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नशे की लत का मनोवैज्ञानिक उपचार संभव

आजकल नशे का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है शादी विवाह, बर्थडे अथवा पार्टी किसी न किसी बहाने इन्सान नशा कर रहा है बच्चों एवं युवाओं में बढ़ती नशे की लत के कारण अधिकतर माता-पिता काफी परेशान हैं। नशे के प्रभाव से मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक व व्यवहारिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है।
आज विश्व नशा मुक्ति दिवस है इस अवसर पर हमने शहर की जानी मानी मनसा मानसिक क्लीनिक मुखानी की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. नेहा शर्मा से नशे से होने वाले नुकसान के बारे मेें जानकारी ली। उन्होंने बताया कि नशा एक मनोवैज्ञानिक समस्या है इसे काउंसिलिंग के जरिये रोगी के आई क्यू का मूल्यांकन कर नशे की सोच को बदला जा सकता है। नशा मन से होता है और इसके निवारण के लिए मन का उपचार जरूरी है। उन्होंने कहा कि नशे का मनोवैज्ञानिक अर्थ है किसी भी चीज की लत या आदी हो जाना। जब व्यक्ति किसी भी चीज पर मानसिक रूप से निर्भर होता है तो वह नशे में है। नशेे के अनेक रूप हैं जैसेे शराब, चरस, स्मैक, सिगरेट, इंजेक्शन एवं सोशल मीडिया आदि। कभी शौक के नाम पर, कभी दोस्ती के नाम पर, कभी दुखों के नाम पर, कभी मजबूरी, कभी टेंशन के नाम पर लेकिन नशा कब जिन्दगी का हिस्सा बन बन जाता है पता ही नहीं चलता।

नशे के मनोवैज्ञानिक कारण
बुद्धि की कमी
मनोरंजन के रूप में।
आदत बना लेना।
इच्छाशक्ति का कम होना।
कुण्ठा में नशा करना।
फैशन के तौर पर नशा करना।
काल्पनिक दुनिया में रहना व वास्तविकता से दूरी।
समायोजन की समस्या।
ज्ञान का अभाव

नशे से होने वाले नुकसान
नशे से शारीरिक एवं मानसिक रूप से नुकसान होता है जैसे:- किडनी, लीवर, फेफड़ों से संबंधित बीमारी, ब्लड प्रेशर, आंतों के घाव, मानसिक रूप से व्यक्ति में घबराहट, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, शारीरिक रूप से थकना, नींद की कमी, भूख न लगना आदि।

नशे के मनोवैज्ञानिक उपचार
नशे की लत पडऩे पर कुशल मनोचिकित्सक से परामर्श लेें, काउंसिलिंग व मनोवैज्ञानिक उपचार करवायें।

डायरी बनायें
-नशा कब और कितनी मात्रा मेेें लेते हैं लिखें
-अपने परिवार व अपनी उपयोगिता को जानेें।
-कैरियर के बारे मेें सोचे एवं ध्यान दें

लक्ष्य बनायें
-दृढ़ निश्चय करें व मनोबल बढ़ायेें
-सकारात्मक रहें खेल कूद में रुचि बढ़ायें, किताबें पढ़ें, म्यूजिक सुनें, दिनचर्या बनायें एवं व्यस्त रहें।

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