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पहाड़पानी के पास जंगल में सडक़ के किनारे बैठा फलों को बेचता बच्चा।

पहाड़ के फलों को बेच कर रोजगार कर रहे हैं बच्चे

पहाड़पानी/नैनीताल। जहां इन दिनों पर्यटक पहाड़ों की तरफ रुख कर रहे हैं तो पहाड़ों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते पहाड़पानी और इसके आसपास के क्षेत्रों में कई बच्चों ने पहाड़ के फलों को यहीं सडक़ के किनारे पर बेचने का रोजगार शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि नगरों में जहां पहाड़ी फलों के दाम आसमान छू रहे हैं। वहीं गांवों के सडक़ किनारे बिक रहे फलों के दाम बहुत ही कम है। इन क्षेत्रों में घूमने जाने वाले सैलानी खूब खरीददारी कर रहे है। धारी मुक्तेश्वर, रामगढ़, भीमताल सहित फल उत्पादन पट्टियों में सीजनल रोजगार अब खूब फल-फूल रहा है। इससे बच्चे ही नहीं उनके परिवार को भी अतिरिक्त आमदनी हो रही है। इन दिनों सडक़ के किनारे दुकान लगाकर बच्चों द्वारा फल बेचकर अपने परिवार के भरणपोषण में हाथ बंटा रहे हैं। हर साल मई के पहले सप्ताह में काफल के फल को जंगलों से तोडक़र छोटे-छोटे थैले बनाकर फुटकर रेट पर बच्चे बेचना शुरू करते हैं। जिससे १०० से ५०० रुपये तक प्रतिदिन की बिक्री करते हैं। इसके बाद पुलम, आड़ू, खुमानी को सडक़ के किनारे जंगलों के बीच बैठकर बेचा जा रहा है। इस रोजगार में बच्चे, महिलाएं, पुरुष सभी शामिल हैं। इससे क्षेत्रीय रोजगार के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ रही है और ग्राहकों को माल भी अच्छे रेट में मिल रहा है। हालांकि इसमें कई दिन बच्चों को माल बेचते देखकर लगता है कि वह स्कूल नहीं जाते लेकिन बच्चों का कहना है कि वह अन्य बचे समय में अपने माता-पिता का हाथ बटाते हैं। देशी विदेशी पर्यटक पहाड़ के प्रसिद्ध काफल समेत आड़ू, पुलम, खुमानी, नाशपाती, चुस्की, सेब समेत ताजे फलों को खरीद कर स्वाद का आनंद उठाते हैं। फलों के साथ साथ आलू भी खूब बिकता है। लोगों का कहना है कि यदि सरकार इस तरह के कारोबार के लिए सडक़ों के किनारे छोटे-छोटे हट बना कर ग्रामीणों को उपलब्ध करा दे तो इसके दूरगामी परिणाम गांवों को मिलेगा।

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