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नैनीताल: 2017 साल में डेंगू ने तोड़े सभी रिकार्ड

नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। नैनीताल जिले के लिये डेंगू बीमारी एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है। बीते साल  डेंगू के मरीजों की कुल तादाद ने पिछले कई सालों के रिकार्ड तोड़ दिये हैं। आलम यह रहा कि सन 2013 से 2016 तक जितने डेंगू मरीज नैनीताल जिले में पाये गये थे उनके कुल योग से ज्यादा मरीज पिछले साल पाये गये।
नैनीताल जिले के स्वास्थ्य महकमे की रिपोर्ट के अनुसार बीते साल 2017 में यहां डेंगू के कार्ड टेस्ट पॉजीटिव 1957 और एलाइजा टेस्ट पॉजीटिव 297 मरीज थे। इसके अलावा 2013 में डेंगू कार्ड टेस्ट मरीज 489, 2014 में 596, 2015 में 928 और 2017 में 936 थे। डेंगू बीमारी की एलाइजा चेकअप पुष्टिï में 2013 में 25, 2014 में 17, 2015 में 36 और 2016 में 112 मरीज पाये गये। उल्लेखनीय हैकि बीते साल डेंगू मरीजों की तादाद में काफी बढ़ोत्तरी हुयी है।

 
छह मरीजों की हुई थी डेंगू से मौत
हल्द्वानी। डेंगू के चलते नैनीताल जिले में कुल छह मरीजों की मौत बीते साल हुई थी हालांकि स्वास्थ्य महकमा इन मौतों का कारण डेंगू को नहीं मानता है। इसके अलावा डेंगू मरीजों की कुल तादाद भी सरकारी आंकड़ों से ज्यादा होने की संभावना है क्योंकि निजी चिकित्सालय पूरी तरह से अपने यहां आने वाले मरीजों की रिपोर्ट सरकारी स्वास्थ्य महकमे को नहीं देते हैं।

 
एडीज मच्छर की बदली प्रकृति
हल्द्वानी। डेंगू होने का कारण एडीज मच्छर है। बीते साल डेंगू मरीज दिसम्बर माह तक पाये गये थे जबकि माना जाता है कि एडीज मच्छर का प्रकोप सर्दियां शुरू होने के साथ खत्म हो जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि एडीज मच्छर ने अपनी प्रकृति बदली है और अब उसने केवल बारिश के मौसम में नहीं बल्कि सर्दियों के मौसम में भी पनपने की क्षमता विकसित कर ली है।

टायफाइड, टीबी, मलेरिया के रोगी रहे कम
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में बीते साल 2017 में टायफाइड, मलेरिया, टीबी बीमारियों के रोगी अन्य सालों से अपेक्षाकृत कम रहे। 2017 में टायफाइड के 377, 2016 में 720, 2015 में 1010, 2014 में 313 और 2013 में 539 मरीज पाये गये थे। 2017 में 362, 2016 में 427, 2015 में 301, 2014 में 350 और 2013 में 345 मरीजों में टीबी रोग की पुष्टिï हुई थी। इसी तरह मलेरिया के काफी कम मरीज 2017 में पाये गये थे। मलेरिया (पीवी) के केवल 49 मरीज पाये गये थे जो बीते सालों के मुकाबले काफी कम थे। इसके साथ ही मलेरिया (पीएफ) के भी केवल 2 ही मरीज थे।
2017 में डेंगू के कन्फर्म 297 मरीज थे जिनमें से 68 मरीज नैनीताल जिले से बाहर के थे। देखने में आया था कि कई मरीजों ने अपना पता स्थानीय ही लिखवा दिया था। डेंगू मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुये स्वास्थ्य महकमे ने कई स्वास्थ्य कैम्प लगाये थे और डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में फागिंग करवाई थी। इसके अलावा अन्य बीमारियों में काफी कमी आयी है जैसे बीते साल डायरिया के रोगियों की तादाद में 28 प्रतिशत की कमी आयी है। इसके लिये स्वास्थ्य महकमे ने अभियान चलाया था। अन्य बीमारियां जैसे टायफाइड, मलेरिया, टीबी के रोगी भी काफी कम रहे। हालांकि के कुत्ते काटने के मामले पांच प्रतिशत ज्यादा रहे।
एनके कांडपाल, जिला संक्रामक रोग विश्लेषक, नैनीताल

 
डेंगू मरीजों को लेकर स्वास्थ्य महकमे की कुछ नाकामियां
-सुशीला तिवारी अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एलाइजा किट उपलब्ध नहीं करायी गयी।
-डेंगू से हुई मरीजों की मौत का कारण डेंगू को नहीं माना।
-डेंगू हैल्पलाइन की शुरुआत काफी देर से की गयी।
-एडीज मच्छर की बदली प्रकृति को स्वास्थ्य महकमे ने संज्ञान में नहीं लिया।

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