईस होटल के नीचे जल स्रोतो के पानी का संरक्षण किये जाने समेत विभिन्न मांगो को पूरा किये जाने की मांग की है। केएल आर्य का कहना है कि रईस होटल एवं बलियानाला क्षेत्र की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए रईस होटल के नीचे व बलियानाला की पहाड़ी से रिसाव हो रहे दोंनो जल स्रोतो का पानी का संरक्षण किया जाना आवश्यक है। इसके लिए उचित कार्रवाई की जानी आवश्यक है। केएल आर्य ने कहा कि पूर्व भी जिला प्रशासन को लिखित रूप में कार्रवाई किये जाने के लिए पत्र प्रेषित किया गया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नही की गयी। उन्होंने इसके संरक्षण के लिए पंपिंग योजना के अंतर्गत जल को पुन: नैनी झील में समायोजित करने के लिए उचित कार्रवाई किये जाने की मांग प्रशासन से की है। आर्य का कहना है कि नैनी झील का जल स्तर जिस तेजी से घट रहा है इसे संतुलित करने के लिए दोंनो जल स्रोतो का पानी का संरक्षण किया जाना आवश्यक है।

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